मायावती इसलिए देखती है प्रधानमंत्री बनने का सपना, 40 सांसदों के दम पर ये बन चुका है पीएम

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने रविवार को उत्तरप्रदेश में एक चुनावी सभा में तंज किया कि चालीस सीटों पर लड़ने वाले प्रधानमंत्री बनने का सपना देखते हैं। प्रधानमंत्री की विपक्षी नेताओं की खिल्ली उड़ाने की आदत को दरकिनार करते हुए हम आपको बताते हैं कि बसपा प्रमुख मायावती प्रधानमंत्री बनने का सपना क्यों देखती है! यह जानने के लिए हमें 9ं0 के दशक में जाना होगा जब भारत को 64 सांसदों के रूप में एक प्रधानमंत्री मिला था।

बात 1989 की है। वीपी सिंह ने चालाकी के साथ देवीलाल को इस्तेमाल कर प्रधानमंत्री की कुर्सी हथिया ली थी। अध्यक्ष जी के नाम से मशहूर जनता दल के नेता चन्द्रशेखर ने उन्हें प्रधानमंत्री स्वीकार नहीं किया। इस बीच देवीलाल और वीपी सिंह में तनातनी हुई तो गद्दार मानसिकता के वीपी सिंह ने उन्हें भी माफ नहीं किया और मंडल कमीशन की रिपोर्ट लागू करके उन्हें निष्प्रभावी बनाने का दांव चला। गुस्से से पागल देवीलाल ने वीपी सिंह को हटाने के लिए जनता दल को तोड़ दिया और कांग्रेस ने चुनावों से बचने के लिए 64 सांसदों वाले संसदीय दल के चन्द्रशेखर को बाहर से समर्थन देकर प्रधानमंत्री बनवा दिया।

ये अलग बात है कि उनकी सरकार कांग्रेस ने अधिक दिन तक चलने नहीं दी और देश को 1991 में मध्यावधि चुनाव में जाना पड़ा। उसके बाद भी 1996 में जब कांग्रेस हार गई और अटल बिहारी वाजपेयी की 13 दिन की सरकार गिर गई तो फिर छोटे से संसदीय दल के नेता एच डी देवेगौडा प्रधानमंत्री बन गए। उनके बाद आई के गुजराल भी प्रधानमंत्री बने।

इन उदाहरणों को ध्यान में रखते हुए ही मायावती यह मानकर प्रधानमंत्री बनने का सपना देखती हैं कि जब चन्द्रशेखर प्रधानमंत्री बन सकते हैं तो वे अपने तीस—चालीस सांसदों के दम पर प्रधानमंत्री क्यों नहीं बन सकती। वैसे मायावती का यह सपना शेखचिल्ली जैसा है क्योंकि अब कांग्रेस उन्हें बाहर से समर्थन नहीं देगी और उन्हें पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी से भी मुकाबला करना है।