Off Beat

लिया है कभी आसमान से बरसते गोलों के बीच टहलने का मजा, भारतीय सेना के एक कर्नल करते थे ऐसा

जब पूरे देश में युद्धोन्माद अर्थात पाकिस्तान से बदला लेने की मांग जोरों पर है तो भारतीय सेना के पराक्रम को याद करना उन शहीदों के लिए सच्ची श्रद्धांजलि होगी जिन्होंने 1965 की लड़ाई में पाकिस्तान को नाकों चने चबाने के लिए मजबूर कर दिया था। 

 

भारतीय सेना में ऐसे ऐसे वीर हुए हैं जो आसमान से बरसते गोलों के बीच चहलकदमी करते थे और अपने सिपाहियों से पूछते थे कि अगर कमांडिंग आफिसर घायल हो गया अथवा मर गया तो वे क्या करेंगे! जवाब में बहादुर कमांडिंग आफिसर के सिपाही कहते थे कि उन्हें उठाकर वहां ले जाएंगे जहां के आदेश दिए गए हैं क्योंकि उनके आर्डर साफ हैं कि कोई भागेगा नहीं। 

 

सैन्य इतिहास पर किताब लिखने वाले इतिहासकारों के मुताबिक 1965 में पाकिस्तान से हुए 22 दिन के युद्ध के दौरान पंजाब में सबसे भीषण लड़ाई हुई थी। सीमा से सटे पंजाब में इच्छोगिल नहर के इस पार 3 जाट बटालियन पाकिस्तानी वायुसेना की भारी बमबारी के बीच डटी हुई थी और उस बटालियन के कमांडिंग अफसर थे कर्नल डेसमंड हेड। 54 इन्फेंट्री ब्रिगेड का हिस्सा 3 जाट बटालियन को इच्छोगिल नहर इस पार उस डोगरई पर कब्जा करना था जिस पर पाकिस्तानी फौज ने वायुसेना की मदद से कब्जा कर लिया था। 

 

ब्रिगेड कमांडर ने कर्नल डेसमंड हेड को आदेश दिए कि पहले 13 पंजाब डोगरई पर हमला करेगा और उसके बाद वहां नियंत्रण के लिए 3 जाट आगे बढ़ेगा, लेकिन कर्नल डेसमंड का जवाब था कि 13 पंजाब सफल हो अथवा असफल, 3 जाट डोगरई पर कब्जा करके ही रहेगा और यही हुआ भी। पूरी बटालियन में से सिर्फ 27 ही जीवित बचे, लेकिन कर्नल डेसमंड की 3 जाट बटालियन ने डोगरई पर कब्जा करके ही दम लिया। इस वीरता के लिए कर्नल डेसमंड को महावीर चक्र से सम्मानित किया गया था। कर्नल डेसमंड 2013 तक जीवित रहे, लेकिन उनकी वीरता की कहानी आज भी 3 जाट बटालियन में गर्व से सुनाई जाती है।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button
Notifications    Ok No thanks