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मोदी सरकार के घर के चिराग की सलाह, बीमार अर्थव्यवस्था को सम्भालों अन्यथा जल सकता है घर – Mobile Pe News

मोदी सरकार के घर के चिराग की सलाह, बीमार अर्थव्यवस्था को सम्भालों अन्यथा जल सकता है घर

देश में अर्थव्यवस्था की हालत को लेकर छिड़े घमासान में मोदी सरकार के घर का एक और चिराग घर को आग लगाने के​ लिए मैदान में कूद गया है। ये चिराग हैं, वित्तमंत्री के पति और आंध्र प्रदेश सरकार के कम्युनिकेशन एडवाइज़र रह चुके पराकाला प्रभाकर। उन्होंने अर्थव्यवस्था की मौजूदा हालत पर द हिंदू अख़बार में लेख लिखकर कहा है कि बीजेपी सरकार के पास कोई इकोनॉमिक रोडमैप नहीं है। ये पार्टी, भारतीय जनसंघ के दिनों से ही नेहरू के समाजवाद को ख़ारिज करती आई है। लेकिन बीजेपी जिस पूंजीवाद, मुक्त बाज़ार फ्रेमवर्क की वकालत करती है, वो असल में कभी टेस्ट किया नहीं गया। प्रभाकर ने बीजेपी सरकार को सलाह दी है कि नेहरू के समाजवाद की आलोचना करने के बजाए, नरसिम्हा राव और मनमोहन सिंह के इकोनॉमिक आर्किटेक्चर को अपनाना चाहिए। प्रभाकर, देश की वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के पति भी हैं।

पराकाला प्रभाकर ने लिखा है कि देश की अर्थव्यवस्था में आई सुस्ती को लेकर हर ओर घबराहट का माहौल है। सरकार इसे ख़ारिज कर रही है, लेकिन पब्लिक डोमेन में मौजूद जानकारी से पता चलता है कि हर सेक्टर में स्थिति बहुत ही चुनौतीपूर्ण हो चुकी है।
निजी क्षेत्र की खपत ढाई साल में सबसे निचले स्तर पर पहुंचकर 3.1% हो गई है। ग्रामीण खपत में शहरी क्षेत्र से दोगुनी सुस्ती छाई है। नेट एक्सपोर्ट में बहुत कम या कुछ वृद्धि नहीं हुई है। जीडीपी छह साल में सबसे निचले स्तर पर है। वित्त वर्ष 20 के पहले क्वार्टर में सिर्फ़ 5% विकास दर दर्ज की गई है और बेरोज़गारी 45 साल में सबसे ज़्यादा है। लेकिन अभी तक बीजेपी सरकार की तरफ़ से अर्थव्यवस्था की हालत सुधारने की कोशिश के संकेत नहीं दिखे हैं।

पार्टी की आर्थिक विचारधारा और उसकी अभिव्यक्ति राजनीतिक वजहों से सिर्फ़ नेहरूवादी मॉडल की आलोचना करने तक सीमित रही।
प्रभाकर ने लिखा है कि पार्टी का मौजूदा नेतृत्व इस बात को अच्छे से जानता है, इसलिए 2019 में दोबारा हुए आम चुनाव में उसने अपनी सरकार के आर्थिक प्रदर्शन की बात नहीं की, बल्कि बहुत होशियारी से राष्ट्रवाद और सुरक्षा जैसे मुद्दों पर चुनाव लड़ा।

लेख में पीवी नरसिम्हा राव और उनकी सरकार में रहे मनमोहन सिंह की आर्थिक नीतियों की तारीफ़ की गई है। 1991 में देश में कांग्रेस सरकार थी जिसमें नरसिम्हा राव प्रधान मंत्री और मनमोहन सिंह वित्त मंत्री थे। मौजूदा सरकार को नरसिम्हा राव- मनमोहन सिंह की आर्थिक नीति से सीख लेनी चाहिए।