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Blood donation benefits of official leave can now be found
Monday , January 20 2020
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अब रक्तदान के लिए मिल सकता है आधिकारिक छुट्टी का लाभ

दि हार्ट केयर फ़ाउंडेरेशन ऑफ इंडिया (एचसीएफआई), जो इस साल परफेक्ट हैल्थ मेला की रजत जयंती मना रहा है, ने डीओपीटी के उस फैसले का स्वागत किया है, जिसमें केंद्र सरकार के कर्मचारियों को Blood donation के लिए हर साल 4 दिनों की विशेष आकस्मिक छुट्टी देने की घोषणा की गयी है, बशर्ते यह Blood donation किसी लाइसेंस प्राप्त ब्लड बैंक से संबंधित हो। इसका उद्देश्य वर्ष 2020 तक 100 प्रतिशत स्वैच्छिक रक्तदान का लक्ष्य प्राप्त करना है।

Blood donation
Blood donation

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भारत में हर साल 5 करोड़ यूनिट रक्त की आवश्यकता होती है, जिसमें से केवल 2.5 करोड़ यूनिट रक्त ही उपलब्ध हो पा रहा है। भारत में रक्त की आवश्यकता के मुकाबले 10 प्रतिशत की कमी है। इसका मतलब है कि 12 लाख से अधिक यूनिट रक्त की कमी पड़ती है। भारत में Blood donation करने योग्य लोगों की संख्या 51.2 करोड़ से अधिक है, जिसे देखते हुए यह कमी खतरनाक है।

इस बारे में बताते हुए, हार्ट केअर फाउंडेशन ऑफ इंडिया (एचसीएफआई) के अध्यक्ष एवं इंडियन मेडिकल एसोसिएशन ;आईएमएद्ध के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष, पद्मश्री डॉ. के के अग्रवाल ने कहा, ‘भारत में 1.3 अरब से ज्यादा की आबादी है, लेकिन अभी भी यहां रक्त की बहुत कमी है। रक्तदान समाज की एक बड़ी आवश्यकता है। Blood donationस्वैच्छिक होना चाहिए। एक वर्ष में कम से कम एक बार रक्तदान करना चाहिए। भविष्य में दिल के दौरे की संभावना कम करने के लिए कई रिपोर्टों में नियमित रूप से Blood donationकरने की जरूरत बतायी गयी है। रक्तदान सबसे अच्छे दान-पुण्य कार्यों में से एक माना जाता है, जो किसी को भी दिया जा सकता है। यह रक्त के विभिन्न घटकों के माध्यम से कई जीवन बचा सकता है। डीओपीटी द्वारा उठाया गया यह कदम बहुत सकारात्मक है और उम्मीद है कि अधिक से अधिक लोगों को आगे आने और खून दान करने के लिए प्रोत्साहित करेगा। मेरा विनम्र सुझाव यह है कि निजी क्षेत्र के सभी प्रतिष्ठानों को भी इस नियम को अपनाना चाहिए। जिन लोगों को अपनी सर्जरी करानी है, उनको पहले ही अपना रक्त दान कर देना चाहिए, ताकि सर्जरी के समय उसका इस्तेमाल किया जा सके।’ नेशनल ब्लड ट्रांसफ्यूशन काउंसिल के नये नियमों के तहत, खून बिल्कुल भी बर्बाद नहीं किया जा सकता। बचे हुए प्लाज्मा से अल्बुमिन और इंट्रावीनस इम्युनोग्लोबुलिंस (आईवीआईजी) जैसे उत्पादों का निर्माण किया जा सकता है। स्वैच्छिक रक्तदान में दान किये जाने वाले रक्त का अधिकतम उपयोग किया जाना चाहिए।

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सीमाओ के वाइस प्रेसीडेंट, डॉ. अग्रवाल ने आगे बताया, ‘अब पर्ण रक्तदान के लिए शिविर आयोजित नहीं होने चाहिए। इसके बजाय कम्पोनेंट्स-ऑनली किस्म के रक्तदान शिविर लगाने चाहिए। एकत्रित रक्त की एक यूनिट का इस्तेमाल 3 से 4 मरीजों की मदद के लिए किया जा सकता है। इसके बदले यह एक दूसरे रोगी को जरूरत के मुकाबले पूर्ण रक्त से बर्बाद किया जा रहा है।

स्वैच्छिक रक्तदान शिविर को अब रक्त-घटक-दान शिविर कहा जाना चाहिए, न कि सिर्फ रक्तदान शिविर। इसलिए, यदि दान किया जा रहा रक्त एक ही बैग में एकत्रित किया जा रहा हो, तो रक्त न दें। आम तौर पर दो कम्पोनेंट वाले बैग का उपयोग किया जाता है। बाल चिकित्सा के उपयोग के लिए 100 मिलीलीटर वाले बैगों को बढ़ावा दिया जाना चाहिए।’

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रक्त दान करने के लिए कुछ चीजें इस प्रकार हैं-
*Blood donationसे एक रात पूर्व और सुबह पर्याप्त फलों के रस और पानी से अपने आप को तैयार करें।
* खाली पेट Blood donationकरने से बचें। रक्तदान करने से तीन घंटे पहले ही कुछ खाएं-पीएं। फैटी खाद्य पदार्थों से बचें। समूचे अनाज, अंडे और बीफ, और पालक, पत्तेदार सब्जियां, नारंगी तथा लौह समृद्ध भोजन करें।
* Blood donationकरने से पहले शराब या कैफीन का उपभोग न करें।
*यदि आपकी कोई मेजर सर्जरी हुई है तो 6 माह तक रक्तदान न करें।

हार्ट केअर फाउंडेशन ऑफ इंडिया

हार्ट केअर फाउंडेशन ऑफ इंडिया की शुरूआत 1986 में हुई थी। यह एक अग्रणी गैर सरकारी संस्था है जिसका उद्देश्य लोगों को उनके जीवन के हर कदम और प्रत्येक पहलू से संबंधित स्वास्थ्य के संबंध में जागरूक करना है और देश की स्वास्थ्य समस्याओं के समाधान हेतु उपाय करने में सहयोग देना है। एनजीओ लोगों को जागरूक करने और उन्हें स्वास्थ्य पहलुओं से अवगत कराने के लिए उपभोक्ता आधारित मनोरंजक साधनों का इस्तेमाल करता है। इसका सबसे बड़ा उदाहरण परफेक्ट हेल्थ मेला है, जो कि एक वार्षिक आयोजन है। मेले की शुरूआत 1993 में की गई थी, जिसमें हर साल 2-3 लाख लोग हिस्सा लेते हैं। मेले में विभिन्न श्रेणियों में कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं, जैसे कि स्वास्थ्य शिक्षा सेमिनार, चेकअप, मनोरंजक कार्यक्रम, लाइफस्टाइल एग्जिबिशन, लेक्चर, कार्यशाला और प्रतियोगिता आदि। इसके अतिरिक्त, एनजीओ लोगों को हैंड्स ओनली सीपीआर-10 तकनीक को सीपीआर 10 मंत्र के माध्यम से सिखाने के लिए सेमिनार आदि भी लगाता है, इसके तहत सडन कार्डिएक अरेस्ट के बाद मरीज को पुनर्जीवित करने की तकनीक सिखाई जाती है। उनका नाम एक साथ सबसे ज्यादा संख्या में लोगों को सीपीआर 10 तकनीक सिखाने के लिए लिमका बुक ऑफ वर्ल्ड रेकॉर्ड में भी दर्ज है। भारतीय संविधान की धारा 21 को दिमाग में रखते हुए, जो हर व्यक्ति को जीवन का अधिकार देती है, हार्ट केयर फाउंडेशन ऑफ इंडिया ने हाल ही में एक प्रोजेक्ट समीर मलिक हार्ट केयर फाउंडेशन फंड की भी शुरुआत की है। इसके तहत उन दिल के मरीजों को आर्थिक और तकनीकी सहायता मुहैया कराई जाती है जो आर्थिक रूप से पिछ़ड़े हैं।

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