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इधर चुटकी बजेगी उधर प्रधानमंत्री दफ्तर जा पहुंचेंगे……..

भारत के प्रधानमंत्री का सरकारी आवास जल्द ही राष्ट्रपति भवन के बगल में हो सकता है। यहां से उन्हें अपने दफ्तर पहुंचने में चंद मिनट ही लगेंगे। अभी प्रधानमंत्री के 7 लोक कल्याण मार्ग स्थित आवास के आसपास यातायात पर अक्सर लगने वाली पाबंदियों से दिल्ली बेहद परेशान हैं। प्रधानमंत्री जब साउथ ब्लॉक स्थित दफ्तर यातायात रोक दिया जाता है।

1984 में जब राजीव गांधी प्रधानमंत्री बने थे तो वह सात रेसकोर्स अब 7, लोक कल्याण मार्ग में रहने आए थे। 12 एकड़ का यह परिसर नई दिल्ली के वास्तुकार एडविन लुटियंस के डिजाइन पर बना है। नई पुनर्विकास योजना सेंट्रल विस्टा के तहत रायसीना हिल पर साउथ ब्लॉक के दक्षिण-पश्चिम कोने पर प्रधानमंत्री आवास बनाने की योजना है। प्रधानमंत्री के मौजूदा आवास और साउथ ब्लॉक दफ्तर की दूरी 2.8 किमी है। योजना में संसद की नई इमारत, सभी केंद्रीय मंत्रालयों को करीब लाना और सेंट्रल विस्टा के आसपास स्थित धरोहर इमारतों का पुनर्विकास का लक्ष्य शामिल है। सेंट्रल विस्टा में सभी मंत्रालयों के साथ प्रधानमंत्री और उप राष्ट्रपति के आवास भी होंगे। उपराष्ट्रपति का आवास नॉर्थ ब्लॉक के पीछे होगा।

संसद की इमारत के पुनर्निर्माण की अपेक्षा संसद परिसर में ही एक नई इमारत बनाई जाएगी। अभी जिस इमारत में संसद है, उसी के 13 एकड़ के भूखंड पर नया कक्ष बनाया जाएगा। इसमें मौजूदा लोक सभा कक्ष से तीन गुना ज्यादा आकार का कक्ष, राज्य सभा कक्ष और एक लाउंज होगा। लोक सभा के नए कक्ष को संयुक्त सत्र के लिए भी इस्तेमाल किया जा सकेगा। अभी इसके लिए केन्द्रीय कक्ष का इस्तेमाल होता है। इसमें नियमित रूप से 900 लोग बैठ सकेंगे लेकिन संयुक्त सत्र के दौरान 1,350 लोगों के बैठने की क्षमता होगी। हर सांसद को 50 फीसदी ज्यादा जगह मिलेगी। मौजूदा लोकसभा में केवल 552 सांसद बैठ सकते हैं।

अभी केंद्र सरकार के 51 में से 22 मंत्रालय सेंट्रल विस्टा और इसके आसपास हैं। योजना के मुताबिक राजपथ के दोनों तरफ 10 नई इमारतों में सभी मंत्रालयों के दफ्तर होंगे। एकीकृत भूमिगत पार्किंग के अलावा इनमें सीधे दिल्ली मेट्रो की येलो और वॉयलेट लाइनों तक पहुंचने के लिए भूमिगत रास्ते भी होंगे। इंडिया गेट और रायसिना हिल के बीच तीन किमी लंबे सेंट्रल विस्टा में यातायात को कम करने के लिए पैदल यात्रियों के लिए ट्रैफिक सिग्नल पर अंडरपास होंगे। सेंट्रल विस्टा परियोजना रायसिना हिल के रिज से शुरू होकर यमुना नदी पर खत्म होगी।

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फंस गई इमरान खान की ये खूबसूरत सहयोगी, लिखित माफी से भी नहीं छूटा पीछा

प्रधानमंत्री की सहयोगी होने के दम्भ में जुबान से उल्टी सीधी बात निकालने वाली पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान की खूबसूरत सहयोगी फिरदौस आशिक अवान पूरी तरह फंस गई हैं। उनका पीछा माफी से भी नहीं छूटा और इस्लामाबाद उच्च न्यायालय ने प्रधानमंत्री के सूचना मामलों की विशेष सलाहकार फिरदौस आशिक अवान को मानहानि के एक मामले में शनिवार तक न्यायालय के समक्ष लिखित माफीनामा पेश करने का निर्देश दे दिया।

मुख्य न्यायाधीश अतहर मिनल्लाह ने सुश्री अवान के खिलाफ चल रहे मानहानि मामले की सुनवाई करते हुए यह निर्देश दिया। सुनवाई के दौरान सुश्री अवान की ओर से बिना शर्त माफी मांगने की पेशकश की गई तो मुख्य न्यायाधीश ने उन्हें लिखित जवाब पेश करने को कहा।
न्यायाधीश मिनल्लाह ने सुश्री अवान के वकील को शनिवार तक उनका लिखित माफीनामा पेश करने का निर्देश दिया। इस मामले की अगली सुनवाई 11 नवंबर को होगी।

सुश्री अवान ने अपने वकील के जरिये न्यायालय से सुनवाई के दौरान उन्हें व्यक्तिगत रूप से पेश होने में छूट देने का अनुरोध किया। न्यायाधीश ने सुश्री अवान के इस अनुरोध को ठुकराते हुए कहा कि उनकी न्यायालय में पेशी होना उनके लिए फायदेमंद होगा।
न्यायालय ने शुक्रवार को अवमानना के एक अन्य मामले में सुश्री अवान के खिलाफ एक अन्य कारण बताओ नोटिस जारी किया था।

पिछले बुधवार को अपनी प्रेस कॉन्फ्रेंस में न्यायपालिका की आलोचना के लिए पहली बार सुश्री अवान को अवमानना नोटिस जारी किया गया था। गत शुक्रवार की सुनवाई के दौरान, अदालत ने सुश्री अवान की माफी स्वीकार कर ली थी लेकिन एक लंबित आपराधिक कार्यवाही के संबंध में बयान देने के लिए उनके खिलाफ अदालत की अवमानना के मामले में नया कारण बताओ नोटिश जारी किया गया।

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सिन्हा के पैंतरों से पतली हो गई है इस बाहुबली की हालत, जीते तो मोदी ही बनेंगे प्रधानमंत्री

आज़ादी के बाद से देश की राजनीति में पहली बार पूर्वी उत्तर प्रदेश की गाजीपुर सीट एक ऐसी प्रयोगशाला के रूप में देखी जा रही है जहां जातिवाद एवं बाहुबल का सीधा विकासवाद से कड़ा मुकाबला है तथा इसका नतीजा आने वाले समय की राजनीति पर दूरगामी प्रभाव डालेगा।
पूर्वी उत्तर प्रदेश के यह क्षेत्र राजनीति के पंडितों के कई मायनों में महत्वपूर्ण है। वर्षो से पूर्वांचल का यह इलाका राजनीतिक भटकाव का शिकार रहा। इस दौरान भय और जातिवाद का ऐसा चक्रव्यूह बनाया गया जिसमें इस लोकसभा सीट का निर्णायक यादव, दलित और मुस्लिम बन गया।

इस बार एक तरफ समाजवादी पार्टी -बहुजन समाज पार्टी गठबंधन उम्मीदवार बाहुबली अफजाल अंसारी हैं, वहीं दूसरी ओर भाजपा से केन्द्रीय राज्यमंत्री मनोज सिन्हा मैदान में हैं। पिछले दो दशक से इस राजनीतिक चक्रव्यूह को तोड़ने की कोशिश से 2014 के चुनाव में जातिवाद एवं अपराध के शिकंजा चटक गया और विकास की आशा आकांक्षा मामूली अंतर से जीत गयी। लेकिन इस बार जहां जातिवाद और बाहुबल ज़्यादा मजबूत गठजोड़ के साथ मैदान में उतरा है तो पांच साल में द्रुत गति से हुआ विकास गाज़ीपुर के लोगों को रोमांचित कर रहा है। घोर जातिवाद में फंसे लोग भी अब खुलकर मान रहे हैं कि सिन्हा ने जो काम किये हैं, उनके बारे में पहले सोचा तक नहीं गया था।

सामाजिक ढांचे में असरदार दिखने वाले यादवों और दलितों के प्रौढ़ पुरुषों का झुकाव जाति की ओर है लेकिन नौजवान और महिलाओं में वैचारिक बिखराव दिखाई दे रहा है। मुस्लिम समुदाय विशेष रूप से महिलाओं में भी कुछ अंश में भाजपा के प्रति झुकाव है। जातिगत तिकड़ी में दिख रहा बिखराव और अन्य जातियों की लामबंदी बाहुबली के हौसले पस्त किए हुए है। गाजीपुर में बाहुबली मुख्तार अंसारी का दबदबा है। उनके खिलाफ ढाई सौ से ज्यादा हत्या सहित कई अपराधों के मामले चल रहे हैं। गाजीपुर से बसपा प्रत्याशी मुख्तार अंसारी के भाई अफजाल अंसारी का भी जीवन आपराधिक पृष्ठभूमि वाला है। वो यहां से एक बार सांसद और दो बार विधायक बन चुके हैं। गाजीपुर में अंसारी को टक्कर किसी ने दी है तो वह मनोज सिन्हा हैं।

हालांकि इसकी उन्हें कीमत भी बहुत चुकानी पड़ी है। इस राजनीतिक टकराव के चलते उनके कई समर्थकों की हत्या हुई और भतीजे को भी मार दिया गया, लेकिन इसके बाद भी श्री सिन्हा पीछे नहीं हटे और उसी का नतीजा है कि गाजीपुर क्षेत्र में बाहुबली के भय का वातावरण छटा। गाजीपुर में सिन्हा के भूमिहार समाज की संख्या केवल 75 हजार है। वह जातिवाद की राजनीति नहीं करते। हालांकि भाजपा की तरफ से उन्हें किसी सुरक्षित सीट से चुनाव लड़ने का भी प्रस्ताव दिया गया था, लेकिन उन्होंने साफ कहा कि चुनाव लड़ेंगे तो गाजीपुर से अन्यथा नहीं लड़ेंगे। गाजीपुर में दलित साढ़े तीन लाख, मुस्लिम दो लाख, यादव समाज साढ़े तीन लाख है. ब्राह्मण एक लाख, भूमिहार 75 हजार, वैश्य 75 हजार, राजपूत डेढ़ लाख, राजभर 75 हजार, कुशवाहा डेढ़ लाख तथा अन्य जातियां एक लाख के आसपास हैं।

करीब 18 लाख मतदाताओं वाली इस सीट में आठ लाख मतदाता (यादव, मुस्लिम, दलित) निर्णायक रहते हैं, दस लाख मतदाता भय या नाराजगी के चलते मतदान से खुद को दूर रखते थे लेकिन इस चुनाव में दस लाख मतदाताओं की सक्रियता और आठ लाख मतदाताओं में अंदरखाने का बिखराव ने बाहुबल की चूलें हिला दी हैं। वाराणसी से गाज़ीपुर के रास्ते में गोमती नदी पार करते ही वाराणसी की सीमा खत्म हो जाती है और गाजीपुर शुरू हो जाता है. इतनी करीबी के बाद भी गाजीपुर सीट का मिजाज वाराणसी से बिलकुल अलग है। सिधौना के पास गोमती और गंगा का संगम स्थल है। लेकिन गाजीपुर और वाराणसी में वैचारिक संगम नहीं हो पाया। नदी के इस पार सिधौना जो गाजीपुर में आता है, वहां जातिवाद सिर चढ़कर बोलता है। नदी के उस पार यह गौण है।

सिधौना क्षेत्र यादव और मुस्लिम बहुल इलाका है। यहां से सपा-बसपा के अलावा किसी पार्टी को वोट नहीं जाता लेकिन पहली बार यादव समाज के युवा मतदाताओं का झुकाव साफ़ तौर पर भाजपा की तरफ है। वे राष्ट्रीय सुरक्षा के मुद्दे पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा उठाए गए कदम से वह प्रभावित हैं, तो भाजपा मनोज सिन्हा की तरफ से बिना भेदभाव किए विकास कार्य का भी असर है। इस इलाके में भीड़ से बात करने पर बाहुबल के पैरोकार अफजाल अंसारी की जीत का दावा करते हैं, लेकिन मतदाताओं से अकेले बात करने पर पता चलता है कि अंदरखाने भाजपा की घुसपैठ हो चुकी है। यादव समाज के कुछ ऐसे परिवार भी मिले, जो खामोशी से भाजपा की जीत के सहभागी बनना चाहते हैं।

गाजीपुर सीट का सैदपुर इलाका दलित बहुल है। यह क्षेत्र बसपा का गढ़ माना जाता है. इस बार सैदपुर का दलित भी बंटा हुआ है। सैदपुर के पास दलितों की बस्तियों में भी शौचालय एवं रसोई गैस सिलेंडर के कारण भाजपा की ओर नरम रुख दिखाई दे रहा है। सैदपुर कस्बे में घूमने पर पाया गया कि दलितों का पढ़ा-लिखा तबका भाजपा के साथ जा सकता है। मनोज सिन्हा के काम करने के तरीके ने इनको प्रभावित किया है। चौराहे पर चाय की दुकान में चुनाव पर चर्चा में लोगों ने खुलकर कहा कि क्षेत्र के लिए सिन्हा और देश के लिए मोदी जरूरी हैं। गाजीपुर का नंदगंज इलाका दलित और यादव समाज वाला क्षेत्र है। किसी समय में यहां चीनी मिल हुआ करती थी, लेकिन आपराधिक घटनाओं के बढ़ने से व्यापारिक गतिविधियां सिमटती चली गईं। इस इलाके में भी अंसारी कमजोर दिख रहे हैं। इलाके के लोगों की सोच अब जातिवाद से राष्ट्रवाद की तरफ हुई है।

गाजीपुर के जातिवादी चक्रव्यूह में फंसे क्षेत्र के लोगों खास तौर पर युवाओं में पहली बार इससे बाहर निकलने की छटपटाहट दिख रही है। सिन्हा भी अपने प्रचार अभियान में इसे हवा देने के लिए गाज़ीपुर प्राइड का विचार रख रहे हैं और अपराधियों को जिले से सदा के लिए बाहर करने का भरोसा दिला रहे हैं। मुंबई के रेलवे स्टेशन पर गाज़ीपुर के लिए नियमित ट्रेन चलने और शहर के नाम की उद्घोषणा की बात भी लोगों को गर्व की अनुभूति करा रही है। सिन्हा अगले 5 वर्षों में गाज़ीपुर को वाराणसी के साथ ट्विन सिटी के माॅडल पर विकसित करने और कृषि संबंधी उद्योग धंधों को बढ़ावा देकर किसानों की आमदनी और नौजवानों के लिए रोजगार बढ़ाने का वादा कर रहे हैं।

खासकर युवा मतदाताओं का झुकाव बता रहा है कि जिस सीट पर यादव, मुस्लिम और दलित की तिकड़ी निर्णय किया करती थी, इस बार सर्व समाज का युवा मतदाता निर्णायक की भूमिका निभाने के लिए आगे आया है। नतीजे चाहे जो हों लेकिन जिस तरह का माहौल है,उससे साफ लग रहा है कि मतदाताओं को डराकर जीत हासिल करने वाला बाहुबल इस बार खुद डरा हुआ है। राजनीतिक प्रेक्षकों का मानना है कि गाज़ीपुर एक अनूठी राजनीतिक प्रयोगशाला बन गया है। भाजपा इस सीट पर केवल और केवल विकास के नाम पर वोट मांग रही है। पांच साल का विकास और अगले पांच साल की विकास की तस्वीर। यहां हिन्दुत्व का मुद्दा नहीं है। इसके नतीजे का समूची राजनीति पर दूरगामी प्रभाव पड़ेगा। अगर भाजपा का विकासवाद जीता तो देश में सभी दल जाति संप्रदाय की राजनीति से परे सोचना शुरू करेंगे। भाजपा को भी कट्टर हिन्दुत्व की राजनीति को छोड़कर आगे बढ़ने होगा।

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मायावती इसलिए देखती है प्रधानमंत्री बनने का सपना, 40 सांसदों के दम पर ये बन चुका है पीएम

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने रविवार को उत्तरप्रदेश में एक चुनावी सभा में तंज किया कि चालीस सीटों पर लड़ने वाले प्रधानमंत्री बनने का सपना देखते हैं। प्रधानमंत्री की विपक्षी नेताओं की खिल्ली उड़ाने की आदत को दरकिनार करते हुए हम आपको बताते हैं कि बसपा प्रमुख मायावती प्रधानमंत्री बनने का सपना क्यों देखती है! यह जानने के लिए हमें 9ं0 के दशक में जाना होगा जब भारत को 64 सांसदों के रूप में एक प्रधानमंत्री मिला था।

बात 1989 की है। वीपी सिंह ने चालाकी के साथ देवीलाल को इस्तेमाल कर प्रधानमंत्री की कुर्सी हथिया ली थी। अध्यक्ष जी के नाम से मशहूर जनता दल के नेता चन्द्रशेखर ने उन्हें प्रधानमंत्री स्वीकार नहीं किया। इस बीच देवीलाल और वीपी सिंह में तनातनी हुई तो गद्दार मानसिकता के वीपी सिंह ने उन्हें भी माफ नहीं किया और मंडल कमीशन की रिपोर्ट लागू करके उन्हें निष्प्रभावी बनाने का दांव चला। गुस्से से पागल देवीलाल ने वीपी सिंह को हटाने के लिए जनता दल को तोड़ दिया और कांग्रेस ने चुनावों से बचने के लिए 64 सांसदों वाले संसदीय दल के चन्द्रशेखर को बाहर से समर्थन देकर प्रधानमंत्री बनवा दिया।

ये अलग बात है कि उनकी सरकार कांग्रेस ने अधिक दिन तक चलने नहीं दी और देश को 1991 में मध्यावधि चुनाव में जाना पड़ा। उसके बाद भी 1996 में जब कांग्रेस हार गई और अटल बिहारी वाजपेयी की 13 दिन की सरकार गिर गई तो फिर छोटे से संसदीय दल के नेता एच डी देवेगौडा प्रधानमंत्री बन गए। उनके बाद आई के गुजराल भी प्रधानमंत्री बने।

इन उदाहरणों को ध्यान में रखते हुए ही मायावती यह मानकर प्रधानमंत्री बनने का सपना देखती हैं कि जब चन्द्रशेखर प्रधानमंत्री बन सकते हैं तो वे अपने तीस—चालीस सांसदों के दम पर प्रधानमंत्री क्यों नहीं बन सकती। वैसे मायावती का यह सपना शेखचिल्ली जैसा है क्योंकि अब कांग्रेस उन्हें बाहर से समर्थन नहीं देगी और उन्हें पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी से भी मुकाबला करना है।

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कांग्रेस के शासन में आतंकवाद कैंसर की तरह बढा, अब इसका इलाज होगा पक्का : मोदी

सोनगढ़| प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने आतंकवाद की तुलना कैंसर से करते हुए आज कहा कि कांग्रेस के शासन के दौरान पैदा हुए और पले-बढ़े आतंकवाद का उनकी सरकार की ओर से शुरू किया गया कड़ा इलाज आगे भी इसलिए जारी रहना चाहिए क्योंकि उपचार के बीच रूकने पर कैंसर की तरह ही यह दोबारा तेजी से फैल जायेगा।मोदी ने कहा कि यह उपचार लगातार जारी रखने के लिए भी उन्हेें दोबारा मौका दिया जाना चाहिए।उन्होंने भ्रष्टाचार काे एक और कैंसर बताते हुए कांग्रेस को ही इसके लिए जिम्मेदार ठहराया।प्रधानमंत्री ने अपने गृह राज्य गुजरात के तापी व्यारा जिले और बारडोली लोकसभा क्षेत्र के सोनगढ़ मे एक चुनावी सभा में यह बातें कहीं।

मोदी ने कहा, ‘एक जमाना था जब देश में आतंकी हमले होते थे तो सरकार हाथ पर हाथ रख कर बैठी रहती थी। मैने गुजरात के मुख्यमंत्री के तौर पर अपने शासन के दौरान राज्य में आतंकियों के सभी स्लीपर सेल का सफाया करवा दिया। अब गुजरात में सभी चैन, सद्भावना और भाईचारे के साथ रहते हैं। ऐसे ही पूरे देश में ऐसे माहौल के लिए आतंकवाद का सफाया होना चाहिए और येन केन प्रकारेण (जिस तरह से भी संभव हो) इसे जड़ से उखाड़ा जाना चाहिए। इसे खाद पानी पड़ोस से मिलता है इसलिए मैने जो जरूरी था वह (एयरियल स्ट्राइक) कराया। अब कांग्रेसियों और विपक्ष को इसमें भी आपत्ति है और वे सबूत मांग रहे हैं। अरे भाई पाकिस्तान रो रहा है आवाज सुनो तो समझ आये पर इन्हें भारत के सपूतों पर विश्वास नहीं, पाकिस्तान के लोगों पर भरोसा है। ऐसे लोगों को क्या देश सौंपा जा सकता है।’

उन्होंने कहा कि आतंकवाद कैंसर जैसा है जो जन्मा, पला-बढ़ा कांग्रेस के जमाने में है। अगर इसके खिलाफ कार्रवाई बीच में बंद कर दो तो जैसे कैंसर की दवा बीच में बंद होने से बीमारी नहीं जाती वैसे ही कार्रवाई बीच में नहीं छोड़ी जा सकती है। और इसे उनके अलावा करेगा कौन। मोदी ने कहा, ‘देश में एक नाम बताओ जो अपना सिर लेकर आतंकवाद से मुकाबले के लिए निकलने को तैयार हो। एक बार यह आतंकवाद जाये तो सुख चैन की जिंदगी होगी। अभी तो मंदिर में जाओ तो भी पुलिस है और आतंकवाद के चलते प्रसाद की थैली तक की जांच करनी पड़ती है। आतंकवाद के कारण देश को सुरक्षा पर बड़ी रकम खर्च करनी पड़ती है। इस परिस्थित को बदलने की जरूरत है।’

प्रधानमंत्री ने कहा कि इस देश का दूसरा कैंसर भ्रष्टाचार का है जिसे खत्म किया जाना चाहिए। गुजरात मेें उनके शासन काल में किसी ने उन पर एक ऊंगली नहीं उठायी। पूर्व मुख्यमंत्री तथा वरिष्ठ कांग्रेस नेता अमरसिंह चौधरी विधानसभा में कहते थे कि मोदी जादूगर है। पर अब कांग्रेस कहते है कि चौकीदार चोर है। पर तुगलक रोड चंदा घोटाले में पैसा कहां से निकल रहा है। यह कैसी जादूगरी है। अब मुझे पता चल रहा है कि क्यों कांग्रेसी नेता अपने भाषण में नोटबंदी पर बार-बार प्रहार क्यों करते थे। हाल में छापेमारी के दौरान पहले ही घंटे में 280 करोड़ रूपये बरामद हुए हैं।

उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस गरीब बच्चों और गर्भवती महिलाओं के लिए केंद्र सरकार की ओर से दिये गये पैसे से घोटाला करती है। ऐसे लोगों को जनता रूपी ईश्वर माफ नहीं करेगी। 15 साल तक मप्र में सत्ता से बाहर रहने के बाद वहां पैर रखने का मौका मिलते ही घोटाला करने वाली कांग्रेस को अगर पांच साल बाद केंद्र मेें सत्तावापसी का मौका मिला तो यह पांच मिनट भी नहीं लगायेगी। ऐसी लूट करने वालों को कभी भी दिल्ली की सत्ता में वापसी का मौका नहीं दिया जाना चाहिए।

उन्होंने यह भी दावा किया कि उनको हराने के लिए एक दूसरे के साथ हाथ मिला कर फोटो खिंचाने वाले विपक्षी दल अब आपस में ही लड़ रहे हैं। ऐसे लोगों जिनको न जनता की और न भविष्य की पड़ी है उन्हें देश देना नहीं चाहिए।मोदी ने कांग्रेस की घोषणा पत्र को ढकोलसा पत्र बताते हुए इस पर अपने आरोप दोहराये। उन्होंने पार्टी पर गुजरात विरोधी मानसिकता का भी आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि देश को एक करने वाले सरदार पटेल आज अगर जीवित होते तो कश्मीर से सेना हटाने और देश को टुकड़े करने की बात कहने वालों के खिलाफ राजद्रोह की धारा नहीं लगाने की वकालत करने वाले इस घोषणा पत्र को एक मिनट के लिए स्वीकार नहीं करते।मोदी ने विश्वास जताया कि 23 मई को मतगणना के बाद दोबारा केंद्र मेें भाजपा की ही सरकार बनेगी।

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फिल्म पीएम नरेन्द्र मोदी 38 देशों में होगी रिलीज दुनियाभर के सिनेमालवर्स को इंतजार

मुंबई| प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की फिल्म पीएम नरेन्द्र मोदी 38 देशों में रिलीज की जायेगी।उमंग कुमार के निर्देशन में बनी यह फिल्म 38 देशों में रिलीज की जायेगी।इसमें अमेरिका, ब्रिटेन, कनाडा, ऑस्‍ट्रेलिया और संयुक्त अरब अमीरात जैसे देश शामिल हैं।इस फिल्‍म में प्रधानमंत्री मोदी के जीवन के शुरुआती सफर से उनके भारत के प्रधानमंत्री बनने तक की कहानी को दिखाया गया है।

‘पीएम नरेंद्र मोदी’ बायॉपिक लंबे वक्‍त से काफी चर्चा में है।फिल्‍म के प्रोड्यूसर्स और डिस्‍ट्र‍िब्‍यूटर्स में से एक आनंद पंडित ने कहा प्रधानमंत्री मोदी की जिंदगी को लेकर न सिर्फ भारतीयों में बल्‍कि दुनियाभर के सिनेमालवर्स को काफी इंट्रेस्‍ट है।हमने तय किया है कि फिल्‍म को न सिर्फ भारत में बल्‍कि कम से कम 38 देशों में रिलीज करेंगे।भारत में फिल्‍म 1700 स्क्रीन्‍स पर रिलीज होगी और हमने ओवरसीज में इसे करीब 600 स्‍क्रीन्‍स पर रिलीज करने की प्‍लानिंग की है।

फिल्‍म हिंदी के अलावा तेलुगू और तमिल भाषा में भी रिलीज की जाएगी।आनंद पंडित ने कहा, ‘जो लोग फिल्‍म पर सवाल उठा रहे हैं और इस पर बैन की मांग कर रहे हैं, ये वे लोग हैं जिन्‍होंने अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को विफल करने की कोशिश की है।

 

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दुनिया के देशों में भारत का डंका बजने का यह विशेष राज : नरेंद्र मोदी

अमरोहा(उत्तरप्रदेश)| प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा है कि आज दुनिया के देशों में भारत का जो डंका बज रहा है इसका श्रेय उन्हें नहीं, देश की जनता को जाता है। सत्रहवीं लोकसभा के चुनाव के लिए भारतीय जनता पार्टी(भाजपा) के उम्मीदवारों के पक्ष में प्रचार करने आये श्री मोदी ने शुक्रवार को यहां रैली को संबोधित करते हुए कहा “ आज दुनिया के देशों में भारत का डंका बज रहा है, दुनिया भर में भारत की जय जयकार हो रही है। इसका कारण मोदी नहीं है । इसका कारण आप लोग हैं। अपने जो 2014 में वोट दिया उसकी ताकत है। यह पूर्ण बहुमत वाली सरकार की ताकत है।” उन्होंने कहा कि देश की साख रहे,इसके लिए मजबूत सरकार का होना बहुत जरुरी है।

मजबूत सरकार ही कड़े और बड़े फैसले ले पाती है, देश को आगे बढ़ा पाती है। संयुक्त अरब अमीरात(यूएई) के सर्वोच्च सम्मान ‘जायेद’ से नवाजे जाने पर मोदी ने कहा “कल ही यूएई ने आपके इस प्रधानसेवक को वहां का सबसे बड़ा सम्मान ‘जायेद मेडल’ देकर सम्मानित किया है। यह सम्मान मेरा नहीं आप सबका और खाड़ी देशों में काम कर रहे करोड़ों भारतीयों का है।”कांग्रेस, समाजवादी पार्टी(सपा) और बहुजन समाज पार्टी (बसपा) को घेरते हुए श्री मोदी ने कहा कि इन दलों के आतंकवाद पर नरम रवैये की वजह से कुछ लोगों के हौसले बुलंद हुए हैं। इन दलों ने सिर्फ आतंक को ही मदद नहीं दी है, इन्होंने लोगों के जीवन और अस्तित्व को भी संकट में डाला है। उन्होंने कहा कि आतंकवादियों को उन्हीं की भाषा में जवाब देना, देश के ही कुछ लोगों को परेशान करता है। जब भारत डंके की चोट पर दुश्मन को मारता है, तब कुछ लोगों को हिंदुस्तान में रोना आना है।

प्रधानमंत्री ने कहा, “मोदी आतंक को वोट बैंक में नहीं तोलता, सभी आतंक के मददगार आज जेलों में बंद पड़े हैं। बीते पांच वर्षों से धमाके रुके हैं, बम, बंदूकों की आवाज बंद हुई है। निर्दोष लोगों की जान जानी बंद हो गयी। यह इसलिए हुआ है क्योंकि आपने दिल्ली में चौकीदार को बैठा रखा है। आतंकवादियों को पता है कि वह एक गलती भी करेंगे तो मोदी उन्हें पाताल में भी सबक सिखाएगा।”श्री मोदी ने अपने पांच वर्ष के कार्यकाल का जिक्र करते हुए कहा कि इस दौरान जिस तरह जनता ने इस चौकीदार का साथ दिया है। उसके लिए बहुत विनम्रता के साथ सबको शीश झुकाकर नमन करता हूं। देश को आगे बढ़ाना है तो सबको साथ मिलकर चलना होगा। कुछ लोग देश को तोड़ने की कोशिश कर रहे हैं। अलग-अलग जातियों के नाम पर खाई पैदा कर रहे हैं। ऐसे लोगों के स्वार्थ को समझने की जरुरत है।कांग्रेस पर निशाना साधते हुए मोदी ने कहा “सिर्फ एक परिवार की पहचान बनाने के लिए, प्रतिष्ठा के लिए, एक परिवार की स्वार्थ सिद्धि के लिए कांग्रेस ने अंबेडकर का भी अपमान किया था। कांग्रेस ने उन्हें चुनाव में हराया था, देश के प्रति बाबा साहेब के योगदान को भुलाने की साजिश रची थी।”

मोदी कांग्रेस को लेकर यही नहीं रुके और कहा “बाबा साहब ने उस परिवार को चुनौती दी थी, इसलिए बाद की पीढ़ियों ने भी बाबा साहब से निरंतर बदला लिया। वह तो आज वोट बैंक की मजबूरी है, जो आज कांग्रेस बाबा साहब का नाम लेती है, वरना यह वही कांग्रेस है जिसने दशकों तक उनकी फाेटो तक संसद में लगने नहीं दी थी।’’

 

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इस देश के प्रधानमंत्री ने नरेंद्र मोदी को सर्वाेच्च ‘जायद’ सम्मान देने का किया एलान

यूएई का प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को सर्वाेच्च ‘जायद’ सम्मान देने का एलानअबु धाबी| संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) के राष्ट्रपति शेख खलीफा बिन जायद अल नाहयन ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को राष्ट्र प्रमुखों, राजाओं तथा राष्ट्रपतियों को दिये जाने वाले देश के सर्वाेच्च सम्मान ‘जायद’ मेडल से सम्मानित करने का एलान किया है।यूएई के शहजादे और देश की सशस्त्र बलों के उप प्रमुख शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयन ने ट्वीट कर यह जानकारी दी है।

उन्होंने लिखा कि मोदी ने द्विपक्षीय संबंधों को और प्रगाढ़ करते हुए इन्हें रणनीतिक स्तर पर व्यापक स्वरूप देने में काफी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उन्होंने कहा,“हम अपने प्रिय मित्र नरेंद्र मोदी को यह सम्मान देकर दोस्ताना संबंधों को नयी ऊंचाई पर ले जाने तथा विभिन्न क्षेत्रों में दोनों देशों के बीच संबंधों काे प्रगाढ़ करने में उनकी अहम भूमिका एवं प्रयासों की सराहना करते हैं।”

उन्होंने कहा,“भारत के साथ हमारे ऐतिहासिक और व्यापक रणनीतिक रिश्ते हैं, जो मेरे प्रिय मित्र, प्रधानमंत्री मोदी की महत्वपूर्ण भूमिका से इन संबंधों को और बढ़ावा मिला।” शहजादे ने मोदी के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि उनके दोनों देशों के बीच संबंधों को प्रगाढ़ करने के अथक प्रयासों को देखते हुए राष्ट्रपति ने उन्हें जायद पदक प्रदान करने का फैसला किया है।

मोहम्मद बिन जायद ने बताया कि भारत के साथ यूएई के ऐतिहासिक रिश्ते को नए सिरे से साझा और भविष्य में इसे और मजबूत करने पर जोर दिया जा रहा है। उन्होंने उन मूल्यों की प्रशंसा की जो भारतीय समाज की विविधता में, विशेष रूप से सहिष्णुता और सम्मान की विशेषता रखते हैं।शेख मोहम्मद ने यूएई और भारत के बीच मजबूत दोस्ती और सहयोग पर गर्व व्यक्त करते हुए देश और इसके लोगों की प्रगति, समृद्धि, सुरक्षा और स्थिरता जारी रहने की कामना की।

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कांग्रेस ने हमेशा देश के हितों से किया समझौता : नरेंद्र मोदी

कोलकाता | प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार को कांग्रेस पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि आतंकवादियों से लोहा लेने वाली भारतीय सेना के मनोबल को हतोत्साहित करने वाले कांग्रेस के घोषणा पत्र की मियाद 23 मई को लोकसभा चुनाव के नतीजे आने के साथ समाप्त हो जायेगी।मोदी ने यहां के ‘ब्रिगेड परेड ग्राउंड’ में पहली बार एक भव्य रैली को संबोधित करते हुए लोगों से ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस सरकार को उखाड़ फेखने तथा स्वामी विवेकानंद के दृष्टिकोण के अनुसार देश को नयी ऊंचाई पर ले जाने के लिए अपनी सरकार की कोशिशों का समर्थन करने का आह्वान किया। उन्होंने गत 19 जनवरी को कोलकाता में हुई विपक्षी पार्टियों की रैली को लेकर हमला बोला और कहा कि विपक्षी नेता ‘मोदी हटाओ, मोदी हटाओ’ का नारा लगा रहे थे। मैं पूछना चाहता हूं कि क्यों मोदी हटाओ?

उन्होंने कहा, “मोदी ने क्या गलत किया है? क्या गरीबों को घर देना, रसोई गैस सिलिंडर देना, शौचालय बनवाना गलत है? यदि हां, तो मैंने यह गलती की है। मैं दोषी हूं।” उन्होंने कहा कि लोगों के सहयोग से गत पांच सालों में राष्ट्रीय जनतांत्रिक सरकार (राजग) के लिए असंभव संभव बन गया है क्योंकि जनता ‘चौकीदार बन गयी है।प्रधानमंत्री ने कहा, “कांग्रेस के घोषणा पत्र की मियाद 23 मई को समाप्त हो जायेगी और हमारी सरकार आतंकवादियों से लड़ाई के लिए सेना को मजबूत करेगी। हम सेना को सशक्त बनायेंगे।” उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने अपने घोषणा पत्र में जो कहा है, उससे सिर्फ पाकिस्तान में पनाह लिये हुए आतंकवादियों की मदद होगी।उन्होंने कहा, “क्या इससे पाकिस्तानी आतंकवादियों को मदद नहीं मिलेगी? उन्होंने कहा कि कांग्रेस इस वजह से नाराज है क्योंकि हर जगह चौकीदार है। यहां तक की सीमाओं पर भी चौकीदार है।

उन्होंने कहा कि देश और इस राज्य में कई ऐसे लोग है जो बालाकोट में आतंकवादी संगठन हिजबुल मुजाहिदीन के ठिकाने पर भारतीय वायुसेना की कार्रवाई, सर्जिकल स्ट्राइक और हवा में घातक सैटेलाइट को मार गिराकर अंतरिक्ष में भारत का वर्चस्व स्थापित होने का सबूत मांग रहे हैं। उन्होंने कहा, “भारत के पास इस तरह की क्षमता हमेशा थी, लेकिन तब की सरकार ने अपने दुश्मनों के खात्मे के लिए इसका उपयोग नहीं किया था। कांग्रेस ने हमेशा देश के हितों से समझौता किया है। यहां तक की नक्सलियों और अलगावादियों के खिलाफ लागू होने वाले कानून को भी कमजोर किया है तथा अब तृणमूल कांग्रेस भी उसी विचारधारा पर काम कर रही है।”

उन्होंने कहा कि कानून देश के लोगों का जीवन आसान बनाने के लिए है। उन्होंने कहा, “हमने 1400 नये कानून पास किये लेकिन कांग्रेस हमारे सैनिकों को कमजोर कर रही है। उनका मनोबल तोड़ रही है। मैं उनके साथ खड़ा हूं। मोदी कभी भी कांग्रेस को सफल नहीं होने देगी।”मोदी ने अपने आधे घंटे के भाषण के दौरान विपक्षी पार्टियों द्वारा ‘एयर स्ट्राइक’ का सबूत मांगने की आलोचना करते हुए कहा कि यह सुरक्षा बलों का अपमान है। उन्होंने कहा, “यह किसने कहा कि हमें आतंकवादियों की लाश दिखाओ? क्या आप लोगों को इस कार्रवाई पर गर्व नहीं है? किसने इसे ड्रामा करार दिया है?”

उन्होंने कहा, “‘सर्जिकल स्ट्राइक’, ‘एयर स्ट्राइक’ ‘स्पेस स्ट्राइक’ या कोलकाता से बनारस तक ‘वाटरवे’ किसके कारण संभव हुआ? गत पांच सालों में यह किसने किया? नहीं, मोदी की वजह से नहीं? यह आपके आशीर्वाद से हुआ। यह आपकी वजह से संभव हुआ। असंभव संभव है।” इस दौरान दर्शक मोदी-मोदी के नारे लगा रहे|

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कांग्रेस ने मोदी सरकार की निकाली ये विशेष 100 गलतिया

मुंबई| महाराष्ट्र की कांग्रेस पार्टी ने आज एक पुस्तिका जारी कर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व वाली भारतीय जनता पार्टी की सरकार की पिछले पांच वर्ष में की गयी 100 गलतियों को गिनाया है।इस पुस्तिका का प्रकाशन महाराष्ट्र की कांग्रेस पार्टी ने की है जिसे पार्टी के महासचिव मल्लिकार्जुन खडगे, के सी वेणुगोपाल, मधुसूदन मिस्त्री, राज्य के पार्टी अध्यक्ष अशोक चव्हाण और विधान सभा में विपक्षी नेता राधाकृष्ण विखे पाटिल ने जारी किया।

पुस्तिका में मोदी सरकार की कई विफलताएं गिनायी गयी। पुस्तिका में अच्छे दिन की विफलता, 56 इंच सीने और झूठे वादों का जिक्र किया गया है। इसके अलावा पुस्तिका में विमुद्रीकरण का जिक्र करते हुए कहा कि गया कि इससे आतंकवाद पर तो कोई लगाम लगी नहीं लेकिन अपने रुपये निकालने के लिए लाइन में खड़े होने वाले 100 अधिक लोगों की जान चली गयी। इसके अलावा देश में बेरोजगारी बड़ी पैमाने पर बढ़ी।पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के समय में भारतीय अर्थव्यवस्था वर्ष 2008 में मंदी के बावजूद अच्छी थी और उस समय समय विकास के लिए जो नीतियां बनायी गयी थी वह मोदी सरकार की अदूरदर्शिता के कारण नष्ट हो गयी।

पुस्तिका में जीएसटी के साथ ही रक्षा सौदों का जिक्र किया गया है। महाराष्ट्र सरकार के संबंध मे कहा गया है कि महाराष्ट्र के किसानों के कर्ज माफी की बात कही गयी लेकिन ढूंढने पर भी राज्य में कर्ज माफी वाला कोई किसान नहीं मिलता। भाजपा के राम मंदिर नीति पर कहा गया है कि ‘सिर्फ जनता को उकसाने के लिए राम मंदिर का झांसा दिया जाता है।’पुस्तिका में किसान, महिला, युवा, स्वास्थ्य, सोसल मीडिया, बैंक के क्षेत्र में संकट और मीडिया निगरानी की बात कही गयी है।