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जिस कम्पनी पर भरोसा करता है देश, उसी का गला घोंटना चाहती है मोदी सरकार

भले ही उसकी सेवाएं प्राप्त करने में दिक्कत होती हो, लेकिन देश के लोगों का उस कम्पनी पर पूरा भरोसा है। इसके बावजूद केन्द्र की मोदी सरकार उसका गला घोंटने पर तुली हुई है। इस कम्पनी का नाम बीएसएनएल है और वह देश के उपभोक्ताओं को विभिन्न तरह का झांसा देकर गुुमराह करने वाली निजी क्षेत्र की टेलीकॉम कम्पनियों को कमजोर आर्थिक हालत के बाद भी सीधी चुनौती दे रही है। देश में इस कम्पनी की साख का अंदाजा एक दिन पहले कश्मीर में बहाल की गई पोस्टपेड मोबाइल सेवा हासिल करने के लिए उमड़ी भीड़ से लगाया जा सकता है। घाटी के नागरिक पोस्टपेड़ सेवा बहाल होते ही बीएसएनएल के कार्यालयों पर सिम लेने के लिए टूट पड़े क्योंकि अन्य प्राइवेट आपरेटर वहां सस्ती सेवाएं देने को तैयार नहीं हैं।

जम्मू-कश्मीर को विशेष राज्य का दर्जा देने वाले संविधान के अनुच्छेद 370 को हटाने और राज्य को दो केन्द्र शासित प्रदेशों में विभाजित करने संबंधी केन्द्र सरकार के निर्णय के 10 सप्ताह बाद पोस्टपेड मोबाइल फोन सेवाएं सोमवार को बहाल कर दी गयीं।
केन्द्र सरकार ने पांच अगस्त को अनुच्छेद 370 को निरस्त करने का फैसला किया था और उसी दिन से घाटी में भारत संचार निगम लिमिटेड समेत सभी कंपनियों की प्रीपेड मोबाइल एवं इंटरनेट सेवाएं स्थगित हैं जो फिलहाल स्थगित ही रहेंगी। पर्यटन उद्योग से जुड़े लोगों और मीडियाकर्मियों ने पोस्टपेड मोबाइल सेवाएं बहाल करने के फैसले का स्वागत किया है लेकिन साथ ही सभी सेलुलर कंपनियों से ब्रॉडबैंड समेत इंटरनेट सेवाएं शुरू करने की मांग की है।

घाटी के कुछ बुजुर्ग लोगों ने मोबाइल इंटरनेट सेवा को निलंबित किए जाने का स्वागत करते हुए कहा कि इससे लोग मोबाइल फोन पर हालचाल पूछने की बजाए एक-दूसरे से घर जाकर मिल रहे हैं। प्रशासन ने घाटी के पर्यटन स्थलों में पर्यटकों के लिए मोबाइल इंटरनेट सेवा उपलब्ध कराने की घोषणा की है। घाटी में 40 लाख से अधिक पोस्टपेड मोबाइल फोन सेवा अब काम करने लगेंगी, जिससे आम लोगों और सुरक्षा बल के जवानों को राहत मिलेगी तथा वे अपने परिजनों से संपर्क कर सकेंगे। इस बीच, केंद्र सरकार के निर्णय के विरोध में कश्मीर घाटी में बंद आज 11वें सप्ताह में प्रवेश कर गया। रमीज खान नामक घाटी के एक व्यापारी ने पोस्टपेड मोबाइल सेवा बहाल करने के फैसले का स्वागत करते हुए कहा, “ कश्मीर घाटी में 70 दिनों के बाद पोस्टपेड मोबाइल सेवा बहाल होने से मैं बहुत ही खुश हूं। संचार व्यवस्था के बिना जिंदगी बहुत ही बेहाल हो गयी थी, इसके शुरू होने से थोड़ी राहत मिलेगी, लेकिन प्रशासन को इंटरनेट एवं प्रीपेड मोबाइल सेवा से भी प्रतिबंध हटा लेने चाहिए।” गौरतलब है कि अक्टूबर के पहले सप्ताह में बड़ी संख्या में मीडियाकर्मियों ने श्रीनगर में रैली निकालकर मोबाइल एवं इंटरनेट सेवाएं बहाल करने की मांग की थी।

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