इंसानों पर भरोसा नहीं इसलिए अमेरिका के इन परमाणु हथियारों की सुरक्षा करती है डाल्फिन

अमेरिकी नौसेना के सिएटल स्थित परमाणु हथियारों के अड्डे का निर्माण 2004 में किया गया था। उसकी सुरक्षा वह डाल्फिन मछली करती है जिसके करतब देखकर बच्चे खुश हो जाते हैं।
सिएटल से करीब 20 मील की दूरी पर है हूड कैनल जहां नेवल बेस किटसैप है। यह जगह अमेरिका के करीब एक चौथाई परमाणु हथियारों के लिए स्टोरहाउस है। यहां परमाणु हथियारों का यह सबसे बड़ा भंडार है और इसकी रक्षा की जिम्मेदारी डॉल्फिन और सी लॉयन की है।
गंभीर मामलों में इन समुद्री जीवों के शरीर में एक बाइट प्लेट फिट कर दी जाती है। डॉल्फिन जाकर घुसपैठिए की टांग से टकराती है और उसकी टांग में प्लेट चिपक जाती है और जब तक इसका संदेश हैंडलर तक नहीं पहुंच जाता है, तब तक घुसपैठिया अपनी टांग के अंदर से उसे खींचकर बाहर नहीं कर सकता है।

ये समुद्री जीव इंसान के साथ मिलकर काम करते हैं। ये समुद्री डॉल्फिन एक तरह के सेंसर का इस्तेमाल करके पानी के नीचे खतरे का पता लगाती है और खतरे की स्थिति में पानी की सतह के ऊपर आकर अपने हैंडलर को अलर्ट करती है। अगर हैंडलर को लगता है कि स्थिति से निपटने के लिए कुछ कार्रवाई जरूरी है तो वह डॉल्फिन की नाक पर नॉइजमेककर या ऑर्ब लाइट रख देता है। इन डॉल्फिनों को घुसपैठिए से टकराने के लिए प्रशिक्षित किया जाता है। ये डॉल्फिन घुसपैठिए से ऐसे टकराती है कि डॉल्फिन के पास से डिटैक्टर संदिग्ध घुसपैठिए के पास चली जाती है जिससे उस पर नजर रखने में आसानी होती है।

डॉल्फिन पानी की सतरह के काफी नीचे की चीजों का पता लगा सकती है। डॉल्फिन के अंदर समुद्र के काफी अंदर की आवाज को पकड़ने की क्षमता होती है। सी लॉयन की सुनने और देखने की बहुत मजबूत क्षमता होती है। खासतौर पर बहुत ही खराब स्थिति जैसे समुद्र की काफी गहराई में जहां अंधेरा ही अंधेरा होता है, वहां भी सी लॉयन देख सकती है। इसी वजह से डॉल्फिन और सी लॉयन को चुना गया है।