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माफिया डॉन दाऊद इब्राहिम की कम्पनी में पैसा लगाने की आंच में झुुलस सकती है मोदी सरकार, एक आईएएस अधिकारी का नाम आया सामने!

उत्तर प्रदेश पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा (ईओडब्ल्यू) ने 4,000 करोड़ रुपये के कर्मचारी भविष्य निधि (ईपीएफ) घोटाले में अब नौकरशाहों को अपने शिकंजे में लेने लगी है, और ऐसे में केंद्रीय कृषि सचिव संजय अग्रवाल की मुश्किलें बढ़ सकती हैं।
ईओडब्ल्यू द्वारा जब्त दस्तावेजों के अनुसार, उप्र काडर के वरिष्ठ आईएएएस अधिकारी, और उप्र के तत्कालीन अतिरिक्त सचिव (ऊर्जा) और उप्र विद्युत निगम लिमिटेड (यूपीपीसीएल) के अध्यक्ष संजय अग्रवाल इंप्लाईस ट्रस्ट का नेतृत्व कर रहे थे, जिसमें एक बड़ा घोटाला पिछले सप्ताह सामने आया।

केंद्र सरकार के शीर्ष सचिव के लिए मुश्किलें इसलिए बढ़ गई हैं, क्योंकि राज्य सरकार के हजारों कर्मचारियों और मजदूर यूनियनों की ओर से दबाव बढ़ता जा रहा है कि उन नौकरशाहों के खिलाफ कार्रवाई शुरू किया जाए, जो उनकी कठिन मेहनत से अर्जित की गई गाढ़ी कमाई को एक विवादास्पद कंपनी, दीवान हाउसिंग फायनेंस (डीएचएफएल) में निवेश के लिए जिम्मेदार हैं। दस्तावेजों से पता चलता है कि मार्च 2017 में संजय अग्रवाल (ट्रस्ट के चेयरमैन के रूप में) के नेतृत्व में यूपीपीसीएल के पांच शीर्ष अधिकारी ट्रस्ट की एक महत्वपूर्ण बैठक में उपस्थित थे, जिसमें भविष्य निधि का निवेश डीएचएएफएल में करने का महत्वपूर्ण निर्णय लिया गया था। उन पांच अधिकारियों में से तीन को गिरफ्तार किया जा चुका है, जिसमें यूपीपीसीएल के तत्कालीन प्रबंध निदेशक, ए.पी. मिश्रा भी शामिल हैं।

बिजली इंजीनियर यूनियन अब बिजली विभाग के उन शीर्ष अधिकारियों के खिलाफ त्वरित कार्रवाई की मांग कर रहे हैं, जिन्होंने कर्मचारियों का भविष्य निधि निवेश करने के लिए डीएचएफएल जैसी किसी कंपनी को चुनने में नियमों को ताक पर रख दिया। ऑल इंडिया पॉवर इंजीनियर्स फेडरेशन के चेयरमैन, शैलेंद्र दुबे ने आईएएनएस से कहा कि उनकी दो प्रमुख मांगें हैं। पहली मांग यह है कि कर्मचारियों का भविष्य निधि सरकार वापस लाए, और दूसरा यह कि इस गड़बड़ी के लिए प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से जो भी शीर्ष अधिकारी जिम्मेदार हैं, उनके खिलाफ कार्रवाई की जाए। दुबे ने कहा, “हमारी दो घंटे की दैनिक राज्यव्यापी हड़ताल जारी है। यदि पर्याप्त कार्रवाई नहीं की गई तो हम सात नवंबर से 48 घंटे की हड़ताल करेंगे।”

दूसरी तरफ मुख्यमंत्री कार्यालय के करीबी सूत्रों ने लखनऊ में कहा कि घोटाले का मुख्य साजिशकर्ता यूपीपीसीएल के तत्कालीन प्रबंध निदेशक ए.पी. मिश्रा थे, जिनके खिलाफ भ्रष्टाचार से जुड़े कई मामले चल रहे हैं। सूत्र ने कहा, “मिश्रा ने यूपीपीसीएल के निदेशक (वित्त) सुधांशु द्विवेदी, और महाप्रबंधक पी.के. गुप्ता के साथ मिलकर डीएचएफएल जैसी निजी कंपनियों के लिए रास्ते तैयार किए। गुप्ता ट्रस्ट के सचिव थे और द्विवेदी उसके एक सदस्य थे। दोनों गिरफ्तार हो चुके हैं। मामले में दर्ज प्राथमिकी के अनुसार, ईओडब्ल्यू द्वारा गिरफ्तार अधिकारियों ने डीएचएफएल में निधि हस्तांतरित करने से पहले सरकार के शीर्षस्थ स्तर से अनुमति नहीं ली थी। डीएचएफएल एक ऐसे कंपनी है, जिसके प्रमोटरों कपिल वधावन और धीरज वधावन से प्रवर्तन निदेशालय ने हाल ही में माफिया डॉन दाऊद इब्राहिम से संबंधित कंपनियों के साथ उनके संबंधों को लेकर पूछताछ की थी।

 

 

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