Deprecated: title is deprecated since version WPSEO 14.0 with no alternative available. in /home/mobilepenews/public_html/wp-includes/functions.php on line 4723

Deprecated: WPSEO_Frontend::get_title is deprecated since version WPSEO 14.0 with no alternative available. in /home/mobilepenews/public_html/wp-includes/functions.php on line 4723

Deprecated: title is deprecated since version WPSEO 14.0 with no alternative available. in /home/mobilepenews/public_html/wp-includes/functions.php on line 4723

Deprecated: WPSEO_Frontend::get_title is deprecated since version WPSEO 14.0 with no alternative available. in /home/mobilepenews/public_html/wp-includes/functions.php on line 4723
सामाजिक विचारो की दो फिल्मों के साथ वापसी निर्माता किरण राव की – Mobile Pe News

सामाजिक विचारो की दो फिल्मों के साथ वापसी निर्माता किरण राव की

नयी दिल्ली। पीपली लाईव और तारे जमीं पर जैसी फिल्मों की निर्माता किरण राव ने आठ साल बाद बतौर निर्देशक वापसी करते हुए कहानी सुनाने में मोबाइल की महत्ता बताने के लिए फेसबुक इंडिया के साथ हाथ मिलाया है ।

राव ने फेसबुक इंडिया के लिए दो फिल्मों के साथ निर्देशक के रुप में वापसी की है । राव के निर्देशन में बनी प्रत्येक फिल्म दस सेकंड से कम अवधि की है और देश में छोटे मोबाइल वीडियो विग्यापनों को पुनर्परिभाषित करने के लिए इस वर्ष मई में लांच की गई फेसबुक थंबस्टापर्स पहल का एक हिस्सा है ।

दोनों फिल्में दो सर्वाधिक कड़वी सामाजिक सच्चाईयों.लिंग असमानता और महिलाओं के खिलाफ घरेलू हिंसा पर आधारित है। पहली फिल्म में घर में भाई और बहन को दूध परोसते हुए दिखाया गया है । भाई के गिलास में दूध की मात्रा बहन के गिलास में दूध से काफी ज्यादा है । भाई अपने ग्लास का थोड़ा दूध बहन के गिलास में डालता है जिससे कि दोनों गिलास में दूध की मात्रा बराबर हो जाए और इस तरह लिंग असमानता के खिलाफ सोचने पर मजबूर कर देने वाली एक आकर्षक कहानी आकार लेती है ।

दूसरी फिल्म में एक महिला अपनी चोट पर बर्फ रखते हुए दिखाई जाती है , जब उसकी घरेलू नौकर उसके पास आकर उसका सेलफोन देती है जिसमें पुलिस का नंबर होता है। इस फिल्म का मकसद लोगों को पहला साहसी कदम उठाने के लिए प्रेरित करना है।दोनों फिल्में बेहद सशक्त ढंग से यह दर्शाती हैं कि पहले कुछ सेकंडों तक दर्शकों का ध्यान खींचे रखना कितना जरुरी होगा । मोबाइल उपयोग की संवेदनशीलताओं को ध्यान में रखते हुए दोनों फिल्में मोबाइल पर बगैर दिक्कत के देखने के लिए लंबवत लैंडस्केप पर बनाई गई है और फिल्में यह सुनिश्चत करती हैं कि मोबाइल की आवाज बंद होने पर भी संदेश समझ आ जाए ।