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खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र में रोज़गार के बढ़ते अवसर

बदलते समय के साथ ही दुनिया भर में लोगों की खानपान संबंधी आदतों में भी बदलाव आ रहा है जिसके पीछे सबसे बड़ा कारण है लाइफ स्टाइल में हो रहा तेज़ परिवर्तन। शहरी इलाकों में रहने वाले लोगों के जीवन में खासतौर पर ऐसे बदलाव स्पष्ट तौर पर दिखाई पड़ते हैं।

 

नौकरी के लिए सुबह-शाम की भागमभाग, ट्रैफिक और तमाम तरह की अन्य आपाधापी से भरी दिनचर्या के बीच किसे फुर्सत है कि ताज़ा खाना तसल्ली से रोजाना बनाया और खाया जाये। इसका समाधान इंस्टेंट एवं प्रोसेस्ड अथवा रेडी टू ईट पैक्ड फ़ूड के रूप में देश-विदेश में देखा जा सकता है। पहले खानपान की ऐसी आदतें सिर्फ पश्चिमी देशों तक ही सीमित थीं पर आज भारत जैसे विकासशील देशों में भी बड़े पैमाने पर यह प्रचलन आम होता जा रहा है

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इसी बदलाव का नतीज़ा है कि वैश्विक स्तर पर प्रोसेस्ड फ़ूड इंडस्ट्री का कारोबार दिन दोगुनी और रात चौगुनी गति से बढ़ रहा है। बच्चों में ऐसे खाने का क्रेज़ तो जैसे सर पर जादू की तरह चढ़ गया है। घर में बने खाने को देखकर आज के इन बच्चों की मानों त्योरियां ही चढ़ जाती हैं और अंत में अभिभावकों को उनका मनपसंद फास्ट फ़ूड/जंक फ़ूड /डिब्बाबंद खाद्याहार मंगवाना ही पड़ता है

फ़ूड टेक्नोलोजी का महत्व,- खानपान की बदलती आदतों के कारण फ़ूड टेक्नोलोजी विशेषज्ञों की मांग बहुत तेज़ी से देश-विदेश में बढ़ रही है। इनका काम न सिर्फ ऐसे प्रोसेस्ड आहारों की नई किस्मों का विकास करना है बल्कि आम जनता के स्वाद के अनुसार इनमें समय-समय पर बदलाव करना भी है। डिब्बाबंद प्रसंस्करित आहार (प्रोसेस्ड फ़ूड) तैयार करने वाली कम्पनियों का नेटवर्क आज एक देश तक सीमित नहीं है। इस क्षेत्र में कार्यरत नेस्ले, कैडबरी, ब्रिटेनिया, हिंदुस्तान लीवर सरीखी मल्टी नेशनल कम्पनियां वैश्विक स्तर पर छायी हुयी हैं। शायद ही कोई ऐसा घर होगा जहाँ पर इनके प्रोडक्ट्स नहीं खरीदे जाते हैं।

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