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बलैयामठ पर लूटा था हथियारों का जखीरा, नहीं लूटते तो फांसी से बच जाते…..

यहां हुई थी फिरंगियों से जंग

लखनऊ. ये बलैयामठ है, वही बलैयामठ जहां 1857 में मंगल पांडे ने अंग्रेजों से पहला मोर्चा उनकी रसद और हथियार लूटकर लिया था। इटावा जिले में आगरा कानपुर हाइवे के पास से गुजर रहे जसवंतनगर का बलैयामठ 1857 के गदर का गवाह है। जहां आजादी के दीवाने मंगल पांडे एवं उनके साथियों की फिंरगियों से जंग हुई थी। बात 1857 की है जब ब्रिटिश हुकूमत के खिलाफ हिंदुस्तानियों ने जंग छेड़ दी थी। हर ओर ब्रिटिश हुकूमत के खिलाफ विद्रोह के स्वर फूट रहे थे। मेरठ में भी विद्रोह ने तेजी पकड़ ली थी।

 

ईस्ट इंडिया कंपनी के मुख्यालय कलकत्ता से मेरठ में सैन्य व रसद सामग्री भेजी गई। आजादी के दिनो मे छोटे से कस्बे जसवंतनगर के मोहल्ला फक्कड़पुरा में स्थित बलैया मठ इस रास्ते में ही पड़ता था। लिहाजा मंगल पांडे ने ब्रिटिश हुकूमत के इस कुचक्र को इसी स्थान पर ध्वस्त करने की ठान ली थी। मंगल पांडे और उनके साथियों ने इस मठ पर डेरा डाल दिया। 18 मई 1857 को क्रांतिकारियों ने कलकत्ता से मेरठ जा रही सैन्य व रसद सामग्री को लूट लिया था।

इटावा के बीहड इलाके चकरनगर तहसील हिस्से में सबसे ज्यादा ऐतिहासिक इमारतें हैं, 1857 के गदर में अलग अलग रियासतों के राजाओं को ब्रिटिश हुकूमत अपना गुलाम बना रही थी। भरेह के राजा रूप सिंह तथा चकरनगर के राजा निरंजन सिंह जूदेव ने अंग्रेजों की दासता स्वीकार करने से इंकार कर दिया। नतीजन अंग्रेजों ने भरेह के राजा रूपसिंह के किले पर हमला बोल दिया गया।

अंग्रेजों से लड़ते लड़ते छह लोग गिरफ्तार कर लिए गए। बाद में उन्हें काला पानी की सजा सुनाई। चकरनगर रियासत के राजा निरंजन सिंह जूदेव ने भी अंग्रेजों से लोहा लिया।
बीहड़ क्षेत्र चकरनगर में आज यहां यमुना-चंबल का संगम है वहां भरेह के राजा रूप सिंह का किला होने के साथ ही बंदरगाह हुआ करता था। 1857 से पहले यहीं से जलमार्ग के जरिए व्यापार होता था। चकरनगर में यमुना किनारे बना मठ भी आजादी की याद दिलाता है क्योंकि राजा निरंजन सिंह जूदेव के सैनिक नरियल बाल्मीकि ने इसी जगह पर दो अंग्रेजों को मार गिराया था। इसके बाद चकरनगर के राजा निरंजन सिंह जूदेव के किले को तोपों से उड़ा दिया गया था।

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