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सूखे खेत में धान की बुवाई करती है पूसा की ये मशीन, दोगुना उगता है धान

क्या धान की बुवाई सूखे खेत में की जा सकती है। बिल्कुल अभी तक लगभग नामुमकिन सी लगने वाली यह बात अब मुमकिन है। डॉक्टर राजेन्द्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय, पूसा की बनाई मानव और बैटरी चालित इस मशीन से सूखे खेत में धान की पंक्तियों में बुआई की जाती है जिससे परम्परागत रूप से की जानेवाली बुआई खर्च में प्रति एकड़ 3500 से 4000 रुपए तक की बचत होती है और उत्पादन भी 15 से 20 प्रतिशत बढ़ जाता है। परम्परागत तरीके से धान लगाने के लिए पहले पौधशाला में इसके बिचड़े तैयार किए जाते हैं, फिर खेत को तैयार कर उसमें पानी जमा किया जाता है और इसके बाद मजदूर या मशीन से बिचड़े की खेत में रोपाई की जाती है।

दो घंटे में आधा एकड़ धान की बुआई

विश्वविद्यालय के कृषि अभियंत्रण कॉलेज के सहायक प्राध्यापक सुभाष चन्द्र ने बताया कि मात्र 27 किलो वजन की मशीन से दो आदमी दो घंटे में आधा एकड़ धान की बुआई कर सकते हैं। मोटर चालित मशीन से दो घंटे में डेढ़ एकड़ धान की बुआई की जा सकती है। इस मशीन से गेंहू की बुआई भी बेहतरीन तरीके से की जाती है। डॉ चन्द्र ने बताया कि मानव चालित मशीन का मूल्य 12000 रुपए और मोटर चालित मशीन का मूल्य 70000 रुपए है । एक निजी बीज निर्माता कंपनी ने 528 मशीनों की खरीद की है और उसने इससे एक हाइब्रिड किस्म के धान की बुआई का प्रयोग किया जिसके दौरान परम्परागत विधि की तुलना में उसका उत्पादन 35 प्रतिशत तक बढ़ गया।

बड़ी संख्या में किल्ले निकलते हैं

खेतों की अच्छी तरह जुताई के बाद मशीन से धान की बुआई की जाती है। इससे उचित गहराई में बीज जाता है । बुआई के 24 घंटे के अंदर खेत की हल्की सिंचाई कर दी जाती है। इससे बीजों में जबरदस्त अंकुरण होता है तथा तेजी से जड़ों का विकास होता है जिससे इनमें बड़ी संख्या में किल्ले निकलते हैं और फसल की उपज बढ़ जाती है। इस विधि से बुआई में धान की बाली की लंबाई भी बढ़ जाती है जिससे भी उपज अधिक हो जाती है। मोटर से इस मशीन को चलाने के लिए लीथियम आयन बैटरी लगायी गयी है जिसका वजन मात्रा 900 ग्राम है। इसका मूल्य बाइस हजार रुपए है। इसमें एक मोटर लगी है जिसका मूल्य 12000 रुपए है जिसके कारण इसकी कीमत में वृद्धि हो जाती है।

छोटे किसानों के लिए बेहतर विकल्प

संस्थान की ओर से इस मशीन को प्रयोग के लिए देश के अलग अलग हिस्सों में भेजा गया था जिसके उत्साहवद्र्धक परिणाम सामने आए हैं और वर्तमान परिदृश्य में इसे छोटे किसानों के लिए बेहतर विकल्प बताया गया है। बिहार सरकार ने डॉ चन्द्र को सात मई को इस मशीन की खूबियों की जानकारी देने के लिए आमंत्रित किया है। उनका कहना है कि मजदूरों की कमी और पानी की समस्या के कारण छोटे किसानों के लिए यह मशीन बहुत उपयोगी है। ट्रैक्टर चालित मशीन से छोटे खेतों में बुआई सही तरीके से संभव नहीं होती है और ट्रैक्टर मालिक इसके लिए तैयार भी नहीं होते है। इस परिस्थिति में यह मशीन बेहतर विकल्प पेश करता है।

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खम्भे से उतारने के लिए पुलिस को पिलानी पड़ी शराब

बरेली से एक अजीबोगरीब घटना सामने आई है, जहां शराब की मांग करने वाला एक शख्स विज्ञापनों की होर्डिंग लगाए जाने वाले एक खंभे पर चढ़ बैठा और उसकी मांग न पूरी होने पर आत्महत्या करने तक की भी धमकी दी।

इस नाटक की शुरूआत गुरुवार देर शाम को हुई और एक घंटे बाद जब पुलिस ने उसे शराब की बोतल देने का वादा किया, तब जा कर यह खत्म हुआ।
घटना की पुष्टि करते हुए कोतवाली एसएचओ गीतेश कपल ने कहा, हम उसे बिना किसी चोट के नीचे लाने में कामयाब रहे।

हमने सिर्फ वादा किया था, लेकिन शराब की बोतल उसे नहीं दी गई। राज्य में शराब की बिक्री पर रोक लगी हुई है और हम लॉकडाउन के दिशा निदेर्शों का सख्ती से पालन कर रहे हैं। हम उसकी पहचान करने की कोशिश में जुटे हुए हैं, ताकि परिवार को सूचित किया जा सकें।

पुलिस कर्मियों ने उस आदमी को खाना और सॉफ्ट ड्रिंक दिया और उसे छोडऩे से पहले उसकी काउंसिलिंग भी की गई। पुलिस अधिकारियों ने कहा कि वह आदमी मानसिक रूप से अस्थिर लग रहा था।

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कोरोना वायरस के संक्रमण से बचाएंगे एंटी वायरल कपड़े से बने वस्त्र

फैशन बाजार ने कोरोना संक्रमण के चलते देश भर में लागू लॉकडाउन का फायदा उठाने का रास्ता खोज लिया है। वह फैशन के दीवाने लोगों के लिए एंटी वायरल कपड़ा लेकर आया है। बाजार का दावा है कि इस कपड़े से बने वस्त्र पहनने वालों से कोरोना वायरस कई मीटर दूर रहेगा।

सूक्ष्मजीवों को पनपने से रोकते हैं एंटीवायरल और एंटी-बैक्टीरियल कपड़े 

ये कपड़ा ग्राडो नामक कम्पनी ने बनाया है। डोनियर समूह की कंपनियों द्वारा विकसित और ग्राडो की निर्माण इकाइयों द्वारा बेहतरीन तरीके से तैयार किए गए परिधानों में सूट से लेकर जैकेट और पतलून तक किसी भी तरह के परिधान पहनने और उपयोग करने के लिए सुरक्षित प्रमाणित किए गए हैं। विशेष रूप से डिजाइन किए गए एंटीवायरल और एंटी-बैक्टीरियल कपड़े सूक्ष्मजीवों को पनपने से रोकते हैं। जिससे वे सुरक्षित और स्वच्छ बनते हैं। कपड़े अपने गुणों को 50 बार धुलने तक भी बरकरार रखते हैं और हर रोज पहनने के लिए उपयुक्त हैं।
ग्राडो के एक अधिकारी ने कहा कि दुनिया की मौजूदा स्थिति को देखते हुए बाजार में इस लॉकडाउन के लिए ज्यादा हाइजीन प्रोडक्ट की पेशकश करने की स्थिति में होना चाहते थे और फिलहाल एंटी वायरल कपड़ों से बेहतर और क्या हो सकता है, जिसे हर कोई पहन सकता है। हम इस मुश्किल समय में राष्ट्र के लिए अपना योगदान देने के बारे में गर्व महसूस कर रहे हैं।

सुरक्षा की गारंटी नहीं

यहां यह उल्लेखनीय है कि कोरोना संकट के बीच जहां हम सब परेशान हैं, वहीं क्या हमने एक बार भी सोचा है कि जब हम घरों से बाहर निकलने के लिए आजाद होंगे तो क्या अपने फैंसी कपड़ों में सुकून के साथ बाहर निकलने का साहस कर पाएंगे? एंटीवायरल कपड़ों को पहनने से इसमें मदद मिल सकती है, जो भले ही सुरक्षा की गारंटी नहीं देता है, लेकिन कम से कम मानसिक शांति देता है। नियो टेक्नोलॉजी की मदद से जो बेहतरीन क्वालिटी का उपयोगी प्रोडक्ट बनाता है, जो बैक्टीरिया और वायरस से सुरक्षा कवच प्रदान करता है, जिंदगी शायद सहज व आसान हो जाए। ग्राडो नियो टेक्नोलॉजी उपयोग करते हुए वायरस और रोगाणुओं से सुरक्षा के लिए कपड़े बनाने वाली पहली कपड़ा कंपनी है।

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70 हजार साल पुरानी भाषा में बात करते हैं अंडमान निकोबार के ये तीन आदिवासी

क्या आप जानते हैं कि 70 हजार वर्ष पुरानी ‘जेरो’ भाषा को बोलने वाले दुनिया में कितने लोग जीवित हैं! जवाब है सिर्फ तीन, जी हां दो पुरुष और एक महिला ही इस भाषा में बात करते हैं और वे तीनों भारत के अंडमान निकोबार के जंगलों में रहते हैं।

तीनों पर मंडरा रहा है कोरोना का खतरा 

इन तीनों पर अब कोरोना का खतरा मंडरा रहा है इसलिए संयुक्त राष्ट्र शैक्षिक, वैज्ञानिक तथा सांस्कृतिक संगठन (यूनेस्को) की भाषा सलाहकार एवं जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय में भाषा विज्ञान की पृर्व अध्यक्ष डॉ अन्विता अब्बी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर अंडमान निकोबार के तीनों आदिवासियों को बचाने की अपील की है। अब्बी के मुताबिक तीनों आदिवासी दुनिया की पहली और 70 हजार साल पुरानी भाषा बोलते है। डॉ अब्बी ने मोदी को लिखे पत्र में कहा है कि अंडमान निकोबार में ‘जेरो’ भाषा बोलने वाले अब केवल तीन आदिवासी ही दुनिया मे बचे है। यह 70 हजार वर्ष पुरानी भाषा है जिसे दुनिया की सर्वप्रथम भाषा माना जाता है। इन तीन आदिवासियों के नाम पेजे, गोलटा (पुरुष) और नू (स्त्री) है।

चार अप्रैल को हो गई थी ली ची नामक आदिवासी महिला की मृत्यु

उन्होंने लिखा है कि चार अप्रैल को ली ची नामक एक आदिवासी महिला की गम्भीर बीमारी से मृत्यु हो गई जो ‘जेरो’ नामक लुप्त प्राय: भाषा बोलने वाले चार ​व्यक्तियों में से एक थी। इस तरह हम अपनी भाषा विरासत को नहीं बचा सके। इसलिए कोरोना महमारी को देखते हुए तीन उपरोक्त व्यक्तियों की सुरक्षा की अपील करती हूँ।

मानव संसाधन विकास मंत्रालय की सलाहकार डॉ अब्बी ने इन आदिवासियों पर विशेष ध्यान देने का आग्रह किया है क्योंकि वे जंगल में अंडमान ट्रंक रोड बनने के चलते पुलिस अधिकारियों के संपर्क में आने से कोरोना के खतरे में पड़ सकते हैं। इन आदिवासियों को बचाने का मतलब विश्व की पुरानी भाषा और सभ्यता को बचाना है, इसलिए सम्बद्ध मंत्रालयों और स्थानीय प्रशासन को निर्देश देकर इन्हे सुरक्षित रखा जाए। डॉ अब्बी इस समय गोवा विश्वविद्यालय में बी बीबोरकर भाषा पीठ की अध्यक्ष है। वह कई विदेशी विश्वविद्यालयों से जुड़ी रही हैं तथा विजिटिंग प्रोफेसर भी रही हैं।

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delhi police getting alert: मिलते रहे अलर्ट फिर भी हाथ बांधे खड़ी रही पुलिस

delhi police getting alert:  खुफिया एजेंसियों ने उत्तर-पूर्वी दिल्ली में हिंसा शुरू होने से पहले दिल्ली पुलिस को कम से कम छह बार अलर्ट भेजा गया था। भाजपा नेता कपिल मिश्रा के भड़काऊ बयान के दौरान पुलिस को ये अलर्ट भेजे गए थे और इलाके में पुलिस बल की तैनाती बढ़ाने को कहा गया था। लेकिन पुलिस कार्रवाई में नाकाम रही और हिंसा पूरे इलाके में फैल गई।

हिंसा से पहले बढ़ा तनाव

शनिवार रात को जाफराबाद में लगभग 500 महिलाएं नागरिकता कानून (CAA) के विरोध में सड़क पर धरने पर बैठ गईं थीं। विरोध में भाजपा नेता कपिल मिश्रा ने CAA समर्थकों से रविवार दोपहर तीन बजे मौजपुर चौक पर इकट्ठा होने को आह्वान किया।
मिश्रा तय समय पर चौक पर पहुंचे और समर्थकों की मौजूदगी में पुलिस को चेतावनी दी कि वो तीन दिन के अंदर सड़के खाली कराएं नहीं तो उन्हें खुद सड़कों पर उतरना पड़ेगा।

मिश्रा के जाने के बाद पत्थरबाजी

भाषण देने के बाद कपिल मिश्रा इलाके से चले गए। उनके जाने के बाद CAA समर्थकों और विरोधियों में पत्थरबाजी शुरू हो गई। पहले पत्थरबाजी किसने की, ये अभी तक साफ नहीं है। रविवार को देर शाम तक पत्थरबाजी की खबरें आती रहीं। अगले दिन सोमवार को हिंसा ने बड़ा रूप ले लिया और ये दंगे में बदल गया जो तीन दिन तक चलता रहा। दिल्ली पुलिस के हिंसा रोकने में नाकाम पर गंभीर सवाल उठे हैं।

इस समय भेजा गया पहला अलर्ट

‘टाइम्स ऑफ इंडिया’ की रिपोर्ट के अनुसार, स्पेशल ब्रांच और खुफिया इकाई ने वायरलेस रेडियो के जरिए उत्तर-पूर्व जिले के पुलिस अधिकारियों को कई अलर्ट भेजे।
पहला अलर्ट दोपहर 1:22 बजे के बाद भेजा गया जब मिश्रा ने ट्वीट कर लोगों को मौजपुर चौक पर जमा होने को कहा था। दोनों गुटों में टकराव की आशंका को देखते हुए खुफिया इकाई ने स्थानीय पुलिस को इलाके में सतर्कता बढ़ाने को कहा था।

पत्थरबाजी शुरु होने के बाद आए बाकी अलर्ट

जब इलाके में दोनों गुटों के बीच पत्थरबाजी हुई और भीड़ इकट्ठा होने लगी, तब भी स्पेशल पुलिस और खुफिया इकाई की तरफ से पुलिस को कई अलर्ट भेजे गए थे। हालांकि पुलिस ने इन अलर्ट पर किसी भी तरह की लापरवाही बरतने की बात से इनकार किया है।
एक पुलिस अधिकारी ने टाइम्स आॅफ इंडिया से कहा, अलर्ट मिलने के बाद सभी आवश्यक कदम उठाए गए। इसी कारण एक वरिष्ठ अधिकारी मिश्रा के साथ था और उसने ये सुनिश्चित किया कि वो जल्द से जल्द इलाके से बाहर जाएं। इन प्रयासों के बावजूद CAA विरोधियों ने मिश्रा के समूह पर पत्थरबाजी शुरू कर दी।

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Maha Shivratri mrityunjaya upasana 2020: मौत से लगता है डर तो इस महाशिवरात्रि करें शिव के मृत्युंजय स्वरूप की उपासना

Maha Shivratri mrityunjaya upasana 2020: देवाधिदेव महादेव की महिमा निराली है इसलिए इन्हें देवों का देव कहा गया है। शिव पुराण में कहा गया है कि इनका हर रूप कल्याणकारी है। जिस पर भोलेनाथ की कृपा होती है उसके जीवन में किसी प्रकार की बाधा नहीं आती है। भोलेनाथ भक्तों के लिए अपना दरबार हमेशा खुला रखते हैं। शिव के हर स्वरूप की महिमा अलग-अलग है। पुराणों में भगवान शिव के जिन स्वरूपों का वर्णन है वे निम्न प्रकार हैं:—

 

Maha Shivratri mrityunjaya upasana 2020:

मृत्युंजय:

भगवान शिव के मृत्युंजय स्वरूप की उपासना से मृत्यु पर भी विजय पाया जा सकता है। मृत्युंजय स्वरूप में भगवान शिव अमृत कलश के साथ भक्तों की रक्षा करते हैं। इनकी उपासना से अकाल मृत्यु को भी टाला जा सकता है। मृत्युंजय की पूजा से आयु की रक्षा और उत्तम सेहत का वरदान मिलता है। मृत्युंजय मंत्र- “ॐ हौं जूं सः” है।

महादेव:

Maha Shivratri mrityunjaya upasana 2020: शिव के इस स्वरूप से ही सभी देवताओं की उत्पत्ति हुई। साथ ही भगवान शिव के इस स्वरूप से ही शक्ति का उद्भव हुआ। सम्पूर्ण देवी-देवताओं की उत्पत्ति करने के कारण इन्हें महादेव कहा जाता है। कहते हैं कि भगवान शिव के इस स्वरूप की उपासना से सभी देवी-देवताओं का आशीर्वाद मिलता है। इसके अलावा इनकी पूजा से ग्रहों की दशा ठीक रहती है।

नीलकंठ:

Maha Shivratri mrityunjaya upasana 2020: भगवान शिव के इस स्वरूप की महिमा बहुत निराली है। कहते हैं कि जब अमृत के लिए समुद्र मंथन हुआ था तब भगवान शिव ने समुद्र मंथन से निकले विष को पीया था। शिव ने विष इसलिए पीया था कि संसार की रक्षा हो सके। हलाहल विष के पीने से शिव जी का कंठ नीला हो गया था। इस कारण इन्हें नीलकंठ कहा जाता है। शिव के इस स्वरूप की उपासना से शत्रु बाधा नहीं रहती है। इनके इस स्वरूप का मंत्र’- “ॐ नमो नीलकंठाय” है।

आशुतोष:

 

Maha Shivratri mrityunjaya upasana 2020: इस स्वरूप में भगवान शिव अपने भक्तों की भक्ति से बहुत जल्द खुश होते हैं। जल्द प्रसन्न होने के कारण इन्हें आशुतोष कहा गया है। मान्यता है कि मानसिक परेशानियों से निजात पाने के लिए आशुतोष स्वरूप की उपासना खास है। भगवान शिव के इस स्वरूप का मंत्र- “ॐ आशुतोषाय नमः” है।

रुद्र:

 

Maha Shivratri mrityunjaya upasana 2020: भगवान शिव के इस स्वरूप को रुद्र इसलिए कहा गया है कि इनमें संहारक शक्ति है। मान्यता है कि भगवान शिव के इस स्वरूप की भक्ति से मनुष्य में वैराग्य भाव उत्पन्न होता है। शिव के रुद्र स्वरूप की उपासना का मंत्र- “ॐ नमो भगवते रुद्राय” है।

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मडुआ, खाने वालों को छू नहीं सकती डायबिटिज, हृदय रोग भी रहता है दूर

प्रचुर मात्रा में कैल्शियम, आयरन और फाइबरयुक्त मड़ुआ नामक अन्न इतनी ऊर्जा प्रदान करता है कि इंसान कई घंटों तक बिना थके मेहनत कर सकता है। इसी वजह से इस अन्न को पहाड़ में रहने वाले चाव से खाते हैं। मड़ुआ को काफी दिनों तक स्टोर करके रखा जा सकता है क्योंकि यह खराब नहीं होता।

कैल्शियम, आयरन और फाइबर

मड़ुआ समुद्र तल से 2000 मीटर की ऊंचाई पर भी उगाया जा सकता है। इसमें आयरन एवं अन्य पोषक तत्व प्रचुर मात्रा में हैं। इसमें सूखे को झेलने की अपार क्षमता है और करीब 10 साल तक भंडारित किया जा सकता है। मड़ुआ में कीड़े नहीं लगते। इसलिए सूखाग्रस्त क्षेत्रों के लिए मड़ुआ जीवन-रक्षक की भूमिका निभा सकता है। मड़ुआ की घास मवेशियों के चारे के लिए भी उपयुक्त होती है क्योंकि इसमें करीब 61% पोषक तत्व पाए जाते हैं। मड़ुआ का इस्तेमाल कुष्ठ और यकृत संबंधी रोगों के उपचार के लिए पारंपरिक औषधि के तौर किया जाता है। मड़ुआ में कैल्शियम, आयरन और फाइबर पाया जाता है इसलिए यह अन्य अनाजों की तुलना में अधिक ऊर्जा प्रदान करने में सक्षम है। मड़ुआ के यही गुण इसे नवजात शिशुओं और बुजुर्गों के लिए उपयुक्त खाद्य पदार्थ बनाते हैं।

शरीर में ऊर्जा को जल्दी से लौटा देती है मड़ुआ की रोटी

तमिलनाडु में मड़ुआ को देवी अम्मन (मां काली का एक स्वरूप) का एक पवित्र भोजन माना जाता है। देवी अम्मन से जुड़े हर पर्व-त्योहार में महिलाएं मंदिरों में मड़ुआ का दलिया, जिसे कूझ कहा जाता है, बनाती हैं और गरीबों और जरूरतमंदों में बांटती हैं। कूझ कृषक समुदाय का मुख्य भोजन है जिसे कच्चे प्याज और हरी मिर्च के साथ खाया जाता है। व्रत के बाद मड़ुआ की रोटी शरीर में ऊर्जा को जल्दी से लौटा देती है। नेपाल में मडुआ के आटे की मोटी रोटी बनाई जाती है। मड़ुआ से बीयर, बनाई जाती है। श्रीलंका में नारियल के साथ मड़ुआ की मोटी रोटी बनाई जाती है और मसालेदार मांस के साथ खाया जाता है। मड़ुआ का सूप भी बनाया जाता है, जिसे करक्कन केंदा के नाम से जाना जाता है। वियतनाम में मड़ुआ का इस्तेमाल औषधि के तौर पर महिलाओं के प्रसव के दौरान किया जाता है। कई जगहों पर मड़ुआ का इस्तेमाल शराब बनाने के लिए भी किया जाता है।

खून में प्लाज्मा ट्रायग्लायसराइड्स को कम करता है मड़ुआ

मड़ुआ प्रोटीन, विटामिन और कार्बोहाइड्रेट का मुख्य स्रोत है और यह मानव शरीर के लिए आवश्यक पौष्टिक तत्वों की पूर्ति कर सकता है। कई प्रकार के रोगों से बचाव में भी सहायक है। अमेरिकन डायबिटीज एसोशिएशन की एक रिपोर्ट के अनुसार मड़ुआ को अपने दैनिक आहार में शामिल करने वाली आबादी में मधुमेह रोग होने की आशंका बहुत कम होती है। मड़ुआ में चावल और गेहूं के मुकाबले अधिक फाइबर पाया जाता है और यह ग्लूटन मुक्त भी होता है, जिसके कारण यह आंतों से संबंधित रोगों से बचाता है। एक शोध के अनुसार, मड़ुआ का सेवन हृदय संबंधी रोगों से बचाव में कारगर है क्योंकि यह खून में प्लाज्मा ट्रायग्लायसराइड्स को कम करता है। मड़ुआ खाने वाली आबादी में खाने की नली के कैंसर होने की संभावना कम हो जाती है।

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ये राज्य सिर्फ दसवीं पास को ही देंगे नौकरी, जल्दी से कर दीजिए आवेदन

क्या पारिवारिक परिस्थितियों के चलते आप दसवीं पास करने के बाद आगे नहीं पढ़ पाए तो भी निराश होने की जरूरत नहीं है क्योंकि देश के कई राज्यों की सरकारों को सिर्फ 10वीं पास उम्मीदवारों की ही जरूरत है। इसलिए अगर आप सिर्फ 10वीं पास हैं और सरकारी नौकरी की तलाश कर रहे हैं तो आपके लिए एक अच्छी खबर है।

 

 

हिंदुस्तान कॉपर लिमिटेड, रेलवे भर्ती सेल (RRC), पूर्व मध्य रेलवे और पश्चिम मध्य रेलवे और भारतीय डाक विभाग ने 10वीं पास के लिए भर्ती निकाली है। इच्छुक और योग्य उम्मीदवार आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर ऑनलाइन माध्यम से आवेदन कर सकते हैं। अन्य किसी माध्यम से किया गया आवेदन स्वीकार नहीं किया जाएगा। हिंदुस्तान कॉपर लिमिटेड ने ट्रेड अप्रेंटिस के 161 पदोंं पर भर्ती निकाली है।
इसके लिए ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया 28 जनवरी, 2020 से शुरू हो गई है और आवेदन करने की अंतिम तिथि 15 फरवरी, 2020 है। शॉर्टलिस्ट किए गए उम्मीदवारों की लिस्ट 25 फरवरी, 2020 को आएगी। आवेदन के लिए उम्मीदवार 10वीं पास हो और ITI का डिप्लोमा भी होना चाहिए। साथ ही आयु 18-30 वर्ष के बीच हो।

भारतीय डाक विभाग में 900 से भी अधिक पद

भारतीय डाक विभाग ने ब्रांच पोस्ट मास्टर (BPM), असिस्टेंट ब्रांच पोस्ट मास्टर (ABPM) और डाक सेवा के 919 पदों पर भर्ती निकाली है। इसके लिए ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया 27 जनवरी, 2020 से शुरू हो गई है और आवेदन करने की अंतिम तिथि 09 फरवरी, 2020 है।
किसी भी मान्यता प्राप्त बोर्ड से 10वीं पास करने वाले और 18 वर्ष से 40 वर्ष के बीच वाले उम्मीदवार आवेदन करने के पात्र है।

रेलवे में होगी इतनी भर्ती

रेलवे भर्ती सेल (RRC) ने अप्रेंटिस के 2,792 पदों पर, पूर्व मध्य रेलवे ने 447 पदों पर और पश्चिम मध्य रेलवे ने 3,553 पदों विभिन्न पदों पर भर्ती के लिए आवेदन आमंत्रित किए हैं। इन सभी पदों के लिए ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। इस भर्ती के लिए 10वीं और ITI का डिप्लोमा प्राप्त करने वाले उम्मीदवार आवेदन कर सकते हैं।

अरुणाचल प्रदेश को चाहिए 10वीं पास

अरुणाचल प्रदेश कर्मचारी चयन बोर्ड (APSSB) ने हेड कांस्टेबल, फायरमैन, कांस्टेबल, फॉरेस्ट गार्ड, मिनरल गार्ड, एच/सी ड्राइवर और कॉन्स्टेबल ड्राइवर आदि के 944 पदों पर भर्ती के लिए आवेदन आमंत्रित किए हैं।
इसके लिए ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया 28 जनवरी, 2020 से शुरू हो गई है और आवेदन करने की अंतिम तिथि 28 फरवरी, 2020 है। इनमें से किन्हीं पदों के लिए केवल 10वीं पास उम्मीदवार आवेदन कर सकते हैं।

राजस्थान में पुलिस भर्ती 

राजस्थान ने कांस्टेबल जनरल और कांस्टेबल ड्राइवर के 5,000 पदों पर भर्ती के लिए आवेदन आमंत्रित किए हैं। इसके लिए ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया 23 दिसंबर, 2019 से शुरू हो गई थी और आवेदन करने की अंतिम तिथि 10 फरवरी, 2020 है। फीस जमा करने की अंतिम तिथि 21 फरवरी, 2020 है। इसके लिए 10वीं और 8वीं पास उम्मीदवार आवेदन कर सकते हैं। उम्मीदवारों को ऑनलाइन माध्यम से ही आवेदन करना होगा।

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29 जनवरी को वंदे मातरम बजाने के साथ अस्त्र—शस्त्रों को शस्त्रागारों में रख देगी भारतीय सेना

भारतीय सेना इस साल से ईसाई गीत ‘अबाइड विथ मी’ को इस साल से बजाना बंद कर देगी। रक्षा मंत्रालय ने आदेश दिया है कि अब से सेना के सालाना बीटिंग रिट्रीट कार्यक्रम में 29 जनवरी को ‘अबाइड विथ मी’ के स्थान पर वंदे मातरम बजाया जाएगा।
माना जाता है कि बाइबल से लिया गया ‘अबाइड विथ मी’ गीत, महात्मा गांधी का पसंदीदा गीत था. पारंपरिक रूप से विजय चौक पर गणतंत्र दिवस समारोह के समापन पर सैन्य बैंड के 45 मिनट लंबे कार्यक्रम का समापन इसी गीत से किया जाता है.

ये बदलाव भारतीय संगीत की धुनों को बढ़ावा देने के लिए ये बदलाव किया जा रहा है. हर साल पुरानी धुने हटाई और नई जोड़ी जाती है. ये उसी बदलाव के सिलसिले का हिस्सा है. ‘अब भारतीय धुनों पर अधिकाधिक ध्यान केंद्रित किया जा रहा है. ये सैन्य संगीत के ‘भारतीयकरण ‘ की दिशा में उठाया गया कदम है, खासकर इस आयोजन में बजाई जाने वाली धुनों का. इन धुनों का चयन सेना के सेरीमोनियल एंड वेलफेयर निदेशालय जो सेना मुख्यालय के अंतर्गत आता है वह रक्षा मंत्रालय के परामर्श के बाद फाइनल करता है.
बीटिंग रिट्रीट का धीरे धीरे भारतीयकरण’ हो रहा है. इसमें कई गैर सैन्य वाद्य यंत्र जोड़ दिए गए हैं जैसे सितार और कई भारतीय धुनें शामिल हैं. ये एक सैन्य समारोह है जिसमें सैन्य बैंड भाग लेते हैं. नरेंद्र मोदी सरकार के पहले गणतंत्र दिवस समारोह में 2015 में, भारतीय क्लासिकल वाद्य यंत्र का पहली बार इस्तेमाल किया गया. उस साल पहली बार इस आयोजन में सितार, संतूर और तबला सुनाई दिया. 2018 में 26 में से 25 धुने भारतीयों द्वारा बनाईं गई थी. इकलौती ‘अंग्रेज़ी’ धुन ‘अबाइड विथ मी’ थी. न केवल बीटिंग रिट्रीट, 2019 के गणतंत्र दिवस समारोह में भी कई बदलाव देखे गये थे. पहली बार स्वतंत्र भारत में ओरिजिनल मारश्यल ट्यून- शंखनाद बजायी गई थी. ये धुन महार रेजिमेंट की यश गाथा कहती है. बीटिंग रिट्रीट समारोह सदियों पुरानी उस सैन्य परंपरा को दर्शाती है, जिसमें जब सेना लड़ना बंद कर देती है, अपने अस्त्र रख देती है और मैदाने-जंग से अपने शिविरों में लौट आती है.

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कंगाल है पाकिस्तान फिर भी इतने करोड़ की कार में चलता है इमरान

इन दिनों पूरी तरह से कंगाल हो चुके पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान जिस टोयटा लैंड क्रूजर में सफर करते हैं, वह 12.50 करोड़ की है। दुनिया की सबसे महंगी कारों में शुमार इस कार पर बम, गोली यहां तक कि ग्रेनेड हमले का भी असर नहीं होता। इसके अलावा भी इमरान के पास कई गाड़ी हैं जिनकी कीमत अलग—अलग है।

इमरान खान की टोयटा लैंड क्रूजर कार एक कस्टमाइज फीचर वाली ऑर्मड गाड़ी है, जिसकी कीमत 3.5 करोड़ रुपये है। इसका वजन 3.5 टन है। इसमें पावर के लिए 4.5-लीटर का V8 जन दिया गया है, जो 261 बीएचपी पावर जेनरेट करता है। यह कार महज 9.2 सेकेंड्स में 100 किलोमीटर की रफ्तार हासिल कर लेती है। यह स्पेशल ऑर्डर पर बनाई गई है। इस पर गोलियों से लेकर बम तक का असर नहीं पड़ता है। इस कार पर स्मोक अटैक का भी असर नहीं पड़ता है।

इसमें 6-लीटर का पेट्रोल इंजन दिया गया है, जो 530 बीएचपी पावर जेनरेट करता है। टॉप स्पीड 250 किलोमीटर प्रति घंटे की है। यह कार महज 4.8 सेकेंड्स में 0 से 100 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार हासिल कर लेती है।
दुनिया की सबसे सुरक्षित कारों में गिनी जाती है। यह एक ऑर्मड कार है जिस पर पर गोलियों से लेकर बम तक का असर नहीं पड़ता है। इसकी लंबाई 5453 मिलीमीटर, चौड़ाई 1899 मिलीमीटर और ऊंचाई 1498 मिलीमीटर है। इमरान खान जिस कार में सफर करते हैं उसकी कीमत करीब 12.26 करोड़ रुपये है।

जबकि भारत के प्रधानमंत्री जिस गाड़ी में सफर करते हैं वह बीएमडब्ल्यू दुनियाभर में अपनी सुरक्षा के लिए पहचानी जाती है। इस गाड़ी पर गोली और बम का असर नहीं होता है। यह कार अंदर बैठे आदमी को .44 कैलिबर मैगनम हैंडगन्स और ए के 47 जैसे ऑटोमैटिक हथियारों से भी बचा सकती है। इस कार में 20-इंच के बुलेट प्रूफ टायर दिए हुए हैं, जिनपर गोलियों का कोई असर नहीं पड़ता है। यह कार गैस अटैक से लेकर कैमिकल हमले तक को झेल सकती है। इसके अंदर ऑक्सिजन सप्लाई किट भी दी गई है। इसमें 6.6-लीटर 12-सिलिंडर पेट्रोल इंजन है, जो 601 बीएचपी पावर जेनरेट करता है। यह कार केवल 3.7 सेकेंड्स में 100 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार हासिल कर लेती है। इसकी कीमत करीब 2.14 करोड़ रुपये है, लेकिन मोदी जिस कस्टमाइज मॉडल का इस्तेमाल करते हैं उसकी कीमत 10.45 करोड़ रुपये के आसपास है।