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अपने ही बाल नोचते हुए मौत के मुंह में गया था सोमनाथ मंदिर को लूटने वाला महमूद गजनवी - Mobile Pe News
Sunday , February 23 2020
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अपने ही बाल नोचते हुए मौत के मुंह में गया था सोमनाथ मंदिर को लूटने वाला महमूद गजनवी

पृथ्वी पर साक्षात राक्षस के रूप में जन्म लेने वाले महमूद गजनवी ने यह कभी नहीं सोचा होगा कि भारत की आस्था के केन्द्र सोमनाथ मंदिर को नष्ट करने का दंड उसे इस रूप में भोगना होगा। उस राक्षस ने सोमनाथ मंदिर को न सिर्फ लूटा बल्कि ​शिवलिंग का भी अपमान किया था। इसलिए तीन साल तक पागलों की तरह अपने बाल नोचता रहा।

अंतत: उसे ऐसी दर्दनाक मौत मिली जिसके बारे इतिहासकारों ने बहुत कम लिखा है। कहते हैं कि मरने से पहले उसने अपने पापों के लिए भगवान से क्षमा भी मांगी थी। ग़ज़नवी ने भारत पर एक दर्जन से अधिक आक्रमण किए थे। ग़ज़नवी यमीनी वंश के तुर्क सरदार व ग़ज़नी के शासक सुबुक्तगीन का पुत्र था। उसका जन्म 971 ई. में हुआ था। अपनी क्रूरता के चलते वह मात्र 27 वर्ष की आयु में ग़ज़नी का सेनापति बन गया। इसके बाद वह मध्य अफ़ग़ानिस्तान का शासक बना।

बचपन से देखता था लूटपाट के सपने

तुर्किस मूल का ग़ज़नवी ने अपना सुन्नी इस्लामी साम्राज्य आज का पूर्वी ईरान व अफ़गानिस्तान ख़ुरासान पाकिस्तान और उत्तर पश्चिम भारत तक फैला लिया था। महमूद ग़ज़नवी बचपन से अक्सर भारत की दौलत को लूटकर मालामाल होने के सपने देखता था। ग़ज़नवी ने आक्रमणों का सिलसिला 1001 ई. से शुरू किया। इस दौरान ग़ज़नवी यहां की अपार सम्पत्ति को लूट ले गया।

 

खूब समझाया फिर भी शिवलिंग को नहीं बख्शा

ग़ज़नवी ने सबसे बड़ा आक्रमण 1026 ई. में सोमनाथ मंदिर पर किया। वहां का शासक चालुक्य वंश का भीम गजनवी का नाम सुनते ही डर के मारे भाग गया। ग़ज़नवी ने सोमनाथ मंदिर को तोड़ने के साथ ही शिवलिंग को भी तहस-नहस कर दिया था।

ग़ज़नवी सोमनाथ मंदिर के हज़ारों लोगों व पुजारियों को भी मौत के घाट उतार कर मंदिर का सारा सोना और ख़ज़ाना लूट ले गया। ग़ज़नवी ने भारत पर अंतिम आक्रमण 1027 ई. में करके पंजाब को अपने राज्य में मिला लिया और लाहौर का नाम बदलकर महमूदपुर कर दिया था।
इतिहास के अनुसार अंतिम समय में महमूद ग़ज़नवी कई तरह के रोगों से पीड़ित हो गया। वह अपने दुष्कर्मों को याद कर रोता रहता था। ऐसे ही बाल नोचते हुए आख़िरकार 30 अप्रैल 1030 को उसकी मौत हो गई।

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