Holi festival of spiritual union of lover: आ गया प्रेमी और प्रेयसी के आध्यात्मिक मिलन का त्योहार होली

होली,भारतीय संस्कृति का एक ऐसा त्योहार जिसमें कड़वाहट भुला देने के लिए रंगों का इस्तेमाल किया जाता है। इस होली का प्रेमी और प्रेयसी के आध्यात्मिक मिलन की घड़ी भी माना जाता है क्योंकि भारत के आराध्य भगवान कृष्ण और उनकी प्रेयसी राधारानी का इस​ दिन मिलन जो होता है। इसी के तहत राधारानी की नगरी बरसाना में होली पर मनाए जाने वाले रंगोत्सव की तैयारियां शुरू हो गई हैं।

तीन मार्च को अष्टमी के दिन बरसाना में लड्डू होली, चार को बरसाना में लठामार होली का आयोजन किया जायेगा। पांच को दशमी के दिन नन्दगांव में लठामार होली, रावल में लठामार एवं रंग होली, छह को मथुरा कृष्ण जन्मभूमि एवं वृन्दावन में बाॅके बिहारी मन्दिर पर सांस्कृतिक कार्यक्रम एवं होली, सात को गोकुल में छड़ीमार होली, नौ को गांव फालैन में जलती हुई होली से पण्डा निकलना कार्यक्रम का आयोजन किया जायेगा।

नौ मार्च को द्वारिकाधीश मन्दिर से होली का डोला नगर भ्रमण को जायेगा, 10 को द्वारिकाधीश मन्दिर में टेसुफूल/अबीर गुलाल की होली, 10 को ही संपूर्ण मथुरा जनपद क्षेत्र में अबीर/गुलाल/रंग की होली, 11 को दाऊजी का हुरंगा, इसी दिन गांव मुखराई में चरकुला नृत्य, सांस्कृतिक कार्यक्रम, गांव जाब में हुरंगा आयोजित किया जायेगा। इस अवसर पर ब्रज के मंदिरों को आकर्षक तरीके से सजाया जाएगा। लाडली जी के मन्दिर की फूलों से सजावट, सांस्कृतिक विभाग द्वारा मंचीय कार्यक्रम, शोभा यात्रा, बच्चों की प्रतियोगिता आदि कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।