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कटोरा हाथ में लेकर हथियार मांगने चीन पहुंचे इमरान, साथ में पाकिस्तानी थल सेनाध्यक्ष भी गिड़गिड़ाएंगे

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान और सेना प्रमुख कमर जावेद बाजवा चीन में जम्मू-कश्मीर के मसले पर दोनों देशों के बीच पैदा हुए तनाव का हवाला देकर मदद मांगने चीन पहुंच गए हैं। सेना प्रमुख बाजवा चीन के पीपुल्स लिबरेशन आर्मी(पीएलए) के शीर्ष अफसरों से मंगलवार को मिले। जनरल बाजवा ने पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (पीएलए मुख्यालय) पहुंचकर कमांडर आर्मी जनरल और केंद्रीय सैन्य आयोग (सीएमसी) के शीर्ष अफसर से भी भेंट की। पाकिस्तान के सेना प्रमुख बाजवा और इमरान अलग-अलग समय पर बीजिंग पहुंचे। पहले बाजवा पहुंचे और उसके बाद मंगलवार को इमरान खान बीजिंग पहुंचे।

सूत्रों के अनुसार भारत की सैन्य क्षमताओं में लगातार मजबूती आने से पाकिस्तान बौखलाया हुआ है। भारत ने तीन सितंबर को जहां अमेरिका से आठ अपाचे हेलिकॉप्टर लिए, वहीं आठ अक्टूबर को वायुसेना दिवस पर फ्रांस से पहला राफेल भी हासिल कर लिया। इससे पाकिस्तान की चिंता बढ़ गई है क्योंकि युद्ध की स्थिति में भारत आधुनिक हथियारों के दम पर उस पर भारी पड़ सकता है।
सूत्रों का कहना है कि इमरान खान के बीजिंग दौरे की अहमियत इसलिए और भी ज्यादा है, क्योंकि यह चीन के राष्ट्रपति शी चिनपिंग के भारत दौरे से ठीक पहले हुआ है। हालांकि यह माना जा रहा है कि चीन पाकिस्तान को निराश नहीं करेगा लेकिन उसके बावजूद इमरान और पाकिस्तान को भरोसा नहीं है कि वह उसे भारत के राफेल और अपाचे हैलीकाप्टरों से मुकाबले के​ लिए उसे आधुनिक हथियार देगा। असल में चीन एक व्यापारी है और वह उन्हीं देशों को उधार देता है जो उसके चंगुल में फंसने को तैयार हो। पाकिस्तान वैसे तो चीन के आगे नतमस्तक है लेकिन यदा—कदा उसे आंखें दिखाने को भी तैयार रहता है। इस वजह से चीन उसे मुफ्त में हथियार देने का इच्छुक नहीं रहता। चूंकि अभी पाकिस्तान की आर्थिक हालत खस्ता है और वह पुराने कर्ज चुकाने की स्थिति में नहीं है। इसलिए वह चाहता है कि चीन उसे हथियार मुफ्त अथवा उधार दे।

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