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बांध फूटा तो पानी की जगह बह निकली राख, 50 मवेशी राख में डूबे

आपने पानी के बांध के बारे में तो खूब सुना होगा लेकिन कभी राख का बांध देखा है, शायद नहीं है लेकिन यह सत्य है। राख का ऐसा ही एक बांध मध्यप्रदेश में फूट गया है। इससे आसपास के ग्रामीण दहशत में हैं। नेशनल थर्मल पॉवर कॉरपोरेशन (एनटीपीसी) विंध्याचल परियोजना का सबसे पुराना फ्लाई ऐश (थर्मल पावर प्लांट से निकलने वाली राख) बांध रविवार शाम अचानक फूट गया। यह परियोजना मध्य प्रदेश के सिंगरौली जिला मुख्यालय से करीब 10 किलोमीटर दूर शाहपुर में स्थित है। इस बांध के फूटने से आसपास के गांवों में राख की बाढ़ आ गई। स्वास्थ्य, पर्यावरण एवं खेतों के लिए नुकसानदायक राख का बहता ढेर खेतों में जमा हो गया है। बांध के आसपास घास चरने गए लगभग 50 मवेशी बह गए हैं, जिनका अभी तक पता नहीं चला है।

 

थर्मल प्लांट से हर साल लाखों टन फ्लाई ऐश निकलता है। फ्लाई ऐश में भारी धातु जैसे आर्सेनिक, सिलिका, एल्युमिना, पारा और आयरन होते हैं, जो दमा, फेफड़े में तकलीफ, टीबी और यहां तक कि कैंसर तक का कारण बन सकते हैं। फ्लाई ऐश का पानी जल प्रदूषण का बड़ा कारक होता है। पुलिस के अनुसार फ्लाई ऐश बांध से किसी जान-माल का नुकसान नहीं हुआ. स्थानीय अधिकारियों ने भी इस बात की पुष्टि की। इस हादसे से आसपास स्थित गांव जयनगर, जुवाड़ी, अमहवा टोला व गहिलगढ़ पूर्व की बस्ती के लोग सकते में आ गए है।
फ्लाई ऐश बांध के फूटने से मलबा अचानक तेजी से बहने लगा। बीच में नाला होने की वजह से डैम का राख रिहंद जलाशय में समाहित हो गया। बांध फूटने की घटना में किसी जान-माल का नुकसान नहीं हुआ है, बल्कि एनटीपीसी विंध्याचल का ही नुकसान हुआ है।
बांध का तकरीबन 50 प्रतिशत से अधिक फ्लाई ऐश रिहंद में बह गया है बाकी बचे हुए राख को हटाने का काम युद्ध स्तर पर चल रहा है। सिंगरौली में कुल ताप बिजलीघरों की संख्या 10 है। देश भर के लिए बिजली पैदा करने वाले इस इलाके में कुल 21,000 मेगावॉट बिजली उत्पादित की जाती है। इसके लिए साल भर में कोई 10.3 करोड़ टन कोयले की खपत होती है। इतनी बड़ी मात्रा में कोयले की खपत से हर साल तकरीबन 3.5 करोड़ टन फ्लाई ऐश (राख) पैदा होती है, जिसका पर्याप्त इस्तेमाल हो नहीं पा रहा।

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