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इस बार लोकतंत्र को नहीं मिलेगी सवालों की आक्सीजन

नई दिल्ली. भारत के संसदीय इतिहास में 70 साल बाद संसद के दोनों सदनों में पक्ष—विपक्ष के सदस्य सरकार से सवालों का जवाब नहीं मांग सकेंगे। 1950 के बाद यह पहला मौका है, जब सांसदों को प्रश्न पूछने के अधिकार से वंचित किया गया है। संसद का ये सत्र एक अक्तूबर को ख़त्म हो जाएगा।
एक विपक्षी नेता ने ट्वीट किया, प्रश्नकाल कैंसल कर दिया गया है? विपक्ष अब सरकार से सवाल भी नहीं पूछ सकता। 1950 के बाद पहली बार ऐसा हो रहा है? वैसे तो संसद का सत्र जितने घंटे चलना चाहिए उतने ही घंटे चल रहा है, तो फिर प्रश्नकाल क्यों कैंसल किया गया। कोरोना का हवाला दे कर लोकतंत्र की हत्या की जा रही है।
संसद सत्र के कुल समय में 50 फ़ीसदी समय सत्ता पक्ष का होता है और 50 फ़ीसदी समय विपक्ष का होता है। लेकिन बीजेपी इस संसद को M&S Private Limited में बदलना चाहती है। संसदीय परंपरा में वेस्टमिंस्टर मॉडल को ही सबके अच्छा मॉडल माना जाता है, उसमें कहा गया है कि संसद विपक्ष के लिए होता है।
कांग्रेस के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे और शशि थरूर ने भी सोशल मीडिया पर सरकार के इस फ़ैसले की आलोचना की है। दो ट्वीट के ज़रिए शशि थरूर ने कहा है कि हमें सुरक्षित रखने के नाम पर ये सब किया जा रहा है। उन्होंने लिखा है, “मैंने चार महीने पहले ही कहा था कि ताक़तवर नेता कोरोना का सहारा लेकर लोकतंत्र और विरोध की आवाज़ दबाने की कोशिश करेंगे. संसद सत्र का जो नोटिफ़िकेशन आया है उसमें लिखा है कि प्रश्न काल नहीं होगा। हमें सुरक्षित रखने के नाम पर इसे सही नहीं ठहराया जा सकता।

सरकार से सवाल पूछना लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए ऑक्सीजन के समान होता है। ये सरकार संसद को एक नोटिस बोर्ड में तब्दील कर देना चाहती है। अपने बहुमत को वो एक रबर स्टैम्प की तरह इस्तेमाल करना चाहते हैं, ताकि जो बिल हो वो अपने हिसाब से पास करा सकें। सरकार की जवाबदेही साबित करने के लिए एक ज़रिया था, सरकार ने उसे भी ख़त्म कर दिया है।
सीपीआई के राज्यसभा सांसद विनॉय विश्वम ने राज्यसभा सभापति वेंकैया नायडू को चिट्ठी लिख कर कहा है कि प्रश्न काल और प्राइवेट मेम्बर बिजनेस को ख़त्म करना बिल्कुल ग़लत है और इसे दोबारा संसद की कार्यसूची में शामिल किया जाना चाहिए। ऐसी ही एक चिट्ठी लोकसभा में कांग्रेस के नेता अधीर रंजन चौधरी ने भी लोकसभा स्पीकर ओम बिरला को लिखी थी।
कांग्रेस के नेता अधीर रंजन चौधरी ने कहा कि सरकार की तरफ़ से दलील य़े दी गई है कि प्रश्न काल के दौरान जिस भी विभाग से संबंधित प्रश्न पूछे जाएँगे, उनके संबंधित अधिकारी भी सदन में मौजूद होते हैं। मंत्रियों को ब्रीफ़िंग देने के लिए ये ज़रूरी होता है। इस वजह से सदन में एक समय में तय लोगों की संख्या बढ़ जाएगी, जिससे भीड़ भाड़ बढ़ने का ख़तरा भी रहेगा। उसी को कम करने के लिए सरकार ने ये प्रावधान किया है। संसद की कार्यवाही प्रश्नकाल से ही शुरू होती है, जिसके बाद शून्य काल होता है। हालाँकि सरकार ने विपक्ष को भरोसा दिलाया है कि प्रश्नकाल की उनकी माँग पर विचार किया जाएगा।

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