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सेना ने बना रखी है बंधुआ मजदूरों से बुरी हालत, अब आईटीबीपी की शरण में जाएंगे!

पूर्व अर्द्धसैनिक कल्याण संगठन ने असम राइफल्स का भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (आईटीबीपी) में विलय करने के प्रस्ताव का समर्थन करने हुए कहा है कि इससे असम राइफल्स की प्रशासनिक और व्यावहारिक अड़चनें कम होंगी और यह अपनी नियत जिम्मेदारी काे बेहतर ढंग से पूरा कर सकेगा।

कल्याण संगठन के राष्ट्रीय संयोजक किरण पाल सिंह के नेतृत्व में केंद्रीय गृह राज्य मंत्री जी. किशन रेड्डी से मिले एक प्रतिनधिमंडल ने कहा कि असम राइफल्स का नियंत्रण गृह मंत्रालय के पास आने से कई तरह की प्रशासनिक अड़चनों का निवारण हो जाएगा। असम राइफल्स का ऑपरेशनल नियंत्रण सेना के अधीन है। प्रतिनिधिमंडल ने कल देर शाम केंद्रीय गृह राज्य मंत्री से मुलाकात की। रेड्डी ने प्रतिनिधिमंडल को उसकी मांगों पर सकारात्मकता से विचार करने का आश्वासन दिया।

मीडिया के अनुसार सरकार असम राइफल्स को आईटीबीपी में मिलाने और इसे पूरी तरह से गृह मंत्रालय के अधीन करने पर विचार कर रही है। इस संबंध में जल्दी ही उच्च स्तर पर विचार किया जाना प्रस्तावित है।प्रतिनिधिमंडल ने हाल ही में म्यांमार की सीमा पर तैनात एक जवान की मृत्यु का मामला उठाया और कहा कि असम राइफल्स के जवानों को सम्मान नहीं दिया जा रहा है। इस जवान की संक्षिप्त बीमारी के बाद मृत्यु हो गयी। प्रतिनिधिमंडल ने आरोप लगाया कि जिम्मेदार अधिकारियों ने इस जवान के शव को लावारिस हालत में उसके पैतृक स्थान पर भेज दिया और परिजनों को नजदीक के हवाई अड्डे से शव लेने काे कहा। जवान का पार्थिव शरीर किराये के वाहन में उसके घर लाया गया और असम राइफल्स या सेना का कोई अधिकारी साथ नहीं था। इस जवान को उसका वाजिब सम्मान भी नहीं दिया गया। असम राइफल्स में लगभग 65000 जवान हैं जो म्यांमार से सटी तकरीबन 1643 किलोमीटर लंबी सीमा की सुरक्षा करते हैं। इसके अलावा पूर्वोत्तर में उग्रवाद से निपटने के अभियानों में भी इसकी प्रमुख भूमिका होती है।

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