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अमेरिका में घुसे भारत के ये जाबांज, स​बक सीखकर ही बाहर निकलेंगे

अमेरिका में अध्ययन करने वाले भारतीय छात्रों की संख्या पहली बार दो लाख से ऊपर पहुंच गयी है।अमेरिकी दूतावास के सूत्रों ने यहां बताया कि अमेरिका में अध्ययन करने वाले भारतीय छात्रों की संख्या पिछले वर्ष की तुलना में लगभग तीन प्रतिशत बढ़कर 202014 पर पहुंच गयी है। यह लगातार छठा वर्ष है जब उच्च शिक्षा हासिल करने के लिए अमेरिका जाने वाले भारतीयों की कुल संख्या में वृद्धि हुई है।अमेरिकी दूतावास के दूतावास संबंधी मामलों के सलाहकार मंत्री चेरिस फिलिप्स ने यूनाइटेड स्टेट्स इंडिया एजूकेशनल फाउंडेशन को संबोधित करते हुए कहा, “ दोनों देशों के बीच छात्रों के शिक्षा के संबंध में आना-जाना उस आधार को मजबूत करने में मदद करता है जिस पर हमारी रणनीतिक साझेदारी बनी है। भारतीय छात्रों को बेहतरीन शिक्षा की तलाश है और अमेरिका इस निवेश पर सबसे अच्छा रिटर्न प्रदान करता है।

रिपोर्ट के अनुसार अमेरिका में कुल विदेशी छात्रों का 18 प्रतिशत से अधिक भारतीय छात्र हैं। स्नातक तक की पढ़ाई करके आने वाले दूसरे सबसे अधिक छात्र भारत से आते हैं और अवर स्नातक तक के छात्रों के मामले में वह तीसरे स्थान पर है।

सांस्कृतिक मामलों के फर्स्ट सेक्रेटरी कार्ल एडम ने कहा, “हमारी शिक्षा प्रणाली व्यावहारिक अनुप्रयोग और अनुभव प्रदान करती है जो किसी भी स्नातक को नौकरी हासिल करने में मदद करती है। हम अमेरिका में अध्ययन करने पर विश्वसनीय और आधिकारिक जानकारी के साथ भारतीय छात्रों की मदद करना चाहते हैं और यही कारण है कि हमारे पास पूरे भारत में सात एजुकेशनयूएसए सलाह केंद्र और एजुकेशनयूएसए इंडिया नामक एक मुफ्त मोबाइल ऐप है जो अब आईओएस और एंड्रॉयड पर उपलब्ध है।

 

गौरतलब है कि अमेरिकी कॉलेजों और विश्वविद्यालयों ने 2018-19 में लगातार चौथे वर्ष 10 लाख से अधिक अंतरराष्ट्रीय छात्रों की मेजबानी की। देश में लगातार 13वें वर्ष अंतरराष्ट्रीय छात्रों की कुल संख्या में बढ़ोतरी हुई है।अमेरिका में ज्यादातर छात्र चीन, भारत, दक्षिण कोरिया, सऊदी अरब, कनाडा, वियतनाम, ताइवान, जापान, ब्राजील और मैक्सिको के हैं जो कैलिफोर्निया, न्यूयॉर्क, टेक्सास, मैसाचुसेट्स, इलिनोइस, पेंसिल्वेनिया, फ्लोरिडा, ओहियो, मिशिगन और इंडियाना जैसे प्रांतों में अध्ययन करते हैं।

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15 करोड़ रुपए नहीं दिए तो दुनिया के इस ताकतवर राष्ट्रपति को जेल भेज देगी अदालत

पूरी दुनिया को झुकाने के दम्भ में हर किसी को कुछ भी कह देने वाले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प पर दान की राशि का घोटाला करने के आरोप में एक अमेरिकी अदालत ने 15 करोड़ का जुर्माना लगाया है। अमेरिका के हिसाब से ये राशि बीस लाख डालर है। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पर न्यूयॉर्क की एक अदालत ने करीब 15 करोड़ रुपये का भारी भरकम जुर्माना लगाया है। अदालत ने इसके साथ ही उनके ट्रंप फाउंडेशन को बंद करने के आदेश भी दे दिए हैं।

ट्रंप को उनके चैरिटेबल फाउंडेशन के गलत इस्तेमाल के लिए 20 लाख डॉलर (करीब 15 करोड़ रुपये) का जुर्माना लगाया गया है। कोर्ट में ट्रंप पर यह आरोप सही साबित हुए हैं कि उन्होंने अपने चैरिटेबल फाउंडेशन का इस्तेमाल अपने राजनीतिक और बिजनस से जुड़े हितों को साधने के लिए किया था।
रिपोर्ट के मुताबिक, न्यायाधीश सैलियन स्क्रापुला ने इस मामले पर अपना निर्णय सुनाते हुए यह भी आदेश दिया कि ट्रंप फाउंडेशन को बंद कर दिया जाए और इस फाउंडेशन के बाकी बचे हुए फंड (करीब 17 लाख डॉलर) को अन्य गैर लाभकारी संगठनों में बांट दिया जाए। मामले की सुनवाई के दौरान ट्रंप ने आरोप स्वीकार कर लिया था।
गौरतलब है कि ट्रंप पर यह मुकदमा पिछले साल दायर हुआ था। ट्रंप पर आरोप है कि उन्होंने अपने चैरिटी फाउंडेशन का पैसा 2016 संसदीय चुनाव प्रचार में खर्च किया था।
अटॉर्नी जनरल जेम्स ने यह मुकदमा दायर करते हुए राष्ट्रपति ट्रंप पर 2.8 मिलियन (28 लाख) डॉलर क्षतिपूर्ति लगाने की मांग की थी। न्यायाधीश स्क्रापुला ने इस राशि को कम करते हुए 20 लाख डॉलर कर दिया। फाउंडेशन के वकील ने पहले कहा था कि राष्ट्रपति ट्रंप पर यह मुकदमा राजनीति से प्रेरित है।

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फांसी देने की तैयारी थी लेकिन बीमारी की वजह से फिलहाल बख्श दी गई इस पूर्व प्रधानमंत्री की जान

अपने पूर्व प्रधानमंत्रियों को फांसी पर लटकाने के लिए कुख्यात इस मुस्लिम देश ने अपने एक पूर्व प्रधानमंत्री की जान इस शर्त पर बख्श दी कि जब तक वे देश से बाहर रहेंगे, उनकी बेटी पाकिस्तान में रहेगी। भ्रष्टाचार मामले में जेल की सजा काट रहे एवं गंभीर रूप से बीमार होने के कारण अस्पताल में भर्ती पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री और पाकिस्तान मुस्लिम लीग-नवाज (पीएमएल-नवाज) के अध्यक्ष नवाज शरीफ डाक्टरों के मशविरे और परिजनों के दबाव में इलाज कराने के लिए विदेश जाने पर राजी हो गये हैं।
शरीफ परिवार के एक सूत्र ने डॉन को बताया कि शरीफ आखिरकार लंदन जाने को तैयार हो गए हैं, क्योंकि डॉक्टरों ने उन्हें स्पष्ट रूप से बता दिया है कि वे पहले ही पाकिस्तान में उपलब्ध सभी चिकित्सा उपचार (विकल्पों) करा चुके हैं इसलिए उनके पास विदेश जाना ही एकमात्र विकल्प बचा है। इसके बाद पीएमएल-एन ने इमरान खान सरकार के साथ शरीफ की विदेश यात्रा के बारे में डॉक्टरों की सिफारिशों को साझा किया था। उन्होंने कहा,“डॉक्टरों की रिपोर्टों के अनुसार, सरकार की ओर से एक या दो दिन में शरीफ का नाम एक्जिट कंट्रोल लिस्ट (ईसीएल) से हटाने की संभावना है ताकि वह देश से बाहर जाने में सक्षम हो सकें।”

सूत्र ने कहा कि शरीफ ईसीएल से अपना नाम हटाये जाने के बाद इसी सप्ताह लंदन के लिए रवाना हो सकते हैं। उन्होंने कहा,“हालांकि शरीफ सैन्य अस्पताल के मेडिकल बोर्ड की सिफारिशों और शरीफ मेडिकल सिटी के मेडिक्स एवं अपने परिवार के सदस्यों के अनुरोध के बाद भी विदेश जाने के लिए तैयार नहीं थे। अब वह आखिरकार विदेश जाने पर सहमत हो गए।”
सूत्र ने कहा कि शरीफ की बेटी मरियम नवाज अपने पिता के साथ नहीं जा सकेंगी क्योंकि उन्होंने चौधरी शुगर मिल घोटाला मामले में जमानत के खिलाफ अपना पासपोर्ट लाहौर उच्च न्यायालय में आत्मसमर्पण कर दिया था। सूत्र ने कहा,“इस समय शरीफ का स्वास्थ्य अधिक मायने रखता है क्योंकि वह अपने जीवन के लिए संघर्ष कर रहे हैं। सुश्री मरियम नवाज बाद में अपने पिता की देखभाल के लिए लंदन जाने का विकल्प तलाश सकती हैं।”
वर्तमान में, शरीफ का प्लेटलेट काउंट घटकर 24,000 रह गया है। डॉक्टरों के अनुसार, एक मरीज को हवाई यात्रा के लिए फिट घोषित किए जाने के लिए 50,000 प्लेटलेट्स और उससे अधिक की आवश्यकता होती है। सूत्र ने कहा कि डॉक्टर उन्हें प्लेटलेट्स बढ़ाने के लिए उच्च खुराक दे सकते हैं, जिससे वह यात्रा करने में सक्षम हो सकें।

गृह मंत्री सेवानिवृत्त ब्रिगेडियर एजाज शाह पहले ही शरीफ को विदेश जाने की अनुमति देने का संकेत दे चुके हैं। उन्होंने कहा,“अगर इलाज के लिए विदेश जाना नवाज़ शरीफ़ के लिए एकमात्र विकल्प है, तो सरकार रास्ता निकालेगी।” सरकार की सहयोगी पाकिस्तान मुस्लिम लीग के अध्यक्ष चौधरी शुजात हुसैन ने भी प्रधानमंत्री इमरान खान से शरीफ को उनके इलाज के लिए देश छोड़ने की अनुमति देने के लिए कहा है। इस बीच, पीएमएल-एन की सूचना सचिव एम औरंगजेब ने कहा कि नवाज शरीफ के प्लेटलेट्स के फिर से खतरनाक स्तर पर गिरने के बाद उनका इलाज करने वाले डॉक्टरों के बोर्ड की एक आपात बैठक बुलाई गई। उन्होंने एक बयान में कहा कि डॉक्टरों ने शरीफ की स्थिति को अत्यंत गंभीर बताया है।
पूर्व प्रधानमंत्री को बुधवार को सैन्य अस्पताल से उनके जाटी उमरा निवास में स्थित गहन चिकित्सा इकाई (आईसीयू) में स्थानांतरित कर दिया गया। पीएमएल-एन ने कहा कि विशेष आईसीयू की स्थापना डॉक्टरों की सिफारिशों पर की गई थी और शरीफ मेडिकल सिटी के डॉक्टर चौबीसों घंटे वहां उपलब्ध रहेंगे।

नवाज की बेटी मरियम, जिन्हें पंजाब सरकार ने अपने पिता की देखभाल के लिए सैन्य अस्पताल में रहने की विशेष अनुमति दी थी, बुधवार को चौधरी शुगर मिल मामले में जमानत पर रिहा होने के बाद रायविंड में स्थित जाटी उमरा के लिए रवाना हुईं। गौरतलब है कि सैन्य अस्पताल में उपचार के दौरान शरीफ को उनके उतार-चढ़ाव वाले प्लेटलेट्स की वजह से मसूड़ों और कुछ अन्य भागों से रक्तस्राव की शिकायत के अलावा, एनजाइना का दौरा भी पड़ा था।
इस्लामाबाद उच्च न्यायालय ने पिछले सप्ताह शरीफ को चिकित्सा आधार पर अल-अजीजिया स्टील मिल्स घोटाला मामले में सुनाई गई सात साल की सजा को स्थगित करते हुए आठ सप्ताह के लिए जमानत दे दी थी। इससे पहले, शरीफ को इसी आधार पर लाहौर उच्च न्यायालय से चौधरी शुगर मिल घोटाला मामले में भी जमानत मिल गई।

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सौवें स्थान पर पहुंचा पाकिस्तान, भारत की भी गिर रही है रैकिंग

इस्लामाबाद. फौजी बूटों के तले कुचला जाता रहा पाकिस्तान इंटरनेट की स्वतंत्रता के मामले में सौवें स्थान पर है। विश्व ​इंटरनेट स्वतंत्रता के अंकों के लिहाज से यह सबसे अंतिम अंक है। पाकिस्तान लगातार नौंवें वर्ष इंटरनेट स्वायत्ता के मामले में दुनिया के खराब देशों में शुमार किया गया। फ्रीडम हाउस नामक संस्था ने यह जानकारी दी है।

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार पाकिस्तान 100 में से 26वें क्रमांक पर है और पिछले वर्ष के मुकाबले एक स्थान नीचे गिरा है। पाकिस्तान ने इंटरनेट के उपयोग में परेशानी के मामले में 25 में से पांच अंक हासिल किए हैं जबकि सीमित कंटेट के मामले में 35 में 14 अंक और उपभोक्ताओं के अधिकारों को तोड़ने के मामले में उसे 40 में सात अंक मिले।

क्षेत्रीय रैंकिंग के पाकिस्तान इंटरनेट स्वायत्ता के मामले में सबसे खराब देशों की सूची मेें वियतनाम और चीन के बाद तीसरे स्थान पर है।
फ्रीडम हाउस ने मंगलवार को फ्रीडम ऑन द नेट 2019 की द क्राइसिस ऑफ सोशल मीडिया नामक रिपोर्ट जारी की। रिपोर्ट में बताया गया है कि दुनिया भर की सरकारें देश में चुनाव में हेरफेर करने और नागरिकों की निगरानी करने के लिए सोशल मीडिया का इस्तेमाल करती हैं।
इंटरनेट स्वायत्ता के अलावा पाकिस्तान में सोशल मीडिया के जरिए चुनाव में हेरफेर किया जाता है।

पाकिस्तान में कुल छह करोड़ 70 लाख इंटरनेट ब्रॉडबैंड कनेक्शन हैं और पिछले वर्ष की रिपोर्ट के बाद इनमें एक करोड़ का इजाफा हुआ है। रिपोर्ट में यह भी पाया गया है कि विरोध प्रदर्शन, चुनाव और धार्मिक तथा राष्ट्रीय छुट्टियों के दौरान सुरक्षा के मद्देनजर प्रशासन दूरसंचार सेवा को ठप कर देता है। उल्लेखनीय है कि वर्ष 2018 के आम चुनाव के दौरान बलूचिस्तान में मोबाइल इंटरनेट सेवा को विशेष रूप से स्थगित कर दिया गया था।

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भरोसेमंद दोस्त रूस के बुलावे पर मास्को में लेफ्ट—राइट करेगी भारतीय सेना, क्लाशिनिकोव राइफल बनाने का कारखाना भी खोलेगा

भारत का भरोसेमंद दोस्त रूस, पूरी दुनिया में कितनी भी उथल—पुथल हो जाए लेकिन रूस भारत का हाथ नहीं छोड़ता। उसी रूस ने भारत से कहा है कि द्वितीय विश्वयुद्ध की 75वीं वर्षगांठ पर वह मास्को में होने वाली भव्य सैनिक परेड़ में भारतीय सेना का एक दल भेजे। यह दल उन यूनिटों को मिलाकर बनेगा जिनके अधिकारी और जवानों ने द्वितीय विश्वयुद्ध में हिस्सा लिया था। इसके अलावा रूस ने भरोसा दिया है कि वह विश्वप्रसिद्ध कलाशिनीकोव ए के 203 राइफल बनाने का कारखाना भारत में खोलेगा।

भारत के रक्षामंत्री राजनाथ सिंह को यह आश्वासन रूस के रक्षा मंत्री जनरल जनरल सेर्गेई शोइग्यू ने मास्को में दिया। उन्होंने कहा कि रूस भारत की रक्षा क्षमता बढाने और उसे उन्नत तथा अत्याधुनिक प्रौद्योगिकी हासिल करने में हर संभव मदद देगा।
रूसी रक्षा मंत्री ने सिंह के साथ मास्को में सेना और सैन्य तकनीकी सहयोग पर 19 वें भारत-रूस अंतर सरकारी आयोग की बैठक में यह आश्वासन दिया। दोनों रक्षा मंत्रियों ने बैठक की संयुक्त रूप से अध्यक्षता की। श्री सिंह तीन दिन की यात्रा पर रूस गये हुए हैं।
जनरल शोइग्यू ने सिंह का स्वागत करते हुए भारत को विशेष सामरिक रक्षा सहयोगी करार दिया। लखनऊ में अगले वर्ष फरवरी में आयोजित होने वाली रक्षा प्रदर्शनी में रूस की विशेष भागीदारी के आमंत्रण को स्वीकार करते हुए जनरल सेर्गेई ने कहा कि रूस की ओर से प्रदर्शनी में व्यापक हिस्सेदारी की जायेगी। दोनों रक्षा मंत्रियों ने मंगलवार को मास्को में ही हुए भारत रूस रक्षा उद्योग सम्मेलन के परिणामों को सार्थक बताया। रूस ने कहा कि विश्व प्रसिद्ध कलाशिनीकोव ए के 203 राइफलों के भारत में विनिर्माण के लिए संयुक्त उपक्रम भारत-रूस राइफल्स प्राइवेट लिमिटेड को चालू करने की तैयारी पूरी कर ली गयी हैं।

रूस ने आतंकवाद से निपटने में भारत को अपने समर्थन को दोहराते हुए कहा कि वह क्षेत्र में भारत की सुरक्षा प्राथमिकता को महत्व देता है। रूसी रक्षा मंत्री ने कहा कि रूस भारत की रक्षा क्षमता बढाने के लिए उसे अत्याधुनिक तथा उन्नत प्रौद्योगिकी हासिल करने में मदद करेगा। दोनों मंत्रियों ने दोनों देशों की टीमों को सैन्य साजो सामान के परस्पर आदान प्रदान से संबंधित समझौते को जल्द अंतिम रूप देने की दिशा में तेजी से काम करने को कहा।

रूसी रक्षा मंत्री ने सिंह को द्वितीय विश्व युद्ध की 75 वीं वर्षगांठ के मौके पर रूस की सेना परेड में भारतीय सेना के दस्ते की भागीदारी का अनुरोध किया। रूसी राष्ट्रपति व्लादीमिर पुतिन इस परेड में आने के लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को पहले ही निमंत्रण दे चुके हैं। श्री सिंह ने आश्वस्त किया कि भारतीय सेना का दस्ता इस परेड में शामिल होगा।

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पाकिस्तान पर मच्छरों का हमला, 66 की मौत, हजारों मांग रहे हैं जीवन की भीख

तमाम तरह की समस्याओं से जूझ रहे पाकिस्तान पर मच्छरों ने हमला बोल दिया है। मच्छरों के हमले से अब 66 लोगों की मौत हो चुकी है और हजारों मौत के कगार पर खड़े हो गए हैं। ये मच्छर उस डेंगू के हैं जिसने हिंदुस्तान में तहलका मचाया हुआ है।

 


पाकिस्तान में डेंगू के प्रकोप ने नया कीर्तिमान स्थापित किया है। इस वर्ष अभी तक मच्छर जनित बीमारी डेंगू के 44 हजार से अधिक लोग संक्रमित हुए हैं जिनमें से 66 लोगों की मौत हो चुकी है। इससे पहले वर्ष 2011 में पाकिस्तान में डेंगू के 27 हजार मामले रिकॉर्ड किये गये थे लेकिन डेंगू से मरने वालों की संख्या 370 थी जो वर्तमान संख्या से करीब छह गुना अधिक थी।

 


नेशनल इंस्टिट्यूट आफ हेल्थ के रोग निगरानी प्रभाग के प्रमुख डॉ. राण सफदर ने डॉन को बताया कि इस वर्ष दुनिया भर में डेंगू के मामलों की अभूतपूर्व संख्या दर्ज हुई है। उन्होंने दावा किया कि पाकिस्तान में अन्य देशों के मुकाबले अत्यधिक सुधार हुआ है।
डॉ. सफदर ने बताया इस वर्ष डेंगू की चपेट में 44 हजार लोग आये है और इस बीमारी से 66 लोगों की जान गयी है। उन्हाेंने कहा कि देश के अधिकतर इलाकों में डेंगू मच्छर के संचरण का मौसम लगभग खत्म हो गया है। उन्होंने कहा कि कराची देश का एकमात्र ऐसा क्षेत्र है जहां सिंध से न केवल 94 प्रतिशत मामले सामने आए बल्कि वहां चालू वर्ष के अंत तक डेंगू के मामले सामने आना जारी रह सकता है।

वर्तमान वर्ष में उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार देश में डेंगू के कुल 44415 मामले सामने आ चुके हैं। इसमें इस्लामाबाद से 12433 मामले, सिंध से 10142, पंजाब से 9260, खैबर पख्तुन्ख्वा से 7346 ओर बलूचिस्तान से 3051 मामले सामने आये हैं। इसके अलावा 3383 मामले अन्य क्षेत्राें से आये हैं। सिंध में डेंगू से कम से कम 26 की मौत हुई है, इस्लामाबाद में 22, पंजाब में 14, बलूचिस्तान में तीन और एक अन्य क्षेत्र में हुई है।

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फंस गई इमरान खान की ये खूबसूरत सहयोगी, लिखित माफी से भी नहीं छूटा पीछा

प्रधानमंत्री की सहयोगी होने के दम्भ में जुबान से उल्टी सीधी बात निकालने वाली पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान की खूबसूरत सहयोगी फिरदौस आशिक अवान पूरी तरह फंस गई हैं। उनका पीछा माफी से भी नहीं छूटा और इस्लामाबाद उच्च न्यायालय ने प्रधानमंत्री के सूचना मामलों की विशेष सलाहकार फिरदौस आशिक अवान को मानहानि के एक मामले में शनिवार तक न्यायालय के समक्ष लिखित माफीनामा पेश करने का निर्देश दे दिया।

मुख्य न्यायाधीश अतहर मिनल्लाह ने सुश्री अवान के खिलाफ चल रहे मानहानि मामले की सुनवाई करते हुए यह निर्देश दिया। सुनवाई के दौरान सुश्री अवान की ओर से बिना शर्त माफी मांगने की पेशकश की गई तो मुख्य न्यायाधीश ने उन्हें लिखित जवाब पेश करने को कहा।
न्यायाधीश मिनल्लाह ने सुश्री अवान के वकील को शनिवार तक उनका लिखित माफीनामा पेश करने का निर्देश दिया। इस मामले की अगली सुनवाई 11 नवंबर को होगी।

सुश्री अवान ने अपने वकील के जरिये न्यायालय से सुनवाई के दौरान उन्हें व्यक्तिगत रूप से पेश होने में छूट देने का अनुरोध किया। न्यायाधीश ने सुश्री अवान के इस अनुरोध को ठुकराते हुए कहा कि उनकी न्यायालय में पेशी होना उनके लिए फायदेमंद होगा।
न्यायालय ने शुक्रवार को अवमानना के एक अन्य मामले में सुश्री अवान के खिलाफ एक अन्य कारण बताओ नोटिस जारी किया था।

पिछले बुधवार को अपनी प्रेस कॉन्फ्रेंस में न्यायपालिका की आलोचना के लिए पहली बार सुश्री अवान को अवमानना नोटिस जारी किया गया था। गत शुक्रवार की सुनवाई के दौरान, अदालत ने सुश्री अवान की माफी स्वीकार कर ली थी लेकिन एक लंबित आपराधिक कार्यवाही के संबंध में बयान देने के लिए उनके खिलाफ अदालत की अवमानना के मामले में नया कारण बताओ नोटिश जारी किया गया।

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इतने गिर गए पाकिस्तानी, कब्र से महिलाओं की लाश निकालकर किया सामूहिक बलात्कार

कराची. यूं तो महिलाओं के साथ बलात्कार करने वाले दरिंदे दुनिया के हर देश में पाए जाते हैं, लेकिन पाकिस्तानी दरिंदों ने ऐसा किया जिसे सुनकर किसी को भी घिन आने के साथ बेइंतिहा गुस्सा आ जाए। पाकिस्तान के कराची में बलात्कारियों ने ताजा दफनाई गई एक महिला की लाश को कब्र से निकालकर सामूहिक बलात्कार किया और ​फरार हो गए। पाकिस्तान के कराची से कुछ अज्ञात लोगों की घिनौनी एवं भयावह करतूत सामने आई है जहां लांधी शहर में स्थित कब्रिस्तान में दफन एक महिला के शव को कब्र से निकालकर उसके साथ सामूहिक बलात्कार कर दिया।

 

 

मृतक महिला के परिजन इस भयावह घटना के संबंध में कोई मामला दर्ज नहीं करना चाहते हैं। इस घिनौने कांड के सामने आने के बाद इस्माइल गोठ कब्रगाह के पास बड़ी संख्या में महिला के परिजन तथा उनके रिश्तेदार एकत्र हुए हैं। उन्होंने बताया कि मृतक के शव को कुछ लोगों ने कब्र से बाहर निकला और उसके साथ सामूहिक दुष्कर्म किया। मृतक को इस घटना से एक दिन पहले कब्र में दफनाया गया था। जीयो न्यूज ने मंगलवार को इस घटना की जानकारी देते हुए कहा कि इस घिनौनी घटना को अंजाम देने में कितने लोग शामिल थे इसका पता अभी नहीं चल सका है।

परिवार ने कहा कि कब्रिस्तान में रखरखाव के लिए जिम्मेदार केयरटेकर ने उन्हें बताया कि एक कुत्ते ने ताजी बनी कब्र से स्लैब हटा दिया था। पर महिला के परिजन ऐसा नहीं मानते कि कुत्ता कब्र से स्लैब हटाने में सक्षम होगा। उन्होंने यह भी कहा कि कब्र-खोदने वाला व्यक्ति बाद में कब्रिस्तान से गायब हो गया। दूसरी ओर, पुलिस ने अपराध स्थल से सबूत इकट्ठा किए हैं और पुष्टि की है कि कब्र-खोदने वाला लापता है। उन्होंने कहा कि उसकी तलाश के लिए छापेमारी की जा रही है।

मृतक महिला के रिश्तेदारों ने पुलिस के समक्ष इस मामले पर कोई कानूनी कार्रवाई करने की इच्छा नहीं जताई और उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि भविष्य में ऐसी घटना की पुनरावृति नहीं होनी चाहिए।

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मोदी ने सूकी से कहा, जल्द वापस बुलाओ रोहिंग्या मुसलमान अन्यथा बढ़ जाएंगी म्यांमार की मुश्किल

भारत ने म्यांमार को छुपी चेतावनी दी है कि अगर उसने भारत और बांग्लादेश में शरण लेने वाले रोहिंग्याओं को अपने देश नहीं बुलाया तो इस पूरे इलाके में अशांति का ऐसा दौर शुरू होगा कि उसे काबू में रखना मुश्किल हो जाएगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने म्यांमार से विस्थापित रोहिंग्या समुदाय के लोगों की बंगलादेश से त्वरित, सुरक्षित एवं सतत वापसी पर जोर देते हुए रविवार को कहा कि उनकी वापसी भारत, बंगलादेश और म्यांमार समेत पूरे क्षेत्र के हित में है।

मोदी ने आसियान से जुड़े शिखर सम्मेलन और पूर्वी एशिया शिखर सम्मेलन से इतर म्यांमार की स्टेट काउंसलर आंग सान सू की के साथ द्विपक्षीय बैठक के दौरान कहा कि म्यांमार के रखाइन प्रांत से विस्थापित हुए रोहिंग्या लोगाें की त्वरित, सुरक्षित एवं सतत घर वापसी भारत, बंगलादेश और म्यांमार समेत पूरे क्षेत्र और विस्थापित लोगों के हित में है।

बताया जाता है कि 2017 में म्यांमार के सुरक्षा बलों के अभियान के कारण रखाइन प्रांत से भागकर 11 लाख रोहिंग्या शरणार्थी बंगलादेश पहुंचे थे और तब से वहीं रह रहे हैं। बंगलादेश के अधिकारियों का कहना है कि म्यांमार को रोहिंग्या शरणार्थियों की वापसी के लिए अनुकूल माहौल बनाने के वास्ते अंतरराष्ट्रीय समुदाय की व्यापक भागीदारी के बारे में गंभीरता से विचार करना चाहिए। विदेश मंत्रालय की ओर से यहां जारी विज्ञप्ति के मुताबिक दोनों नेता इस पर सहमत हुए कि भारत और म्यांमार के बीच साझीदारी लगातार मजबूत बनाने के लिए स्थिर और शांतिपूर्ण सीमा एक महत्वपूर्ण कारक है।

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मौज—मस्ती करने के लिए शहर में जाने की तैयारी में थे, लुटेरों ने लूट लिए सारे रुपए

पहले खुले समुद्र में जहाजों को लूटा जाता था लेकिन अब समुद्री लुटेरे इतने दुस्साहसी हो गए ​हैं कि वे बंदरगाह पर सामान उतारने आने वाले जहाजों को सुरक्षाकर्मियों की नाक के नीचे लूट लेते हैं और सुरक्षाकर्मी कुछ नहीं कर पाते। ऐसी ही एक घटना पश्चिमी अफ्रीकी समुद्री सीमा क्षेत्र में हुई जिसमें लुटेरों ने सामान उतार रहे जहाज को लूट लिया। पुलिस के अनुसार समुद्री लुटेरों ने पश्चिमी अफ्रीकी समुद्री सीमा क्षेत्र में नार्वे के एक जहाज पर हमला करके उसके चालक दल के नौ सदस्यों को बंधक बना लिया है।

जहाजरानी कंपनी जे जे उगलैंड ने एक बयान जारी करके कहा, हमारा जहाज एम वी बोनिटा पर समुदी लुटेरों ने तड़के उस समय हमला किया जब वह सामान खाली करने के लिए कोटोनोउ में रुका हुआ था। लुटेरों ने चालक दल के नौ सदस्यों का अपहरण कर लिया। कंपनी की आपदा मोचन बल की टीम संकट के समाधान में जुटी हुयी है और संंबंधित अधिकारियों को भी इस घटना के बारे में जानकारी दे दी गयी है। बयान में कहा गया है कि परिजनों को अपरण के बारे में सूचना दे दी गयी है।

बंधक बनाये गये चालक दल के सदस्यों की सुरक्षा के मद्देनजर इस घटना पर ज्यादा टिप्पणी नहीं की जा सकती। नार्वे के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता गुरी सोल्बर्ग ने नार्वेजियन न्यूज़ एजेंसी को बताया कि इस घटना में नार्वे के नागरिक नहीं शामिल हैं। नार्वे के मीडिया ने नार्वेजियन शिपओनर्स एसोसिएशन के हवाले से बताया कि समुद्री लुटेरे फिलीपींस के नागरिक हैं।