Deprecated: title is deprecated since version WPSEO 14.0 with no alternative available. in /home/mobilepenews/public_html/wp-includes/functions.php on line 4723

Deprecated: WPSEO_Frontend::get_title is deprecated since version WPSEO 14.0 with no alternative available. in /home/mobilepenews/public_html/wp-includes/functions.php on line 4723

Deprecated: title is deprecated since version WPSEO 14.0 with no alternative available. in /home/mobilepenews/public_html/wp-includes/functions.php on line 4723

Deprecated: WPSEO_Frontend::get_title is deprecated since version WPSEO 14.0 with no alternative available. in /home/mobilepenews/public_html/wp-includes/functions.php on line 4723
पहले अम्बाला फिर बंगाल में तैनात होंगे राफेल लड़ाकू विमान, पलक झपकते ही घुस जाएंगे पाकिस्तान – Mobile Pe News

पहले अम्बाला फिर बंगाल में तैनात होंगे राफेल लड़ाकू विमान, पलक झपकते ही घुस जाएंगे पाकिस्तान

फ्रांस से मिलने वाले रफाल विमानों की पहली खेप अर्थात चार विमानों की तैनाती हरियाणा के अंबाला स्थित 17वीं स्क्वाड्रन गोल्डन एरोज में की जाएगी जहां से युद्ध की स्थिति में वह पलक झपकते ही पाकिस्तानी सीमा में घुस जाएगा क्योंकि उसकी रफ्तार दुनिया के सबसे तेज उड़ने वाले विमानों में होती है। यह पहली बार है जब भारतीय वायुसेना के पास 4.5 जनरेशन के लड़ाकू विमान मिलेंगे। इन विमानों की दूसरी खेप जब मिलेगी तो उन्हें पश्चिम बंगाल के हाशिमारा अड्डे पर तैनात किया जाएगा। यह अड्डा चीन सीमा की निगरानी के लिए बनाया गया है।
भारतीय वायुसेना के सूत्रों के अनुसार इस समय हमें पाकिस्तान के एक एफ-16 के मुकाबले दो सुखोई उतारने पड़ते हैं। जबकि एक राफेल के मुकाबले के लिए पाकिस्तान को दो एफ-16 लगाने पड़ेंगे। ऐसा इसलिए क्योंकि राफेल के पास ना सिर्फ बेहतर हथियार हैं बल्कि ये देखने की दृष्टि सीमा के परे जाकर भी दुश्मन के इलाके में मिसाइल बरसा सकता है। भारत मिले राफेल विमान अब तक बने सबसे मारक विमानों में से एक होंगे, क्योंकि इनमें भारत की ज़रूरतों के मुताबिक 13 खास बदलाव किए गए हैं। इन नए साजो-सामान में हेलमेट में लगे इज़राइली डिस्प्ले, रडार वार्निंग रिसीवर, लो-बैंड जैमर, फ्लाइट डेटा की 10 घंटे की रिकार्डिंग, इंफ्रारेड सर्च एंड ट्रैकिंग सिस्टम सम्मिलित हैं।
अनेक तरह की हथियार प्रणालियों से लैस राफेल को हवाई प्रभुत्व, टोही कार्यों, ग्राउंड सपोर्ट, दूर तक हमले करने, पोतों पर हमले और परमाणु हमला निरोधक मिशनों के लिए सक्षम बनाया गया है। राफेल की निर्माता कंपनी दशॉ एविएशन इसे ‘ओमनिरोल’ लड़ाकू विमान बताती है, यानि ये विमान कई लड़ाकू मिशनों को एक साथ अंजाम दे सकते हैं। बगैर हथियारों के राफेल विमान 10-टन वजनी होते हैं, इसमें हथियार और अन्य बाह्य पेलोड लगाने के 14 हार्डप्वाइंट हैं, जिनमें से पांच अतिरिक्त इंधन टैंकों या भारी हथियारों को गिराने में सक्षम हैं। राफेल पर नौ टन वजन के बराबर बाह्य हथियार और अन्य साजो-सामान लगाए जा सकते हैं, यानि राफेल लगभग अपने वजन के बराबर पेलोड उठा सकता है।

राफेल की सबसे बड़ी खासियत है इसका परमाणु हथियारों को दागने में सक्षम होना। सूत्रों का कहना है कि इस समय वायुसेना के मिराज विमानों पर परमाणु हथियार तैनात किए जा सकते हैं। राफेल पर लगी मेटिओर मिसाइल को गेम चेंजर बताया जाता है। यूरोपीय कंपनी एमबीडीए निर्मित मेटिओर बहुत दूर तक मार करने वाली रैम-जेट संचालित हवा से हवा में मार करने वाली मिसाइल है। भारत के लिए निर्मित राफेल में इसे लगाए जाने के कारण भारत की हवा से हवा में मार करने की क्षमता बहुत बढ़ जाएगी क्योंकि मेटिओर 120 किलोमीटर दूर तक मार कर सकती है। इसका मतलब ये हुआ कि भारतीय सीमा में रहते हुए भी राफेल दुश्मन के विमान को उसके क्षेत्र में 100 किलोमीटर भीतर तक मार गिरा सकता है।
सूत्रों का कहना है कि यदि पायलट ने रडार संकेतों के अनुसार निशाना साध कर इसे दाग दिया तो फिर लक्ष्य बने विमान के बचने की कोई गुंजाइश नहीं बचती है। इस अधिकारी ने कहा कि इस समय दुनिया में मेटिओर के बराबर क्षमता वाली कोई दूसरी मिसाइल उपलब्ध नहीं है।
राफेल पर लगाई गई एक और अहम मिसाइल स्कैल्प है। यह हवा से सतह पर मार करने वाली लंबी दूरी की क्रूज मिसाइल है। हर राफेल पर 1,300 किलोग्राम वजनी और 5.1 मीटर लंबाई की एक या दो स्कैल्प मिसाइलें तैनात की जा सकती हैं।
स्कैल्प 600 किलोमीटर दूर तक मार सकती है और यह अपने सटीक लक्ष्यभेदन के लिए जानी जाती है। यानि दुश्मन के क्षेत्र में 600 किलोमीटर भीतर मार करने के लिए राफेल को भारतीय सीमा को लांघने तक की ज़रूरत नहीं पड़ेगी।
यह एक सामरिक हथियार है जिसे पेनेट्रेशन, इंपैक्ट या एयरबर्स्ट मोड में दागा जा सकता है। यह मिसाइल एंटी-एक्सेस और एरिया डिनायल जैसी परिस्थतियों में भी बहुत अंदर तक मार कर सकती है। राफेल में हवा से हवा में मार करने वाली मीका मिसाइलें भी लगाई गई हैं। भारतीय वायुसेना की इस पर ब्रह्मोस-एनजी मिसाइलें भी लगाने की योजना है जिसे भारत-रूस संयुक्त उद्यम के तहत निर्मित किया जाएगा। राफेल विमानों में फ्रांस द्वारा इस्तेमाल किए जाने वाले टैलेस निर्मित टैलिओस लेज़र डेजिगनेटर पॉड की जगह इज़राइल निर्मित लाइटनिंग सेंसर पॉड लगाए जा रहे हैं जिनका उपयोग भारतीय वायुसेना पहले से कर रही है। इसी तरह भारतीय राफेल में हवा से सतह पर मार करने वाले एएएसएम हैमर हथियारों की जगह स्पाइस हथियार प्रणाली लगाई जा रही है।
राफेल में आरबीई2 एक्टिव इलेक्ट्रॉनिकल स्कैन्ड रडार लगे हैं जो परंपरागत एंटेना वाले रडारों के मुकाबले कहीं अधिक प्रभावी होते हैं तथा बहुत शीघ्रता से और कई लक्ष्यों को एक साथ ट्रैक कर सकते हैं। राफेल में ‘फ्रंट सेक्टर ओप्ट्रॉनिक्स’ प्रणाली भी लगी है जिस पर रडार जैमिंग का कोई असर नहीं पड़ता है। इस पर इंफ्रारेड, इलेक्ट्रोमैग्नेटिक और लेज़र खतरों का लंबी दूर से पता लगाने में सक्षम स्पेक्ट्रा इंटीग्रेटेड इलेक्ट्रॉनिक युद्धक प्रणाली भी लगी हुई है। एमबीडीए ने टैलेस के साथ मिल कर ये प्रणाली विकसित की है। एमबीडीए सूत्रों के अनुसार स्पेक्ट्रा प्रणाली रडार, लेज़र और मिसाइल वार्निंग रिसीवर से मिली सूचनाओं के आधार पर खतरों की सटीक निशानदेही करती है।
फ्रांसीसी वायुसेना और फ्रांसीसी नौसेना के राफेल विमानों ने 2011 में लीबिया में पश्चिमी गठबंधन बलों की तरफ से हवाई अभियानों में भाग लिया था। तब बेन्गाज़ी और त्रिपोली के आसमान में उड़ान भरने वाले इन पहले पश्चिमी विमानों ने कई तरह के मिशनों को सफलतापूर्वक अंजाम दिया था। फ्रांसीसी वायुसेना के राफेल विमानों ने माली में शत्रु के ठिकानों को ध्वस्त करने और मित्र सेना की मदद करने में अहम भूमिका निभाई थी। फ्रांसीसी वायुसेना के सर्वाधिक लंबे समय तक चलने वाले इस हमले में चार राफेल विमानों ने पूर्वी फ्रांस के सांडिज़िए से उड़ान भरने के बाद 21 लक्ष्यों को ध्वस्त करते हुए 9 घंटे 35 मिनट बाद जाकर चाड के एन्जमेना में लैंडिंग की थी। इससे राफेल की क्षमता का भलीभांति अंदाजा लग जाता है।