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बिस्तर में पराजित पुरुषों के लिए संजीवनी कैसे बनी वियाग्रा, जानिए पूरी कहानी – Mobile Pe News

बिस्तर में पराजित पुरुषों के लिए संजीवनी कैसे बनी वियाग्रा, जानिए पूरी कहानी

लगभग बीस साल पहले तक बिस्तर के संग्राम में पराजित होने वाले पुरुषों के लिए संजीवनी बन चुकी वियाग्रा नामक दवा की खोज की कहानी बड़ी दिलचस्प है। इस दवा को हृदय रोगियों का रक्त प्रवाह सुचारू रखने के लिए बनाया गया था, लेकिन इसके साइड इफेक्ट इतने विचित्र थे कि दवा बनाने वाली कम्पनी फाइजर ने शोधकर्ताओं को इसका शोध बंद कर देने के आदेश दे दिए थे।

जाग उठती थी सम्बध बनाने की भूख

यह दवा हृदय रोगियों के रक्त प्रवाह को सुचारू तो रख रही थी लेकिन इसे खाने के थोड़ी देर बाद ही पुरुषों में सम्बंध बनाने की भूख जाग उठती थी। इससे घबराए शोधकर्ताओं ने फाइजर के कहने पर शोध तो बंद कर दिया लेकिन इसके साइड इफेक्ट उनका ध्यान भी खींच रहे थे। बस फिर क्या था, कुछ और क्लिनिकल ट्रॉयल के बाद इसे पुरुषों की नपुंसकता दूर करने वाली दवा के रूप में बाजार में जारी कर दिया गया। अब इस दवा की बिक्री पुरुषों में उत्तेजना के साथ रक्त प्रवाह को सुचारू रखने के लिए भी किया जाता है।

रक्तचाप सुचारू रखने में भी करती है मदद

इस नतीजे के बाद कि यह हृदय संबंधी समस्या को दूर करने में दूसरी दवाओं जितना ही है, शोधकर्ताओं ने इस पर काम रोकने का फ़ैसला ले लिया था। लेकिन जब उन्हें वियाग्रा के इस इफेक्ट के बारे में पता चला तब उन्होंने शोध को जारी रखने का फ़ैसला लिया। अब वियाग्रा का इस्तेमाल सिर्फ़ पुरुषों में नपुंसकता को दूर करने के लिए नहीं होता बल्कि कम मात्रा में इसका इस्तेमाल हृदय संबंधी रक्तचाप की समस्या में भी होता है। ब्रांड नाम रिवाटीओ के नाम से यह दवा बाज़ार में उपलब्ध है।

ड्रग रिपोजिशनिंग का ये होता है फायदा

खोजी गई दवा का इस्तेमाल किसी दूसरी बीमारी में किए जाने की इस प्रक्रिया को ड्रग रिपोजिशनिंग कहते हैं। विशेषज्ञ इस प्रक्रिया के मुख्य फ़ायदों में सबसे बड़ा फ़ायदा समय की बचत बताते हैं। ब्रिटेन की यूनिवर्सिटी ऑफ लीवरपुल के क्लिनिकल एंड मॉल्युकूलर फॉर्माकोलॉजी के प्रोफेसर मुनीर पीर मोहम्मद का कहना है कि किसी ड्रग को शून्य से तैयार करने में सबसे पहले उसे लैबोरेट्री में तैयार कर के उसके असर को कोशिकाओं पर परखते हैं और उसके बाद उसका प्रक्लिनिकल अध्ययन करते हैं। ड्रग रिपोजिशनिंग का सबसे बड़ा फायदा यह है कि बनाई गई दवाइयां इंसानों पर टेस्ट की जा चुकी होती हैं। इसलिए इसकी सुरक्षित होने को लेकर डेटाबेस मौजूद होता है कि कैसे यह काम करता है। सिर्फ एक ही बात जाननी होती है कि यह किसी बीमारी विशेष पर काम कर रहा या नहीं।

वियाग्रा जैसा ही उदाहरण है एस्प्रिन

वियाग्रा के अलावा ड्रग रिपोजिशनिंग का एक और बेहतरीन उदाहरण एस्प्रिन है। एक सदी से इसका इस्तेमाल दर्द की दवा के रूप में होता आया है लेकिन अब कम मात्रा में इसका इस्तेमाल कुछ मरीजों में दिल के दौरे के जोखिम को कम करने में भी किया जाता हैै और अब नए अध्ययन में पता चला है कि कुछ खास किस्म के कैंसर की रोकथाम में यह प्रभावी हो सकता है।