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कोरोना वायरस के सबसे आसान शिकार हैं मधुमेह के रोगी, ये चूर्ण बचाएगा उनकी जान

अगर आप डायबिटिक अर्थात मधुमेह के रोगी हैं तो कोरोना काल में सबसे ज्यादा सतर्क रहने की जरूरत आपको ही है क्योंकि डायबिटिज आपकी रोग प्रतिरोधक क्षमता को कम करती है और कोरोना वायरस को ऐसे ही मानव शरीरों की तलाश रहती है जिनकी प्रतिरोधक क्षमता कमजोर हो। ऐसे इंसानों के शरीर कोरोना के प्रवेश को रोक पाने में नाकाम होते हैं और वह आसानी से उनके फेफड़ों तक जा पहुंचता है।
आयुर्वेद विशेषज्ञ मंदीप जायसवाल के अनुसार कोरोना से निपटने के लिए लागू किया गया लॉकडाउन मधुमेह रोगियों को दोहरी परेशानी लेकर आया है। एक तरफ वे मॉर्निंग वाक नहीं कर पा रहे हैं तो दिनचर्या बिगड़ जाने से उनका खानपान नियंत्रित नहीं रह गया है।
डॉ. मंदीप ने बताया कि मधुमेह से पीडि़त रोगियों को इस समय ज्यादा ध्यान देने की जरूरत है। इस रोग से ग्रसित लोगों को हल्का व आधा पेट भोजन करना चाहिए। सुबह का नाश्ता भरपूर करना चाहिए। रात का खाना आठ बजे से पहले तथा आधा पेट करना चाहिए तथा रात के खाने के दो घंटे बाद ही सोना चाहिए।
डा. जायसवाल ने कहा कि मधुमेह रोगियों को दवाओं का नियमित सेवन करना चाहिए। आज के समय में बाहर टहलने की मनाही है इसलिए घर पर ही टहलें। कब्ज न हो, इसका विशेष ध्यान रखना है। इसके लिए खाना खाने के एक घंटे बाद गुनगुने पानी का सेवन करें। यदि दवा की जरूरत है तो भोजन करने से पहले हिंगवाष्टक चूर्ण तथा भोजन करने के एक घंटे बाद त्रिफला चूर्ण क्वाथ का सेवन अवश्य करें।
उन्होंने बताया कि भोजन से एक घंटे पहले हरिद्रा, आमलकी, दालचीनी, गिलोय, मेथी, चिरायता को बराबर मात्रा में मिलाकर इसका चूर्ण बनाकर लगातार सेवन करने से मधुमेह नियंत्रित रहती है। यदि शुगर बढ़ी है तो भोजन करने के एक घंटे बाद निशाकथाकादि कशाय फलाकत्रादि कशाय का सेवन इसमें फायदा मिलता है।
डॉ. जायसवाल के अनुसार डायबिटीज में विशेष रूप से दूध तथा दूध के अन्य विकार (पनीर इत्यादि) तथा दही आदि भी कम मात्रा में और जहां तक संभव हो दोपहर से पहले लेने चाहिए। फिर भी डायबिटीज नियंत्रित नहीं हो रहा है तो डाक्टर की सलाह लेनी चाहिए।

उन्होंने बताया कि हम एलोपैथिक दवाओं का सेवन कर रहे हैं तो निगरानी जरूरी होती है क्योंकि शरीर में प्रतिक्रियाएं बढ़ जाती हैं। ऐसे में हमें एलोपैथिक दवाओं की डोज कम करने की आवश्यकता होती है।

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सुप्रीम कोर्ट की शरण में पहुंचे गिरफ्तारी की आशंका से डरे अर्नब, कोर्ट ने दी राहत

उच्चतम न्यायालय ने बेहद आक्रामक अंदाज में राजनेताओं पर आरोप लगाने के आरोपी टीवी कार्यक्रम प्रस्तोता अर्नब गोस्वामी के खिलाफ कांग्रेस शासित राज्यों में दर्ज 16 एफआईआर के आधार पर अर्नब की गिरफ्तारी पर रोक लगा दी है।
न्यायमूर्ति डीवाई चंद्रचूड़ और न्यायमूर्ति एम आर शाह की खंडपीठ ने वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए सुनवाई के दौरान अर्नब की याचिका पर सभी छह राज्य सरकारों को नोटिस जारी किये। न्यायालय ने अर्नब को अपनी याचिका में संशोधन की अनुमति दी तथा सभी प्राथमिकियों और शिकायतों को अपनी याचिका में शामिल करने का निर्देश दिया। इस बीच वह अग्रिम जमानत याचिका दायर कर सकते हैं। शीर्ष अदालत ने मुंबई पुलिस आयुक्त को निर्देश दिया कि वह वहां रिपब्लिक टीवी के कार्यालय और कर्मचारियों की सुरक्षा मुहैया करायें।

गोस्वामी की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता मुकुल रोहतगी ने कहा कि उनके मुवक्किल ने अपने टीवी प्रोग्राम में पालघर की घटना में पुलिस के गैर-जिम्मेदाराना रवैये पर सवाल खड़े किए। रोहतगी ने कहा कि पालघर में 12 पुलिसकर्मियों की मौजूदगी में 200 लोगों की भीड़ ने दो साधुओं की हत्या कर दी, किसी ने पूरी वारदात की वीडियो बना ली, पर दु:ख की बात यह है कि पुलिस मूकदर्शक बनी रही कि मानो इस अपराध में उनकी मिलीभगत हो। रोहतगी ने दलील दी कि उनके मुवक्किल ने कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी की खामोशी पर सवाल खड़े किए थे कि मरने वाले अगर अल्पसंख्यक समुदाय के होते तो क्या तब भी वह खामोश रहती। उन्होंने दलील दी कि कांग्रेस के लोगों ने एक ही मामले में कई राज्यों में मुकदमे दर्ज करवाए, जो राजनीति से प्रेरित हैं। उन्होंने सभी प्राथमिकी रद्द करने की मांग भी की। महाराष्ट्र सरकार की ओर से पेश वकील कपिल सिब्बल ने दलील दी कि इस समय पूरा देश कोरोना संकट से जूझ रहा है और ऐसे में अर्नब देश में दो समुदायों के बीच उन्माद और हिंसा भड़काने की कोशिश में लगे हैं। अर्नब न्यूज चैनल को मिले लायसेंस का दुरूपयोग कर रहे हैं। न्यूज चैनल के नाम पर किसी को कुछ भी बोलने की इजाजत नहीं दी जा सकती है, अर्नब ने ब्रॉडकास्ट लाइसेंस का उल्लंघन कर सम्प्रदायिक उन्माद फैलाया।

सिब्बल ने कहा कि अभी तो एफआईआर दर्ज हुई है

सिब्बल ने कहा कि अभी तो एफआईआर दर्ज हुई है, पुलिस जांच करेगी और हो सकता है कि कई और धाराएं जोड़ी जाएं, कई धाराएं ग़ैर जमानती हैं, इस स्टेज पर आरोपी प्राथमिकी निरस्त करने की मांग कैसे कर सकते हैं। अवमानना के एक मामले में राहुल गांधी निचली अदालत में पेश होते हैं, जबकि अर्नब को अदालत में पेश होने में दिक्कत महसूस होती है। याचिकाकर्ता को आखिर ये छूट क्यों मिलनी चाहिए? कपिल सिब्बल ने कहा कि अगर कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने अर्नब के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराई है, तो उसमें दिक्कत क्या है। राहुल गांधी ने भी भारतीय जनता पार्टी के कार्यकर्ताओं की ओर से दायर मानहानि के मुकदमों को झेला है। इस पर रोहतगी ने कहा कि राहुल गांधी राजनीतिक दल के नेता हैं लेकिन अर्नब राजनेता नहीं हैं और उन्होंने जो मामला उठाया है वह अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और प्रेस की आजादी का मामला है। रोहतगी ने कहा कि अर्नब के खिलाफ कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने जो मामले दर्ज किये हैं, उनमें छत्तीसगढ़, राजस्थान और महाराष्ट्र कांग्रेस शासित प्रदेश हैं। खास बात यह है कि अर्नब के बयान से कथित तौर पर जिसकी मानहानि हुई है, दरअसल में उसे ही शिकायत करना चाहिए था, लेकिन इन मामलों में ऐसा नहीं हुआ है और एक जैसे ही 16 प्राथमिकियां दर्ज करायी गयी हैं। राजस्थान सरकार की ओर से मनीष सिंघवी और छत्तीसगढ़ की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता विवेक तन्खा पेश हुए। तन्खा ने न्यायालय से अर्नब को इस तरह के बयान से प्रतिबंधित करने की मांग की, लेकिन न्यायमूर्ति चंद्रचूड़ ने कहा कि वह खुद भी मीडिया पर प्रतिबंध के खिलाफ हैं।

नागपुर में दायर एफआईआर मुंबई स्थानांतरित

इसके बाद न्यायालय ने पहले तो अर्नब को दो सप्ताह की राहत के संकेत दिये, लेकिन आदेश लिखवाते वक्त रोहतगी के आग्रह पर उन्होंने इसे तीन सप्ताह कर दिया। न्यायमूर्ति चंद्रचूड़ ने मुंबई स्थित रिपब्लिक टीवी कार्यालय की सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम के लिए पुलिस आयुक्त को निर्देश दिया तथा नागपुर में दायर प्राथमिकी को मुंबई स्थानांतरित कर दिया। अर्नब ने महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, तेलंगाना, छत्तीसगढ़, राजस्थान और जम्मू एवं कश्मीर में उनके खिलाफ दर्ज 16 प्राथमिकियों के आधार पर किसी तरह की दंडात्मक कार्रवाई पर रोक की मांग को लेकर शीर्ष अदालत का दरवाजा खटखटाया है। गौरतलब है कि कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के खिलाफ कथित तौर पर अभद्र टिप्पणी करने और नफरत फैलाने वाले बयान देने के आरोप में गोस्वामी के खिलाफ इन छह राज्यों में कुल 16 प्राथमिकियां दर्ज करायी गयी हैं। अर्नब ने अपनी याचिका में प्राथमिकियों के आधार पर कोई भी दंडात्मक कार्रवाई किये जाने से पुलिस प्रशासन को रोकने और इन प्राथमिकियों को निरस्त करने की मांग की है। अर्नब और उनकी पत्नी पर परसों रात ड्यूटी से घर लौटते वक्त कुछ लोगों ने हमले भी किये थे। जिसके बाद उन्होंने मुंबई के एक पुलिस स्टेशन में प्राथमिकी भी दर्ज करायी है।

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लॉकडाउन में पोषण विशेषज्ञों की सलाह: झाड़ू-पौंछा और बर्तन साफ करके कैलोरी बर्न करें मर्द

पोषण विशेषज्ञों ने देशव्यापी लॉकडाउन के चलते घरों में घुसकर बैठे मर्दों को झाड़ू-पौंछा और बर्तन साफ करके कैलोरी बर्न करने की सलाह दी है। विशेषज्ञों का मानना है कि घरेलू काम से कैलोरी बर्न करने के साथ ही वजन को भी नियंत्रण में रख सकते हैं।

इस तरह मांजें बर्तन

पोषण विशेषज्ञों के अनुसार घरबंदी में बैठे मर्दों को प्रतिदिन 1800 से 1900 कैलोरी की आवश्यकता है। यदि ऊर्जा की खपत नहीं करेंगे तो वजन बढऩा लाजिमी है। इसलिए कुछ न कुछ काम करते रहना चाहिए ताकि ऊर्जा की खपत हो। हांथ से कपड़े धोने के बाद तह कर रखते हैं तो आप 1 घंटे में 148 कैलोरी बर्न कर सकते हैं। इसी तरह आप हाथों से बर्तन साफ कर 128 कैलोरी बर्न कर सकते हैं। कपड़े प्रेस करते हैं तो 80 कैलोरी बर्न होती है। घर में झाड़ू लगाने में लगभग 156 कैलोरी, पोंछा लगाने में 170 कैलोरी व बिस्तर लगाने में आपकी 70 कैलोरी खर्च होती है। रोजमर्रा के ये काम व्यक्ति को स्वस्थ रखने में योगदान देते हैं। कार धोने में 314, डस्टिंग करने में 166 कैलोरी बर्न होती है।

लॉन में टहल कर करें मेडिटेशन

पोषण विशेषज्ञों का कहना है कि कोरोना संकट से हुई बंदी के कारण शारीरिक गतिविधियां बहुत सीमित हैं, लेकिन घबराने की जरूरत नहीं है। योगा, व्यायाम, अपनी छतों या लान में टहलकर मेडिटेशन कर सकते हैं इससे तनाव के साथ ही वजन नियंत्रण में रहेगा।

भोजन में शामिल करें नींबू पानी व रसीले फल

विशेषज्ञों के मुताबिक सबसे पहले यह आवश्यक है कि हम अपनी दिनचर्या नियमित करें। ऐसा न हो कि हम घर पर हैं तो न हमारे खाने का समय निश्चित है और न ही सोने व जागने का। हमें सुबह का नाश्ता 8 से साढ़े आठ बजे तक कर लेना चाहिए व रात का खाना सोने से कम से कम 3 घंटे पहले करना चाहिए। 2 मील के बीच कम से से कम 2 से 3 घंटे का अंतर रखना चाहिए। गर्मी का मौसम आ गया है इसलिए पानी का अधिक से अधिक सेवन करें। नींबू पानी व रसीले फलों को भोजन में शामिल करें। शरीर में पानी की कमी न होने दें। भोजन में इम्युनिटी बढ़ाने वाले खाद्य पदार्थों को शामिल करें।

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शोध से सामने आई असलियत, कोरोना मरीजों को हाइड्रॉक्सीक्लोरोक्वीन देने से बढ़ जाता है मौत का खतरा!

अपने अडियल रुख के लिए प्रसिद्ध अमेरिकी राष्ट्रपति को तब शर्मिंदगी का सामना करना पड़ा जब उनके देश के ही एक हैल्थ इंस्टीट्यूट में भर्ती मरीजों पर किए गए अध्ययन में साफ हो गया कि जिस हाइड्रॉक्सीक्लोरोक्वीन को वे रामबाण दवा बता रहे थे, उससे उल्टे मरीजों की मौत होने का जोखिम ज्यादा हो गया। शोध में पता चला है कि कोरोनावायरस के मरीजों के इलाज में यह दवा फायदेमंद साबित नहीं हुआ है। मेडआर्काइव के प्रीप्रिंट रिपोजिटरी में प्रकाशित निष्कर्षों के अनुसार, उन लोगों की मौत होने का जोखिम ज्यादा बढ़ गया,जिनका इलाज हाइड्रॉक्सीक्लोरोक्वीन से किया गया था। अध्ययन के लिए, शोधकर्ताओं ने 11 अप्रैल तक अमेरिका के ‘वेटरन्स हेल्थ एडमिनिस्ट्रेशन मेडिकल सेंटर कन्फर्म सार्स कोविड-2 संक्रमण के साथ अस्पताल में भर्ती रोगियों के डेटा का विश्लेषण किया।

मरीजों को सिर्फ हाइड्रॉक्सीक्लोरोक्वीन (एचसी) या एंटीबायोटिक एजिथ्रोमाइसिन (एचसी प्लस एजी) के साथ देने के आधार पर कोविड-19 के लिए मानक सहायक प्रबंधन के अलावा उपचार के रूप में वर्गीकृत किया गया था। कुल 368 मरीजों का मूल्यांकन किया गया। जिन्हें सिर्फ हाइड्रॉक्सीक्लोरोक्वीन दिया गया था उस समूह में मृत्यु की दर 27.8 प्रतिशत थी।

हाइड्रॉक्सीक्लोरोक्वीन और एजिथ्रोमाइसिन समूह में मृत्यु की दर 22.1 प्रतिशत थी और हाइड्रॉक्सीक्लोरोक्वीन नहीं देने पर यह 11.4 प्रतिशत से भी कम था। शोधकर्ताओं ने पाया कि नो एचसी ग्रुप की तुलना में एचसी ग्रुप में और एचसी प्लस एजी समूह में वेंटिलेशन का जोखिम समान था। अध्ययन में कोई सबूत नहीं मिला कि हाइड्रॉक्सीक्लोरोक्वीन का इस्तेमाल अकेले या तो एजिथ्रोमाइसिन के साथ करने पर अस्पताल में भर्ती कोविड-19 रोगियों में मैकेनिकल वेंटिलेशन का जोखिम कम रहता है।

कोविड-19 के रोगियों के इलाज में हाइड्रॉक्सीक्लोरोक्वीन के इस्तेमाल को लेकर सीमित और परस्पर विरोधी आंकड़ों के बावजूद, अमेरिका के फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन ने इस दवा के आपातकालीन उपयोग को ऐसी स्थिति के लिए अधिकृत कर दिया है, जब नैदानिक परीक्षण अनुपलब्ध या अव्यवहार्य हो।

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कोरोना से पहले आई इन पांच महा​मारियों ने बदल दिया था दुनिया का इतिहास

कोरोना वायरस प्रकोप पूरी दुनिया में उसी तरह के बदलाव ला रहा है जिस तरह इससे पहले की पांच महामारियों ने विश्व इतिहास को बदलकर रख दिया था। तकरीबन छह सौ साल के ज्ञात इतिहास में पांच महामारियों ने राजनीतिक और सामाजिक बदलावों के साथ ही पूरे विश्व को कुछ देशों की गुलामी में धकेल दिया था। तारीख़ के पन्ने महामारियों के इतिहास बदलने की मिसालों से भरे पड़े हैं। बीमारियों की वजह से सल्तनतें तबाह हो गईं। चौदहवीं सदी के पांचवें और छठें दशक में प्लेग ने यूरोप में मौत का दिल दहलाने वाला तांडव किया था। इसके क़हर से यूरोप की एक तिहाई आबादी काल के गाल में समा गई थी। ब्लैक डेथ यानी ब्यूबोनिक प्लेग से इतनी बड़ी संख्या में लोगों की मौत के कारण, खेतों में काम करने के लिए उपलब्ध लोगों की संख्या बहुत कम हो गई।

 

महामारियों ने दिया था मजदूरी प्रथा को जन्म

इस बदलाव ने मज़दूरी पर काम करने की प्रथा को जन्म दिया। जिसके कारण पश्चिमी यूरोप ज़्यादा आधुनिक, व्यापारिक और नक़दी आधारित अर्थव्यवस्था की ओर बढ़ चला। चूंकि ज़मींदारों के लिए मज़दूरों की मज़दूरी देना महंगा पड़ रहा था। इसी मजबूरी ने उन्हें ऐसी तकनीक में निवेश करने के लिए बाध्य किया, जिसमें ख़र्च कम लगे। मज़दूरों की कम ज़रूरत हो और काम पूरा हो जाए। ताकि लागत कम कर के पैसा बचाया जा सके। यहीं से पश्चिमी यूरोपीय देशों ने साम्राज्यवाद की शुरुआत की। यूरोप के लोगों ने लंबी समुद्री यात्राएं शुरू कर दीं। लिहाज़ा कहा जा सकता है कि प्लेग के बाद पश्चिमी यूरोप में नई ऊर्जा आई। यूनिवर्सिटी कॉलेज ऑफ़ लंदन के वैज्ञानिकों ने एक अध्ययन में पाया कि यूरोप के विस्तार के बाद अमेरिका की क़रीब छह करोड़ (जो उस वक़्त दुनिया की कुल आबादी का दस फ़ीसद हिस्सा थी) की आबादी केवल एक सदी में घट कर महज़ साठ लाख रह गई। अमरीका में यूरोपीय उपनिवेश स्थापित होने के बाद के बाद इन इलाक़ों में होने वाली अधिकतर मौतों के लिए वो बीमारियां ज़िम्मेदार थीं, जो ये उपनिवेशवादी अपने साथ लेकर अमरीका पहुंचे। इनमें सबसे बड़ी बीमारी थी चेचक। अन्य बीमारियों में ख़सरा, हैज़ा, मलेरिया, प्लेग, काली खांसी, और टाइफ़स भी शामिल थीं, जिन्होंने करोड़ों लोगों की जान ले ली। कैरेबियाई देश हैती में एक महामारी के प्रकोप ने उस समय की बड़ी साम्राज्यवादी ताक़त फ्रांस को उत्तरी अमरीका से बाहर करने में बहुत बड़ी भूमिका निभाई थी। और इसी के बाद अमरीका का एक बड़े और ताक़तवर देश के तौर पर विकास हुआ था। और वो महाशक्ति बनने की दिशा में आगे बढ़ चला था।

 

नेपोलियन के सैनिकों को खा गया था पीला बुखार

1801 में कैरेबियाई देश हैती में यूरोप की औपनिवेशिक ताक़तों के ख़िलाफ़ यहां के बहुत से ग़ुलामों ने बग़ावत कर दी। एक के बाद एक कई बग़ावतों के बाद आख़िरकार तुसैंत लोवरतूर का फ़्रांस के साथ समझौता हो गया और वो हैती का शासक बन गया। उधर, फ्रांस में नेपोलियन बोनापार्ट ने ख़ुद को आजीवन देश का शासक घोषित कर दिया था। नेपोलियन ने पूरे हैती द्वीप पर अपना क़ब्ज़ा जमाने की सोची। लिहाज़ा उसने हैती पर कब्ज़ा जमाने के लिए दसियों हज़ार सैनिकों को वहां लड़ने के लिए भेज दिया। फ़्रांस से आए ये लड़ाकू जंग के मैदान में तो बहुत बहादुर साबित हुए। लेकिन पीत ज्वर या येलो फ़ीवर के प्रकोप से ख़ुद नहीं बचा पाए। एक अंदाज़े के मुताबिक़ फ़्रांस के क़रीब पचास हज़ार सैनिक, अधिकारी, डॉक्टर इस बुखार के चपेट में आकर मौत के मुंह में समा गए। हैती पर क़ब्ज़े के लिए गए फ्रांसीसी सैनिकों में से महज़ तीन हज़ार लोग ही फ़्रांस लौट सके।

 

प्लेग से फैली भुखमरी ने बदल दिया चीन का इतिहास

इस हार ने नेपोलियन को ना सिर्फ़ हैती का उपनिवेश छोड़ने पर मजबूर किया। बल्कि, नेपोलियन ने उत्तरी अमरीका में फ्रांस के औपनिवेशिक विस्तार के अपने ख़्वाब को भी तिलांजलि दे दी। 1888 और 1897 के दरमियान राइंडरपेस्ट नाम के वायरस ने अफ़्रीक़ा में लगभग 90 फ़ीसद पालतू जानवरों को ख़त्म कर दिया। इसे जानवरों में होने वाला प्लेग भी कहा जाता है। इतने बड़े पैमाने पर जानवरों की मौत से हॉर्न ऑफ़ अफ्रीका, पश्चिमी अफ्रीका और दक्षिणी-पश्चिमी अफ्रीका में रहने वाले बहुत से समुदायों पर क़यामत सी आ गई। भुखमरी फैल गई। चूंकि लोग खेती के लिए बैलों का इस्तेमाल करते थे तो जब बैल ही नहीं रहे तो खेती भी ख़त्म होने लगी। अफ़्रीक़ा के ऐसे बदतर हालात ने उन्नीसवीं सदी के आख़िर में यूरोपीय देशों के लिए अफ्रीका के एक बड़े हिस्से पर अपने उपनिवेश स्थापित करने का माहौल तैयार कर दिया। यूरोपीय देशों को अफ्रीका की ज़मीनें हड़पने में राइंडरपेस्ट वायरस के प्रकोप से भी काफ़ी मदद मिली। वर्ष 1641 में उत्तरी चीन में प्लेग जैसी महामारी ने हमला बोला, जिसके कारण बड़ी संख्या में लोगों की जान चली गई थी। कुछ इलाक़ो में तो प्लेग की वजह से 20 से 40 फ़ीसद तक आबादी ख़त्म हो गई थी। चीन में प्लेग ने उस वक़्त दस्तक दी थी, जब वो सूखे और टिड्डियों के प्रकोप से जूझ रहा था। फ़सलें तबाह हो चुकी थी। लोगों के पास खाने को अनाज नहीं था। हालात इतने बिगड़ गए थे कि जब लोगों के पास खाने को कुछ नहीं होता था तो वो प्लेग, भुखमरी और सूखे से मर चुके लोगों की लाश को ही नोच खाने लगे थे।

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वुहान के वायरस का सगा भाई है भारत में बीमार कर रहा वायरस

Wuhan Corona virus:

भारत में कोरोना फैला रहे Sars-Cov-2 वायरस की पहली तस्वीर पुणे के वैज्ञानिकों ने ट्रांसमिशन इलेक्ट्रोन माइक्रोस्कोप इमेजिंग का प्रयोग करते हुए ली हैं और इन्हें इंडियन जर्नल ऑफ मेडिकल रिसर्च में प्रकाशित किया गया है। भारत में कोरोना वायरस की पहली मरीज के सैंपल से ये तस्वीरें ली गई हैं। इनमें कांटों के ताज जैसे दिखने वाले Sars-Cov-2 को देखा जा सकता है। Wuhan Corona virus:

 

केरल छात्रा के गले के सैंपल की जांच से निकला निष्कर्ष

वैज्ञानिकों ने 30 जनवरी को कोरोना वायरस से संक्रमित पाई गई केरल की छात्रा के गले से लिए सैंपल का प्रयोग किया था। केरल की इस छात्रा को 30 जनवरी को कोरोना वायरस से संक्रमित पाया गया था, ये छात्रा कोरोना वायरस के केंद्र रहे चीन के वुहान शहर से वापस लौटी थी। तस्वीरों से पता चलता है कि Sars-Cov-2 वायरस 2002 में SARS बीमारी और 2012 में MERS बीमारी पैदा करने वाले कोरोना वायरसों से मिलता है। Wuhan Corona virus:

कांटेदार ताज से ​घिरा है वायरस

भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद (ICMR) की पूर्व महानिदेशक डॉ निर्मल के गांगुली के अनुसार “कोरोना वायरस एक ताज जैसा होता है और इसकी सतह पर मिलने वाले कांटों से इसे ये नाम मिला है, क्योंकि लैटिन में कोरोना का मतलब ताज होता है। वे विकसित होकर कई तरह के रिसेप्टर्स को पहचानने लग गए हैं। किस रिसेप्टर से जुड़ना है इसकी पहचान करने के बाद उसके साथ विलय करके ये कोशिका में दाखिल होता है। Wuhan Corona virus:

वायरस जानवरों से इंसानों में कैसे आया

ये तस्वीरें क्लीनिकल सैंपलों में म्यूटेसन समझने और वायरस के इवॉस्युशन और आनुवंशिक उत्पत्ति की पहचान करने के लिए महत्वपूर्ण हैं। इसमें हमें ये समझने में मदद मिलेगी कि वायरस जानवरों से इंसानों में कैसे आया, कैसे एक इंसान से दूसरे इंसान में प्रसार शुरू हुआ और क्या ये अभी भी म्यूटेट कर रहा है। Wuhan Corona virus:

छात्रा के गले से लिए गए सैंपल में एक वायरस बहुत अच्छी तरह से संरक्षित था और कोरोना वायरस जैसे फीचर्स दिखा रहा था, जिसके बाद उसे अलग करके उसकी तस्वीरें ली गईं। Wuhan Corona virus:

वुहान के वायरस जैसी जेनेटिक संरचना

केरल की छात्रा के सैंपल में पाए गए कोरोना वायरस चीन के वुहान में पाए गए कोरोना वायरस से जेनेटिक तौर पर 99.98 प्रतिशत मिलता है।
उल्लेखनीय है कि भारत में अब तक कोरोना वायरस के 724 मामले सामने आ चुके हैं जबकि 17 लोगों की इसकी वजह से मौत हो चुकी है। महाराष्ट्र में सबसे अधिक चार लोगों की इसकी वजह से जान गंवानी पड़ी है। वहीं गुजरात में तीन, कर्नाटक में दो, दिल्ली, बिहार, हिमाचल प्रदेश, मध्य प्रदेश, पंजाब, तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल में एक-एक शख्स की मौत हुई है। Wuhan Corona virus:

 

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Violence in delhi: यहां से लाए गए थे दिल्ली में हथियार, कई सालों से नुकीले हथियारों की खेप की आपूर्ति

Violence in delhi:  दिल्ली में रविवार से शुरू हुई हिंसा में 38 लोगों की मौत हो चुकी है और 200 से ज्यादा घायल हैं। घायलों का इलाज गुरु तेग बहादुर (GTB) और जग प्रवेश चंद्र अस्पताल में चल रहा है। घायलों को गोली लगने, तेज धार हथियार, लोहे की रॉड, झुलसने और भारी चीजों से मारने के कारण चोटें आई हैं। 14 लोगों की मौत गोली लगने से हुई है।


सांप्रदायिक हिंसा को देखने वाले लोगों के अनुसार भीड़ देसी कट्टे, तलवार, हथौड़े, दरांती, बेसबॉल बैट, डंडे और बड़े-बड़े पत्थर हाथ में लेकर घूम रही थी। हिंसा के दौरान इस्तेमाल किए गए देसी कट्टे पश्चिमी उत्तर प्रदेश के इलाकों से दिल्ली लाए गए थे। भीड़ में शामिल नकाब पहने लोगों ने बताया कि वो शामली और मुजफ्फरनगर से आए हैं।

Violence in delhi:  जाफराबाद में तैनात एक पुलिस अधिकारी ने बताया कि अगर हिंसा के पहले दिन ही उत्तर प्रदेश से लगती दिल्ली की सीमा को सील कर दिया जाता तो हालात इतने खराब नहीं होते। हिंसा के 40 घंटे बाद यह काम किया गया। दिल्ली में बंदूकों की फैक्ट्री नहीं है। यहां जितने भी गैर-कानूनी पिस्तौल इस्तेमाल हुए हैं सब बाहर से तस्करी कर लाए गए हैं।

आसानी से उपलब्ध हैं देसी कट्टे

Violence in delhi:  पिछले साल दिसंबर में दिल्ली पुलिस ने एक मामले का पर्दाफाश किया था, जिसमें पता चला कि मेरठ, शामली और मुजफ्फरनगर जैसे पश्चिमी उत्तर प्रदेश के इलाकों में देसी कट्टे महज 3,000-5,000 रुपये में मिल जाते हैं।
बंदूकों के अलावा दंगाई पत्थरों का भी इस्तेमाल कर रहे थे। हिंसा में शहीद हुए दिल्ली पुलिस के हेड कॉन्स्टेबल रतनलाल को भी पत्थर से चोट लगी थी। लेकिन उनकी मौत गोली लगने से हुई थी। DCP अमित शर्मा को भी पत्थर लगने से सिर में गंभीर चोट आई है। फिलहाल वो अस्पताल में भर्ती हैं। भीड़ ने कई घरों पर भी पत्थरबाजी कर नुकसान पहुंचाया।

ट्रक में भरकर लाए गए थे पत्थर

मौजपुर में रहने वाले एक निवासी ने बताया, रविवार रात को यहां ट्रक में भरकर पत्थर लाए गए थे। ये लोग बाहर से आए थे। उनके वीडियो रिकॉर्ड किए हैं। सोच-समझकर हमला किया गया था। न्यू जाफराबाद रोड पर दंगाइयों ने कंक्रीट से बने डिवाइडर को तोड़ दिया और इसके लिए पत्थर और इसमें लगाई गई लोहे की रॉड को हथियारों के रूप मेें इस्तेमाल किया। दंगाइयों ने पेट्रोल बम और तलवारों की भी इस्तेमाल किया था। चांद बाग में भीड़ ने पेट्रोल बमों का भरपूर इस्तेमाल किया। पुलिस का मानना है कि दंगाइयों ने कबाड़ियों के पास से खाली बोतलें उठाई और इनमें पेट्रोल भरा। हिंसा में कम से कम तीन लोगों की झुलसने से मौत हुई है। सोशल मीडिया पर भी कई वीडियो वायरल हुए थे, जिनमें देखा जा सकता था कि दंगाई मोटरसाइकिल पर बैठकर हथियार लहराते हुए सड़कों पर घूम रहे थे।

नुकीले हथियारों का इस्तेमाल आम

दिल्ली पुलिस में तीन दशक से ज्यादा समय तक काम कर चुके पूर्व DCP एलएन राव ने बताया कि जिस इलाके में हिंसा हुई वहां की ज्यादातर युवा आबादी बेरोजगार है। उत्तर-पूर्वी दिल्ली के कई इलाकों के युवा अपराधिक गतिविधियों में शामिल रहते हैं और लोगों को लूटने के लिए चाकू और ब्लेड का इस्तेमाल आम है। लोग अपने घरों में पत्थर, कांच की खाली बोतलें और ईंट जमा कर रखते हैं।

पुलिस ने दर्ज की 18 FIR

पुलिस ने अभी तक 18 FIR दर्ज की है और 106 लोगों को गिरफ्तार किया है। इनसे पूछताछ में यह भी पता लगाया जाएगा कि वो हथियार कहां से लाए थे।

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This palm seed is the reason for the death of the oilmen of the country: देश के तेलियों की मौत की वजह है ताड़ का ये बीज

This palm seed is the reason for the death of the oilmen of the country:विदेशी तेल की वजह से देश के तेली समाज के अस्तित्व पर संकट खड़ा हो गया है। इसका कारण है वह पॉम आॅयल जिसके आयात का भारत ने 1995 में मलेशिया से समझौता किया। यह तेल इतना सस्ता था कि देश के तेली तो दूर, बड़े मिल मालिक भी इसका सामना नहीं कर सके और उन्हें अपनी मिल बंद करनी पड़ीं।

This palm seed is the reason for the death of the oilmen of the country: खाद्य तेल, उन वस्तुओं में शामिल है, जिसका भारत में तेजी से आयात बढ़ा है। जनवरी 1995 में भारत, विश्व व्यापार संगठन (डब्ल्यूटीओ) में शामिल हुआ था। इसके बाद भारत ने कई देशों के साथ व्यापारिक समझौते किए। इसमें से एक देश है, मलेशिया। जहां से खाद्य तेल के आयात की शुरुआत हुई और तब से लेकर अब तक देश में खाद्य तेल के आयात के लिए लाइसेंस नहीं लेना होता है।

This palm seed is the reason for the death of the oilmen of the country: कृषि विभाग की रिपोर्ट के मुताबिक भारत में सभी खाद्य तेलों का आयात होता है। अकेले ताड़ का तेल (पाम ऑयल) कुल खपत का लगभग 60 फीसदी आपूर्ति आयात से होती है। अभी भारत अर्जेंटीना और ब्राजील से सोयाबीन तेल, इंडोनेशिया और मलेशिया से पाम ऑयल और यूक्रेन व अर्जेंटीना से सूरजमुखी का तेल आयात कर रहा है। पाम ऑयल के आयात में भारत दुनिया में सबसे आगे हैं।

This palm seed is the reason for the death of the oilmen of the country: भारत ने 2018 में 88.1 लाख टन पाम ऑयल आयात किया था। उसके बाद चीन का नंबर आता है, जिसने 2018 में 53.3 लाख टन पाम ऑयल आयात किया। यहां यह उल्लेखनीय है कि वर्तमान में खाद्य तेल के महंगे होने का बड़ा कारण पाम ऑयल की कीमतें बढ़ना बताया जा रहा है। पाम ऑयल के दामों में बीते दो माह में 35 फीसदी से अधिक की तेजी आई है। देश के बाजारों में पाम तेल का दाम करीब 20 रुपए प्रति किलो बढ़ा है। वहीं, पिछले दिनों हुई भारी बारिश के कारण सोयाबीन की फसल खराब हुई है, इसलिए सोया तेल के आयात की भी संभावना है, जबकि सोया तेल निर्यात करने वाले देश अर्जेंटीना ने निर्यात शुल्क 25 फीसदी से बढ़ा कर 35 फीसदी कर दिया है। इससे सोया तेल के महंगे होने की भी आशंका जताई जा रही है।

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Border Security Force (BSF) Recruitment 2020: सीमा सुरक्षा बल में कांस्टेबल और सब इंस्पेक्टरों की होगी भर्ती

BSF Recruitment 2020: सीमा सुरक्षा बल (BSF) ने सब इंस्पेक्टर (SI) और कॉन्स्टेबल के पदों के लिए आवेदन मांगे हैं। इंडियन आर्मी भी आपको नौकरी देने को तैयार है। उम्मीदवार ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों माध्यम से आवेदन कर सकते हैं। Border Security Force (BSF) Recruitment 2020:

 

आवेदन की तिथियां

BSF भर्ती 2020 के लिए ऑनलाइन आवेदन 16 मार्च, 2020 तक किए जा सकते हैं। BSF ने 317 पदों पर भर्ती के लिए आवेदन आमंत्रित किए हैं।
आवेदक को कान्स्टेबल पद के लिए 200 रुपये और SI के लिए आवेदन करने हेतु 100 रुपये फीस देनी होगी। साथ ही भर्ती के लिए लिखित परीक्षा देनी होगी। Border Security Force (BSF) Recruitment 2020:

ये कर सकते हैं आवेदन

सभी पदों के लिए शैक्षिक योग्यता अलग-अलग है। किसी भी पद के लिए आवेदन करने के लिए उम्मीदवार का 10वीं पास होना बहुत जरुरी है। उम्मीदवार की आयु 20-28 वर्ष के बीच होनी चाहिए। पात्रता की अधिक जानकारी नीचे दिए गए लिंक से हासिल करें। Border Security Force (BSF) Recruitment 2020:

ऐसे करें आवेदन

आवेदक को आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर होम पेज पर इस भर्ती के लिए दिए गए लिंक पर क्लिक करना होगा। क्लिक करते ही आपके सामने आधिकारिक अधिसूचना खुलेगी। उसमें सभी पदों के लिए अलग-अलग आवेदन फॉर्म दिए गए हैं। उम्मीदवार को जिस पद के लिए आवेदन करना है उस पद के आवेदन फॉर्म को डाउनलोड करके सही तरह से भरकर भेजना होगा। Border Security Force (BSF) Recruitment 2020:

इस लिंक पर ​करें क्लिक तो मिलेगी पूरी जानकारी 

भर्ती आवेदन पत्र प्राप्त करने के लिए उम्मीदवार यहां क्लिक करें।

http://bsf.nic.in/doc/recruitment/r0118.pdf

इंडियन आर्मी करेगी भर्ती

इंडियन आर्मी ने विभिन्न पदों पर भर्ती निकाली है। इंडियन आर्मी रैली भर्ती झारखण्ड के लिए ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया 20 मार्च, 2020 तक चलेगी। किसी मान्यता प्राप्त बोर्ड से 10वीं पास उम्मीदवार आवेदन करने के पात्र हैं। भर्ती के लिए उम्मीदवारों को ऑनलाइन आवेदन करना होगा। Border Security Force (BSF) Recruitment 2020:

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Maha Shivratri poranik katha 2020: एक हजार बेलपत्र चढ़ाने का क्या है महातम्य, इस पौराणिक कथा से जानिए

Maha Shivratri parv 2020:  महाशिवरात्रि के दिन भगवान शिव व माता पार्वती के विवाह का उत्सव मनाया जाता है। इस दिन बेलपत्र, धतूरा, दूध, दही, शर्करा से शिव का अभिषेक करने से इच्छा पूरी होती है। इस बार महाशिवरात्रि 21 फरवरी को है। महाशिवरात्रि 21 फरवरी 2020 को शाम को 5 बजकर 16 मिनट से शुरू होकर अगले दिन यानी 22 फरवरी दिन शनिवार को शाम 07 बजकर 9 मिनट तक रहेगी। ये है इस व्रत विवरण।

बेलपत्र, धतूरा, दूध, दही, शर्करा से भगवान शिव का अभिषेक करने से मनवांछित इच्छा पूरी होती है।

Maha Shivratri poranik katha 2020: 

Maha Shivratri parv 2020:  पौराणिक कथा के अनुसार एक आदमी शिव का परम भक्त था, एक बार जंगल में भटक गया। बहुत रात हो चुकी थी क्योंकि वह जंगल में काफी अंदर चला गया था इसलिए जानवरों के डर से एक पेड़ पर चढ़ गया। लेकिन उसे डर था कि अगर वह सो गया तो गिर जाएगा और जानवर उसे खा जाएंगे। इसलिए जागते रहने के लिए वह रात भर शिवजी नाम ले के पत्तियां तोड़ के गिराता रहा।

Maha Shivratri parv 2020: जब सुबह हुई तो उसने देखा कि उसने रात में हजार पत्तियां तोड़ कर शिव लिंग पर गिराई हैं, जिस पेड़ की पत्तियां वह तोड़ रहा था वह बेल का पेड़ था। अनजाने में वह रात भर शिव की पूजा कर रहा था जिससे खुश हो कर शिव ने इच्छाएं पूरी होने का वरदान दिया था।  Maha Shivratri parv 2020: