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Modi बंगाल , ओडिशा के दौरे पर रवाना

नयी दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भीषण चक्रवाती तूफान ‘अम्फान’ के कारण उत्पन्न हुई स्थिति का जायजा लेने के लिए शुक्रवार सुबह पश्चिम बंगाल और ओडिशा के दौरे पर रवाना हो गये।मोदी दोनों राज्यों के मुख्यमंत्रियों के साथ राहत एवं पुनर्वास के उपायों पर चर्चा करेंगे।

वह पूर्वाह्न लगभग 10:45 बजे कोलकाता पहुंचेंगे और मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के साथ राज्य का हवाई सर्वेक्षण करेंगे। दोनों नेता बशीरहाट में अपराह्न में एक प्रशासनिक बैठक को भी संबोधित करेंगे जिसके बाद श्री मोदी भुवनेश्वर के लिए रवाना हो जाएंगे।

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Amitabh ने मोदी को आयुष्मान भारत की सफलता पर दी बधाई

मुंबई। बॉलीवुड के महानायक अमिताभ बच्चन ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को आयुष्मान भारत योजना की सफलता पर बधाई दी है।अमिताभ सोशल मीडिया पर ऐक्टिव हैं। वह लोगों को अच्छे स्वास्थ्य के लिए जागरूक करते रहते हैं।

उन्होंने भारत सरकार की स्वास्थ्य से जुड़ी आयुष्मान भारत योजना के एक करोड़ लाभार्थी होने पर उन्हें ट्वीट करके बधाई दी है।अमिताभ ने ट्वीट कर लिखा, ‘आयुष्मान भारत को यह माइल स्टोन अचीव करने के लिए बहुत बधाई।’

गौरतलब है कि प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी ने गरीब परिवारों को पांच लाख रुपये तक नि:शुल्क इलाज सुलभ कराने वाली ‘आयुष्मान भारत’ स्वास्थ्य बीमा योजना के लाभार्थियों की संख्या एक करोड़ का आंकड़ा पार होने पर गहरी प्रसन्‍नता व्‍यक्‍त की है।

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सूक्ष्म खाद्य प्रसंस्करण उद्योग के लिए 10 हजार करोड़ की योजना मंजूर

नयी दिल्ली। सरकार ने अनौपचारिक क्षेत्र में काम करने वाले सूक्ष्म खाद्य प्रसंस्करण उद्यमों को औपचारिक क्षेत्र में लाने और उनके विकास के लिए 10 हजार करोड़ रुपये की योजना को बुधवार को मंजूरी प्रदान की।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल की यहां हुई बैठक में इसके प्रस्ताव को मंजूरी प्रदान की गयी। इसमें 60 प्रतिशत राशि केंद्र सरकार देगी जबकि शेष 40 प्रतिशत का भार राज्यों को वहन करना होगा।

आधिकारिक जानकारी के अनुसार सूक्ष्म खाद्य प्रसंस्करण उद्यमों को ऋण से संबद्ध सब्सिडी के माध्यम से मदद प्रदान की जायेगी। दो लाख ऐसे उद्यमों को यह सुविधा देने की योजना है।

स्वयं सहायता समूहों (एसएचजी) के माध्यम से पूरे देश में इसे लागू किया जायेगा। एसएचजी अपने सदस्यों को कार्यशील पूंजी और छोटे उपकरणों के लिए ऋण उपलब्ध करायेंगे। हर एसएचजी को चार लाख रुपये की आरंभिक राशि दी जायेगी।

इसमें अधिकतर ऐसे उद्यमों को अधिक फायदा होगा जो ग्रामीण इलाकों में कुटीर उद्योग की तरह काम कर रहे हैं।अनुमान है कि देश में 25 लाख अपंजीकृत, अनौपचारिक खाद्य प्रसंस्करण उद्यम हैं।

इनमें करीब 66 प्रतिशत ग्रामीण इलाकों में हैं तथा लगभग 80 प्रतिशत का संचालन पारिवारिक कारोबार के रूप में हो रहा है। इस योजना से उन्हें नयी प्रौद्योगिकी अपनाने, खाद्य आपूर्ति श्रृंखला में बेहतर पहुच बनाने तथा एक ब्रांड स्थापित करने में मदद मिलेगी।

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रक्षा क्षेत्र में किये गये सुधार गेम चेंजर साबित होंगे: राजनाथ

नयी दिल्ली। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने आज कहा कि मोदी सरकार द्वारा आत्मनिर्भर भारत अभियान के तहत घोषित विशेष आर्थिक पैकेज के चौथे चरण में रक्षा क्षेत्र के लिए जिन सुधारों की घोषणा की है वे ‘गेम चेंजर साबित’ होंगे।

सिंह ने आज सिलसिलेवार टि्वट कर कहा , “ मोदी सरकार द्वारा की गयी आज की घोषणा अर्थव्यवस्था को स्थिरता प्रदान करने के लिए दूरगामी उपाय साबित होगी। आयुध कारखानों का निगमीकरण सरकार की प्राथमिकता रही है इससे इनकी दक्षता बढेगी। ”

उन्होंने कहा कि रक्षा विनिर्माण के क्षेत्र में आटोमेटिक रूट से प्रत्यक्ष विदेशी निवेश की सीमा 49 से बढाकर 74 प्रतिशत की गयी है। इस निर्णय से मेक इन इंडिया के तहत भारतीय रक्षा उत्पादन क्षेत्र की वास्तविक शक्ति उभरकर सामने आयेगी। ये सुधार आने वाले समय में ‘गेम चेंजर साबित होगी’।

रक्षा मंत्री ने कहा कि नागरिक उडय्यन , काेयला और अंतरिक्ष के क्षेत्र में भी निजी भागीदारी के लिए नये अवसरों की घोषणा की गयी है। उन्होंने कहा , “ मैं इन महत्वपूर्ण सुधारों तथा आत्मनिर्भर भारत की नींव को मजबूत करने का मार्ग प्रशस्त करने के लिए प्रधानमंत्री को धन्यवाद देता हूं। ”

उल्लेखनीय है कि वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने रक्षा क्षेत्र के लिए अनेक सुधारों की घोषणा करते हुए आज कहा कि सरकार केवल देश में बने रक्षा उपकरणों की खरीद के लिए अलग से बजटीय प्रावधान करेगी। उन्होंने कहा कि हथियारों के आयात से पड़ने वाले बोझ को कम करने के लिए उन हथियारों की एक सूची तैयार करेगी जिनके आयात पर प्रतिबंध लगाया जायेगा।

साथ ही उन्होंने कहा कि उच्च प्रौद्योगिकी वाले सिस्टम की खरीद विदेशों से ही की जायेगी। यह सूची सैन्य मामलों के विभाग के साथ मिलकर तैयार की जायेगी।वित्त मंत्री ने कहा कि आयुध कारखानों के निगमीकरण से लागत में कमी आयेगी और उनके संचालन में सुधार आयेगा।

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आपदा निधि से श्रमिको के परिवहन में व्यय होने वाली राशि को खर्च करने की मिले अनुमति- भूपेश

रायपुर। छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को पत्र लिखकर श्रमिकों तथा अन्य लोगो के अंतर्राज्यीय परिवहन पर होने वाले परिवहन व्यय के भुगतान हेतु एसडीआरएफ (राज्य आपदा मोचन निधि) में समुचित प्रावधान करने का अनुरोध किया है। बघेल ने पत्र में लिखा है कि लाकडाउन से उत्पन्न परिस्थितियों के कारण अन्य राज्यों से श्रमिकों की वापसी की प्रक्रिया प्रारंभ हो चुकी है।

लगभग एक लाख 32 हजार श्रमिकों को रेल तथा बसों के माध्यम से लाने की प्रक्रिया 11 मई से प्रारंभ हो चुकी है। राज्य शासन द्वारा इसके साथ ही छत्तीसगढ़ होकर अन्य राज्यों को जाने वाले श्रमिकों हेतु भी भोजन, पानी तथा संबंधित राज्य की सीमा तक बस में छोड़े जाने के उपाय सुनिश्चित किए गए हैं।

श्रमिकों के परिवहन तथा अन्य सुविधाओं में बड़ी राशि व्यय होने की संभावना है।श्रमिकों के लिए रेल तथा बस परिवहन में हुए व्यय का भुगतान एसडीआरएफ (राज्य आपदा मोचन निधि) से किए जाने का प्रावधान वर्तमान में नहीं है।उन्होने पत्र में लिखा है कि श्रमिकों के परिवहन तथा अन्य सुविधाओं में बड़ी राशि व्यय होने की संभावना है।

इन परिस्थितियों में श्रमिकों तथा अन्य व्यक्तियों के अंतर्राज्यीय परिवहन तथा राज्य के भीतर एक स्थान से दूसरे स्थान पर होने वाले परिवहन व्यय के भुगतान हेतु एसडीआरएफ (राज्य आपदा मोचन निधि) में समुचित प्रावधान किया जाना आवश्यक है।
बघेल ने इस संबंध में केन्द्रीय गृह मंत्रालय को यथोचित निर्देश देने का अनुरोध प्रधानमंत्री मोदी से किया है।

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मोदी ने सूकी से कहा, जल्द वापस बुलाओ रोहिंग्या मुसलमान अन्यथा बढ़ जाएंगी म्यांमार की मुश्किल

भारत ने म्यांमार को छुपी चेतावनी दी है कि अगर उसने भारत और बांग्लादेश में शरण लेने वाले रोहिंग्याओं को अपने देश नहीं बुलाया तो इस पूरे इलाके में अशांति का ऐसा दौर शुरू होगा कि उसे काबू में रखना मुश्किल हो जाएगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने म्यांमार से विस्थापित रोहिंग्या समुदाय के लोगों की बंगलादेश से त्वरित, सुरक्षित एवं सतत वापसी पर जोर देते हुए रविवार को कहा कि उनकी वापसी भारत, बंगलादेश और म्यांमार समेत पूरे क्षेत्र के हित में है।

मोदी ने आसियान से जुड़े शिखर सम्मेलन और पूर्वी एशिया शिखर सम्मेलन से इतर म्यांमार की स्टेट काउंसलर आंग सान सू की के साथ द्विपक्षीय बैठक के दौरान कहा कि म्यांमार के रखाइन प्रांत से विस्थापित हुए रोहिंग्या लोगाें की त्वरित, सुरक्षित एवं सतत घर वापसी भारत, बंगलादेश और म्यांमार समेत पूरे क्षेत्र और विस्थापित लोगों के हित में है।

बताया जाता है कि 2017 में म्यांमार के सुरक्षा बलों के अभियान के कारण रखाइन प्रांत से भागकर 11 लाख रोहिंग्या शरणार्थी बंगलादेश पहुंचे थे और तब से वहीं रह रहे हैं। बंगलादेश के अधिकारियों का कहना है कि म्यांमार को रोहिंग्या शरणार्थियों की वापसी के लिए अनुकूल माहौल बनाने के वास्ते अंतरराष्ट्रीय समुदाय की व्यापक भागीदारी के बारे में गंभीरता से विचार करना चाहिए। विदेश मंत्रालय की ओर से यहां जारी विज्ञप्ति के मुताबिक दोनों नेता इस पर सहमत हुए कि भारत और म्यांमार के बीच साझीदारी लगातार मजबूत बनाने के लिए स्थिर और शांतिपूर्ण सीमा एक महत्वपूर्ण कारक है।

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अब चीन से उधार लिए गए मुहावरे को हथियार बनाकर मोदी से जूझेगा भारत का ये नेता

हाल ही ऐतिहासिक बहुमत के साथ फिर सत्ता में लौटे प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के मुकाबले चारों खाने चित हुए विपक्ष की सबसे बड़ी पार्टी अब चीन से उधार लिए गए शब्दों के जरिए भाजपा से दो—दो हाथ करेगी। कांग्रेस संसदीय दल का नेता चुने जाने के लिए हुई बैठक में कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने इंच इंच लडने का जो नया मुहावरा दिया, वह असल में चीन की दुश्मनों से लड़ने की रणनीति का हिस्सा है।

चीन में ये मुहावरा माओत्से तुंग के जमाने में तब आया जब साठ के दशक में उसका रूस के साथ भीषण युद्ध छिड़ गया था। इस युद्ध में जब चीनी सेनाएं कमजोर पड़ने लगी तो माओ ने अपनी सेनाओं को सम्बोधित करते हुए कहा था कि उन्हें घबराने की जरूरत नहीं है क्योंकि हम इंच इंच आगे बढ़ेंगे और दुश्मन को धराशायी कर देंगे। इतिहास गवाह है कि इससे चीनी सेनाओं का मनोबल इतना बढ़ गया था कि आखिर में रूस को चीन से बराबरी के स्तर पर आकर समझौता करना पड़ा था।

अपने चुनावी भाषणों में चीन की आर्थिक प्रगति का लगातार हवाला देते रहे राहुल गांधी करारी पराजय के बाद अब चीन के इस मुहावरे का इस्तेमाल अपने पार्टी कार्यकर्ताओं का मनोबल बढ़ाने के लिए कर रहे हैं। इस मुहावरे की ऐतिहासिक सच्चाई के अनुसार चीन आज भी अपने दुश्मनों से निपटने के लिए इंच इंच आगे बढ़ता है। वह दुश्मनों को इंच इंच पीछे धकेलता रहता है और कुछ ही समय में उसकी सीमाओं के बड़े भूभाग पर कब्जा करके उसे वार्ता की टेबल पर आने के लिए बाध्य कर देता है।

वैसे कांग्रेस अध्यक्ष ने कुछ गलत कहा भी नहीं क्योंकि भाजपा ने नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में कांग्रेस को पूरी तरह समेट दिया है और उसके कार्यकर्ताओं का मनोबल पूरी तरह टूट गया है। इंच इंच लड़कर ही अब कांग्रेस भाजपा से पार पा सकती है।

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विदेशी प्रचार एजेंसी ने कांग्रेस को सुझाया वंशवाद के आरोप से पीछा छुड़ाने का उपाय, राहुल ने किया अमल

राजनीतिक संवाददाता

नई दिल्ली. कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी की अध्यक्ष पद से इस्तीफा देने की पेशकश असली नहीं है। इसके पीछे उस विदेशी प्रचार एजेंसी के रणनीतिकार हैं जिन्होंने लोकसभा चुनावों में करारी हार के लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और भाजपा के इस प्रचार को जिम्मेदार ठहराया है कि कांग्रेस में युवाओं का कोई भविष्य नहीं है क्योंकि वहां वे अध्यक्ष नहीं बन सकते। एजेंसी ने मतदान के आंकड़ों का 24 घंटे में विश्लेषण करके यह बताया कि भाजपा का जिन राज्यों में मतदान प्रतिशत 50 से अधिक रहा है, उन राज्यों में कांग्रेस को एक फीसदी युवाओं के वोट भी नहीं मिले थे और इसके ​पीछे वंशवाद के आरोप हैं।

पार्टी की चुनाव रणनीति बनाने वाले कोर ग्रुप के एक वरिष्ठ सदस्य के अनुसार कांग्रेस को फिर से चुनाव जीतने लायक बनाने के लिए विदेशी एजेंसी ने सुझाव दिया है कि गांधी परिवार पार्टी की सर्वोच्च नीति निर्धारक कार्यसमि​ति के सामने हार पर नाराजगी जताए और कांग्रेस अध्यक्ष इस मौके पर इस्तीफे की पेशकश कर यह लाइन दें कि कांग्रेस गैर गांधी अध्यक्ष ढूंढ ले। इससे देश भर में यह संदेश जाएगा कि गांधी परिवार कांग्रेस की भलाई के लिए अपने हितों को भी नुकसान पहुंचाने से नहीं चूकता। इस्तीफे की पेशकश से देशभर में राहुल की छवि भी सुधरेगी कि वे पद लोलुप नहीं हैं। साथ ही उन गद्दार नेताओं की पहचान भी हो जाएगी जिन्होंने चुनाव में पार्टी को नुकसान पहुंचाया है। ऐसे नेता अध्यक्ष पद के लिए अपनी गर्दन आगे कर सकते हैं।

इधर कांग्रेस की सर्वोच्च नीति निर्धारक इकाई कार्य समिति की बैठक में पार्टी अध्यक्ष राहुल गांधी के इस्तीफे की पेशकश के तीन दिन बाद भी स्थिति साफ नहीं हुई है और वरिष्ठ नेताओं का पद नहीं छोड़ने के लिए उन्हें मनाने का सिलसिला जारी है।
कांग्रेस सूत्रों ने बताया कि कार्य समिति की बैठक में गांधी ने लोकसभा चुनाव में पार्टी की हार की जिम्मेदारी लेते हुए इस्तीफा देने की पेशकश की लेकिन पार्टी नेताओं ने एक स्वर में इस पेशकश को अस्वीकार कर दिया था। सूत्रों ने बताया कि गांधी इसके बावजूद अपने इस्तीफे पर अड़े हुए हैं हालांकि उन्हें मनाने के लिए वरिष्ठ नेता लगातार उनसे मिल रहे हैं।
सूत्रों ने बताया कि गांधी ने कार्य समिति की बैठक में कुछ शीर्ष नेताओं का नाम लेकर अपनी नाराजगी जताते हुए कहा था कि उन्होंने अपने बेटों को चुनाव लड़ाने की सिफारिश की लेकिन चुनाव में पार्टी को मजबूत स्थिति में लाने के लिए समर्पण के साथ काम नहीं किया। पार्टी ने इस लोकसभा चुनाव में वरिष्ठ नेता पी चिदम्बरम, कमलनाथ तथा अशोक गहलोत के बेटों को टिकट दिया था।

इसी बीच वरिष्ठ नेता तरुण गोगोई ने एक निजी चैनल से बातचीत करते हुए इसकी पुष्टि की है कि राहुल कार्य समिति की बैठक में बहुत नाराज हुए थे और उन्होंने पद छोडने की पेशकश की थी। सूत्रों ने बताया कि अब संकट के समाधान के लिए जल्द कार्य समिति की दूसरी बैठक बुलाई जा सकती है। गांधी को मनाने के लिए उनके आवास पर लगातार कांग्रेस के दिग्गज नेताओं की बैठक हो रही है। गांधी से आज मिलने गये प्रमुख नेताओं में कांग्रेस महासचिव एवं गांधी की बहिन प्रियंका गांधी, पार्टी महासचिव के सी वेणुगोपाल, राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत, उपमुख्यमंत्री सचिन पायलट तथा पार्टी के संचार विभाग के प्रमुख रणदीपसिंह सुरजेवाल शामिल हैं।
समझा जाता है कि गहलोत और पायलट ने कांग्रेस अध्यक्ष से राजस्थान में भी पार्टी की स्थिति के बारे में चर्चा की। गांधी ने लोकसभा चुनाव में पार्टी के प्रदर्शन की समीक्षा के लिए पार्टी की सर्वोच्च नीति निर्धारक इकाई कार्य समिति की पिछले सप्ताह हुई बैठक में हार की जिम्मेदारी लेते हुए इस्तीफा देने की पेशकश की थी लेकिन समिति ने एक स्वर में उनकी पेशकश को अस्वीकार कर दिया था। सूत्रों के अनुसार गांधी इस्तीफे पर अड़े हुए हैं और उन्होंने पार्टी महासचिव के सी वेणुगोपाल और कोषाध्यक्ष अहमद पटेल को उनका विकल्प तलाशने के लिए कहा है।

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इस राज्य में मोदी ने मरोड़ा पंजा तो राहुल ने बनाई कमल की चटनी, मतदाताओं ने लिए चटखारे

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी के दौरों के बाद राजस्थान में चुनाव प्रचार ने जोर पकड़ लिया है। प्रधानमंत्री ने जोधपुर, उदयपुर और बाड़मेर में सभायें करके न केवल कांग्रेस को उसकी कार्यशैली को लेकर कटघरे में खड़ा किया बल्कि राष्ट्रवाद, आतंकवाद, सेना और परमाणु बम की बात कहकर दावा किया कि ये सभी लोकसभा चुनाव के मुद्दे होने चाहिए। मोदी के दौरे के बाद गांधी ने भी डूंगरपुर में जनसभा को सम्बोधित किया, लेकिन मोदी के सवालों का जवाब देने के बजाए रोजगार और गरीबों को प्रति महीने छह हजार रुपये देने की बात कहकर मतदाताओं को लुभाने का प्रयास किया। गांधी ने चौकीदार को लेकर पहले जो आक्रामक नीति अपनाई थी, वह इस बार दिखाई नहीं दी तथा पूरे भाषण में वैसा जोशो खरोश भी नहीं दिखा पाये। जनसभा में भीड़ जरूर थी, लेकिन उनमें उत्साह ज्यादा दिखाई नहीं दिया।

मोदी ने प्रचार का रुख ही मोड़ दिया और जनता से प्रधानमंत्री पद का विकल्प पूछकर यह साबित करने का प्रयास किया कि उनके अलावा मैदान में दूसरा कोई नहीं है। उन्होंने कांग्रेस पर आतंकवाद, कश्मीर और सेना को लेकर कई टिप्पणियां कीं तथा बताया कि उनकी सरकार ने किस तरह पिछली गलतियों को सुधारकर राष्ट्र को नयी राह दिखाई है। भाजपा उम्मीदवारों के प्रति जनता के नजरिये की परवाह किये बिना मोदी ने यह कहकर उम्मीदवारों की नाराजगी से ध्यान हटा दिया कि कमल के निशान पर दबाया गया बटन मुझे ही मिलेगा। मोदी के अलावा गृहमंत्री राजनाथ सिंह सहित छोटे मोटे नेताओं ने प्रचार में कदम रखा लेकिन उनका ज्यादा प्रभाव दिखाई नहीं दे रहा।
गांधी के प्रचार में कूदने से पहले मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और उप मुख्यमंत्री सचिन पायलट ने सभी 25 सीटों पर सभा करके माहौल को कांग्रेस के पक्ष में कर दिया था तथा अब भी ये दोनों नेता प्रधानमंत्री की कार्यशैली से लेकर नोटबंदी, जीएसटी सहित कई मुद्दों को लेकर भाजपा को कटघरे में खड़ा करने का प्रयास कर रहे हैं। चुनाव प्रचार में कई सीटों पर जातिगत समीकरणों का ध्यान भी रखा जा रहा है, लेकिन सांसदों की आदर्श ग्राम योजना सहित उनके कामकाज को लेकर सभाओं में ज्यादा सवाल नहीं उठाये जा रहे हैं।

प्रदेश में कांग्रेस की सरकार होने के कारण संसाधन और भीड़ जुटाने में कोई ज्यादा समस्या नहीं दिख रही, लेकिन मतदाता कांग्रेस के प्रभाव में कितने आते हैं, यह तो समय ही बतायेगा। किसानों का कर्ज माफ करके कांग्रेस चुनाव में स्थानीय मुद्दों पर भी ध्यान केंद्रित करना चाहती है, लेकिन प्रधानमंत्री ने इसकी भी खुलकर पोल खोलने का प्रयास किया। कांग्रेस बेरोजगारी, मंहगाई को लेकर जनता को हो रही परेशानियों को भी जोरशोर से मुद्दा बनाकर प्रचार का रुख मोड़ने का प्रयास कर रही है। इसके अलावा राज्य सरकार के मंत्रियों को लोकसभा उम्मीदवार जिताने के लिये पूरी ताकत लगाने के निर्देश दिये हैं। विधायक भी मतदाताओं को कांग्रेस के पक्ष में गोलबंद करने का प्रयास कर रहे हैं।

भाजपा के खिलाफ विधानसभा चुनाव में जितनी नाराजगी दिखाई दे रही थी, वह अब नहीं है तथा ‘मोदी से वैर नहीं वसुंधरा तेरी खैर नहीं’जैसे नारे अब मोदी का समर्थन बढ़ा रहे हैं। राजपूत समाज की नाराजगी भी खुलकर सामने नहीं आ रही तथा गुर्जर नेताओं के भाजपा का दामन थामने से भी भाजपा की हवा मजबूत हुई है।

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इस दल ने किए सीधे सवाल, क्या आसमान से अव​तरित हुए हैं मोदी

कांग्रेस ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हेलीकाप्टर की तलाशी लेने वाले दस्ते के अधिकारी के निलम्बन पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए इसे गलत बताया और सवाल किया कि आखिर इस तरह की कार्रवाई कर क्या संदेश देने का प्रयास किया जा रहा है।

 

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अहमद पटेल ने आज ट्वीट किया “चुनाव के दौरान के कई उदाहरण हैं जब आयोग ने कांग्रेस के वर्तमान तथा पूर्व अध्यक्ष के काफिले की तलाशी की है। एसपीजी सुरक्षा प्राप्त व्यक्ति की निजी स्तर पर जांच पड़ताल नहीं की जा सकती। सवाल है कि प्रधानमंत्री के हेलीकाप्टर की जांच करने वाले अधिकारी को निलम्बित क्यों किया गया। क्या संदेश दिया जा रहा है। क्या कानून कुछ लोगों के लिए अलग ही है।

उन्होंने कहा कि जब एसपीजी सुरक्षा प्राप्त कांग्रेस नेताओं की जांच की जा सकती है तो फिर भाजपा के नेताओं पर यह नियम लागू क्यों नहीं होता है। कांग्रेस संचार विभाग के प्रमुख रणदीप सिंह सुरजेवाला ने भी इस निलम्बन को लेकर मोदी पर तीखा हमला किया और कहा “मोदी एजेंसियों का दुरुपयोग कर पूरे विपक्ष पर छापेमारी का खेल रचते है, वो 15 मिनट की चेकिंग से इतना डर गये कि चुनाव आयोग को अपने ही अफ़सर को हटाना पड़ा!

कर्नाटक में ‘ब्लैक बाक्स’ निकलने के बाद मोदी को अपना हेलीकाप्टर चेक कराने में इतनी आपत्ति क्यों?”
गौरतलब है कि मंगलवार को मोदी जब ओडिशा के संबलपुर में रैली के लिए पहुंचे तो उसी दौरान चुनाव आयोग के एक उड़न दस्‍ते ने उनके हेलिकॉप्‍टर की तलाशी ली लेकिन बाद में आयोग ने ड्यूटी में लापरवाही बरतने काे आरोप में दस्ते के प्रमुख मोहम्‍मद मोहसिन को निलंबित कर दिया। आयोग ने कहा है कि एसपीजी सुरक्षा प्राप्‍त व्‍यक्तियों के लिए तयशुदा निर्देशों का पालन नहीं किया गया है।