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Rahul ने पुण्यतिथि पर राजीव गांधी को किया नमन

नयी दिल्ली। कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने अपने पिता एवं पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की पुण्यतिथि पर नमन करते हुए उन्हें दूरदृष्टि वाला ऐसा नेता बताया जिन्होंने देश को सशक्त बनाने में अहम योगदान दिया है।

गांधी ने पूर्व प्रधानमंत्री को याद करते हुए कहा “एक सच्चे देशभक्त, उदार और परोपकारी पिता का पुत्र होने पर मुझे गर्व है। प्रधानमंत्री के रूप में राजीव जी ने देश को प्रगति के पथ पर अग्रसर किया। अपनी दूरंदेशी से देश के सशक्तीकरण के लिए उन्होंने ज़रूरी कदम उठाए।आज उनकी पुण्यतिथि पर मैं स्नेह और कृतज्ञता से उन्हें सादर नमन करता हूँ।”

कांग्रेस संचार विभाग के प्रमुख रणदीप सिंह सुरजेवाला ने भी उन्हें श्रद्धांजलि देते हुए कहा “भारत को तकनीकी दृष्टि से मजबूत व समृद्ध बनाने की सोच रखने वाले, प्रगतिशील विचार व सज्जनता के प्रतीक, दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र के सबसे युवा प्रधानमंत्री, भारत रत्न राजीव गांधी जी को उनकी पुण्यतिथि पर शत शत नमन।”

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राफेल पर झूठ के लिये पूरे देश से माफी मांगे राहुल ,योगी आदित्यनाथ

गोरखपुर। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने उच्चतम न्यायालय के फैसले के बाद राफेल विमान खरीद में झूठ बोलने के लिये आज कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी से माफी मांगने को कहा ।

मुख्यमंत्री ने यहां संवाददताओं से कहा कि राफेल विमान खरीद में कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने एक कंपनी को फायदा पहुंचाने का आरोप लगाते हुये लगातार झूठ बोला और देश की जनता को गुमराह करने की कोशिश की । उन्होंने अपने झूठ में उस देश के प्रधानमंत्री का भी जिक्र कर दिया जहां से विमान खरीदा गया है।

उन्होंनें सवाल उठाया कि इस तरह पूरे देश से झूठ बोलने वाला व्यक्ति क्या जनप्रतिनिधि होने लायक है । उन्होंने कहा कि अपने झूठ के लिये राहुल गांधी को पूरे देश से माफी मांगनी चाहिये ।

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सात सौ वर्ष पहले लिए गए मुहम्मद बिन तुगलक के इस निर्णय की याद आते ही आज भी कांप उठती है भारत की रूह

सुल्तान मुहम्मद बिन तुग़लक़ का नाम तो आप सबने इतिहास की पुस्तकों में अवश्य पढ़ा होगा। उसके वर्ष 1330 में लिए गए एक निर्णय को याद करके आज भी भारत की रूह कांप उठती है। उसने रातों—रात अचानक अपनी प्रजा को कंगाल कर दिया था क्योंकि उसने अपनी मुद्रा को बेकार घोषित कर दिया था। 21वीं शताब्दी में तीन साल पहले लिए एक ऐसे ही निर्णय की वजह से कांग्रेस प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को तुगलक साबित करने की कोशिश कर रही है।

कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने नोटबन्दी की तीसरी सालगिरह पर कहा है की देश पर नोटबंदी का आतंकी हमला करने वाले गुनाहगारों को अभी कटघरे में खड़ा नहीं किया गया और देश की जनता को इस अन्याय से अभी न्याय नहीं मिला है।
गांधी ने शुक्रवार को ट्वीट किया “तीन साल पहले आज ही के दिन नोटबंदी की गयी थी जिसके कारण भारतीय अर्थव्यवस्था ध्वस्त हो गई, कई लोगों की जानें गई, लाखों छोटे-मोटे कारोबारी बर्बाद हो गये लाखों भारतीय बेरोजगार हुए। जिन लोगों ने देश पर यह घातक हमला किया उन गुनाहगारों को अभी कटघरे में खड़ा नहीं किया गया और देश की जनता को इस अन्याय से अभी न्याय नहीं मिला है।।”
इस बीच, पार्टी महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा ने भी सरकार पर तीखा हमला करते हुए कहा, “नोटबंदी को तीन साल हो गए। सरकार और इसके नीम हक़ीमों द्वारा किये गये ‘नोटबंदी- सारी बीमारियों का शर्तिया इलाज’ के सारे दावे एक-एक करके धराशायी हो गए।”
उन्होंने नोटबंदी को एक आपदा बताया और कहा “नोटबंदी एक आपदा थी जिसने हमारी अर्थव्यवस्था नष्ट कर दी। इस ‘तुग़लकी’ कदम की जिम्मेदारी अब कौन लेगा।”

कांग्रेस संचार विभाग के प्रमुख रणदीप सिंह सुरजेवाला ने कहा कि तीन साल पहले लिए गए इस फैसले की सजा देश आज भी भगुत रहा है। उन्होंने कहा “सुल्तान मुहम्मद बिन तुग़लक़ ने वर्ष 1330 में देश की मुद्रा को बेकार कर दिया था। आठ नवंबर, 2016 को आज के समय के तुग़लक़ ने भी यही किया। तीन साल बीत गए पर देश अभी भी इसकी भुगत रहा है क्योंकि-अर्थव्यवस्था चौपट हो गई, रोजगार खत्म हो गया और न आतंकवाद रुका, न जाली नोटो का कारोबार, फिर कौन है इसका जिम्मेदार?”

कांग्रेस ने नोटबन्दी के तीन साल पूरे होने पर शुक्रवार को मोदी सरकार की नीतियों के विरोध में रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया के सामने जमकर प्रदर्शन किया। कांग्रेस के कार्यकर्ताओं ने राजधानी के संसद मार्ग स्थित रिजर्व बैंक कार्यालय के सामने सुबह में प्रदर्शन किया। ये कार्यकर्ता हाथों में तख्तियां और बैनर लिए मोदी सरकार की नीतियों के खिलाफ नारेबाजी कर रहे थे। प्रदर्शनकारियों में महिलाएं और नोटबन्दी से प्रभवित आम आदमी भी शामिल थे। प्रदर्शनकारी देश की खराब अर्थव्यस्था के लिए मोदी सरकार को जिम्मेदार ठहरा रहे थे। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि वे आठ नवंबर को अपने जीवन मे भूल नही सकते है क्योंकि उन्हें नोटेबन्दी का दंश झेलना पड़ा था। नोटेबन्दी से लाखों नौकरियां चली गयी और आर्थिक विकास प्रभावित हुआ। असंगठित क्षेत्र बुरी तरह प्रभावित हुए और कई छोटी कम्पनियां बर्बाद हो गई।

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राहुल गांधी ने किया आत्मसमर्पण, फिर जमानत पर मुक्त

पटना। मानहानि के एक मामले में कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने बिहार की राजधानी पटना स्थित एक विशेष अदालत में आत्मसमर्पण किया, जहां आरोप का सारांश सुनाने के बाद उन्हें जमानत पर मुक्त कर दिया गया।

सांसदों एवं विधायकों के मामले की सुनवाई के लिए गठित विशेष न्यायालय के न्यायाधीश कुमार गुंजन की अदालत में आत्मसमर्पण करने के साथ ही गांधी की ओर से उन्हें जमानत पर मुक्त किये जाने की प्रार्थना की गई थी। याचिका पर बहस पटना उच्च न्यायालय के वरीय अधिवक्ता शशि अनुग्रह नारायण ने की।

मामले के शिकायतकर्ता बिहार के उप मुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी की ओर से पटना उच्च न्यायालय के अधिवक्ता प्रमोद कुमार झा अदालत से निवेदन किया कि गांधी न्यायालय में सशरीर उपस्थित हैं इसलिए आज ही उन्हें आरोप का सारांश सुना दिया जाये और आरोप तय करने की प्रक्रिया पूरी कर ली जाये। अदालत ने शिकायतकर्ता की प्रार्थना स्वीकार की और खुली अदालत में गांधी को उनपर लगाये गये मानहानि के आरोपों का सारांश अंग्रेजी में पढ़कर सुनाया।

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लोकसभा चुनावों में बुरी तरह हार गई कांग्रेस अब संसद में गाएगी राग भैरवी, देश को बताएगी सच्चाई

लोकसभा चुनावों में भाजपा के हाथों करारी पराजय झेल चुकी कांग्रेस एक माह बीतने के साथ ही फिर से उठ खड़ी होकर संसद में ताल ठोक रही है कि वह राफेल लड़ाकू विमान सौदे में घोटाले की सच्चाई जनता के सामने लाकर ही दम लेगी। कांग्रेस के ऐलान को राजनीतिक क्षेत्रों में बेहद आश्चर्य के साथ देखा जा रहा है क्योंकि चुनाव अभियान में कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने राफेल विमान सौदे को मुख्य मुद्दा बनाया था और जनता ने उसे नकार दिया था।

चुनावों में बेहद शर्मनाक ढंग से पराजित होने के बाद राजनीतिक जानकार मान रहे थे कि कांग्रेस अब कभी राफेल विमान सौदे का नाम भी नहीं लेगी, लेकिन वह एक माह बाद ही फिर से राफेल राग गाने पर तुल गई है। पार्टी ने राफेल को लेकर अपने रुख पर कायम रहते हुए गुरुवार को कहा कि इस सौदे में घोटाला हुआ है और पार्टी संसद के भीतर तथा बाहर इसकी सच्चाई सामने लाने के लिए संघर्ष करेगी।

राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद के संसद के दोनों सदनों को संयुक्त रूप से संबोधित करने के बाद कांग्रेस नेता गौरव गोगोई ने संसद भवन परिसर में कहा कि राफेल में चोरी हुई है और सरकार इसको छिपा नहीं सकती है। कांग्रेस इसकी सच्चाई जनता के सामने लाएगी। उन्होंने कहा कि कांग्रेस राफेल की वास्तविकता का आइना देश को दिखाएगी। इसमें हुए भ्रष्टाचार की सच्चाई सामने लाने की अपनी लड़ाई पार्टी जारी रखेगी और संसद के भीतर तथा बाहर इसकी असलियत सबके सामने रखने के लिए सरकार पर दबाव बनाएगी।

कांग्रेस नेता ने कहा कि राष्ट्रपति के अभिभाषण में मुजफ्फरपुर में बच्चों की मौत की बात नहीं है। देश का किसान मजदूर और गरीब परेशान है, जिसके बारे में सरकार को चिंता ही नहीं है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति के भाषण के शब्द अच्छे हैं लेकिन उसमें जो बातें कही गई हैं वह सच्चाई के विपरीत है।

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एक माह का मौन व्रत रखकर चुनावी हार से मिले घावों का उपचार कराएगी ये राजनीतिक पार्टी

सत्रहवीं लोकसभा के चुनाव में कांग्रेस की करारी पराजय को लेकर खलबली मची हुई है। पार्टी ने तय किया है कि वह एक माह का मौन व्रत रखकर चुनावी हार से मिले घावों का उपचार कराएगी, उसके बाद वह नए सिरे से मैदान में जाकर मोदी सरकार के खिलाफ अभियान चलाएगी।

इसके लिए पार्टी ने अपने सभी प्रवक्ताओं को मुंह पर उंगली रखने का फरमान सुना दिया है। पार्टी अध्यक्ष राहुल गांधी और कई अन्य नेताओं के इस्तीफे के बाद कांग्रेस ने अपने सभी प्रवक्ताओं से कहा है कि वह टेलीविजन की बहस से एक महीने तक दूर रहें। कांग्रेस का यह फरमान पार्टी के मुख्य प्रवक्ता एवं मीडिया प्रभारी रणदीप सुरजेवाला ने ट्वीट के जरिए जारी किया। सुरजेवाला ने ट्वीट में लिखा “कांग्रेस ने एक माह तक टेलीविजन पर होने वाली चर्चाओं में प्रवक्ताओं को नहीं भेजने का निर्णय लिया है। सभी मीडिया चैनलों, संपादकों से अनुरोध है कि वह अपने कार्यक्रमों में कांग्रेस के प्रतिनिधियों को नहीं रखें।

इधर कांग्रेस पार्टी के लोकसभा में संसदीय दल का नया नेता चुनने को लेकर एक जून को पार्टी के संसदीय दल की बैठक बुलायी गयी है। सूत्रों के अनुसार संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन की अध्यक्ष सोनिया गांधी की अध्यक्षता में लोकसभा के केंद्रीय कक्ष में संसदीय दल की बैठक होगी जिसमें पार्टी के नव निर्वाचित सांसद और राज्य सभा सांसद उपस्थित होेंगे। कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी के बैठक को संबोधित करने कयास लगाये जा रहे हैं।

यह भी आशा की जा रही है कि वह लोकसभा में संसदीय दल के नये नेता का चुनाव करेंगे। लोकसभा चुनाव के नतीजों के बाद कांग्रेस संसदीय दल की यह पहली बैठक होगी। इस चुनाव में भारतीय जनता पार्टी ने 543 सदस्यीय सदन में 303 सीटें हासिल कर ऐतिहासिक जीत दर्ज की जबकि कांग्रेस ने केवल 52 सीटें जीतीं हैं। राहुल गांधी के चुनाव में पार्टी के खराब प्रदर्शन को लेकर अध्यक्ष के पद से इस्तीफा देने की पेशकश के एक हफ्ते बाद यह बैठक होगी।

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कांग्रेस ने खोज निकाले पाटी को चुनाव हरवाने वाले गद्दार, अब नपेगी इन वरिष्ठ नेताओं की गर्दन

राजनीतिक संवाददाता
नई दिल्ली. इतिहास की सबसे करारी पराजय के बाद उपजी परिस्थितियों से जूझ रही कांग्रेस ने उन गद्दारों को खोज निकाला है जिन्होंने पार्टी को हराने के लिए अंदरखाने काम किया था। कार्यसमिति की पिछले दिनों हुई बैठक में पार्टी के खिलाफ काम करने वाले इन वरिष्ठ नेताओं को कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी ने यह कहकर चौंका दिया था कि वे जानती हैं कि कांग्रेस के हत्यारे इसी कमरे में बैठे हैं।

कांग्रेस सूत्रों के अनुसार शनिवार को यहां हुई कार्य समिति की बैठक में प्रियंका ने कठोर शब्दों का इस्तेमाल किया और बैठक में मौजूद पार्टी के कुछ शीर्ष नेताओं पर उनका लिए बरसते हुए कहा,“कांग्रेस के हत्यारे इसी कमरे में बैठे हैं।”
सूत्रों ने बताया कि प्रियंका ही नहीं पूरा गांधी परिवार इन नेताओं की काम करने की शैली से नाराज है। करीब चार घंटे चली बैठक में इसी नाराजगी का इजहार करते हुए सोनिया गांधी ने एक शब्द नहीं बोला। उनकी चुप्पी भी इशारा कर रही थी कि पार्टी को कमजोर करने में उनके ही कुछ नजदीकी लोग शामिल है।

सूत्रों ने बताया कि प्रियंका का गुस्सा तब फूटा जब राहुल गांधी ने बैठक में मौजूद कुछ वरिष्ठ नेताओं के नाम लिए और कहा कि उन्होंने अपने बेटों को टिकट देने के लिए दबाव बनाया था लेकिन चुनाव के समय जो संकट सामने था पार्टी को उससे बाहर निकालने के लिए कोई ठोस प्रयास नहीं किया।

सूत्रों ने यह भी कहा कि गांधी को एक महीने तक उनके इस्तीफे के कदम के बारे में विचार करने की राय भी प्रियंका ने ही दी थी। यहां तक कहा जा रहा है कि पिछले दो दिन से वह गांधी के संपर्क में हैं और उन्होंने कुछ काग्रेस नेताओं की कार्यशैली पर अपनी नाराजगी दर्ज की है। पिछले दो दिन से सोनिया गांधी, राहुल गांधी तथा प्रियंका गांधी समिति की बैठक के बाद पैदा हुई राजनीतिक स्थिति पर लगातार परस्पर विचार विमर्श कर रहे हैं। राहुल गांधी ने आवास पर मिलने आए पार्टी के कई वरिष्ठ नेताओं से मुलाकात की। इन नेताओं में श्रीमती सोनिया गांधी, प्रियंका गांधी के अलावा राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत, उप मुख्यमंत्री सचिन पायलट तथा पार्टी महासचिव के सी वेणुगोपाल शामिल थे।

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इसलिए राहुल गांधी के जीजा रॉबर्ट वाड्रा की जमानत रद्द करवाना चाहता है प्रर्वतन निदेशालय

नयी दिल्ली। दिल्ली उच्च न्यायालय ने कांग्रेस महासचिव प्रियंका वाड्रा के पति रॉबर्ट वाड्रा को धन शोधन मामले में मिली अग्रिम जमानत को प्रर्वतन निदेशालय(ईडी) की ओर से रद्द करने की मांग पर सोमवार को नोटिस जारी करके उनसे 17 जुलाई तक जवाब मांगा।

वाड्रा से जुड़े मामलों की जांच कर रहे ईडी ने न्यायालय में दायर याचिका में कहा कि जमानत को रद्द करना मामले की जांच की दृष्टि से उचित रहेगा। उसने साक्ष्यों के साथ छेड़छाड़ किये जाने की आशंका व्यक्त करते हुए धन शोधन मामले में सह आरोपी एवं वाड्रा के करीबी मनोज अरोड़ा को मिली अग्रिम जमानत को भी चुनौती दी।


ईडी ने पूछताछ में सहयोग नहीं करने का आरोप लगाते हुए वाड्रा को हिरासत में दिये जाने की मांग की है। उसने कहा कि धन शोधन मामले की पूरी सच्चाई का पता लगाने के लिए वाड्रा से पूछताछ करना आवश्यक है। सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने ईडी का पक्ष रखते हुए कहा, “वाड्रा ने पूछताछ के दौरान सहयोग नहीं किया अत: यह आवश्यक है कि उन्हें हिरासत में लेकर पूछताछ की जाए।” न्यायमूर्ति चंद्र शेखर ने दोनों को नोटिस जारी करके 17 जुलाई तक जवाब दाखिल करने का आदेश दिया।


इससे पहले निचली अदालत ने एक अप्रैल को वाड्रा और उनके सहयोगी मनोज को अदालत की अनुमति के बिना देश छोड़कर नहीं जाने,जांच में सहयोग करने और साक्ष्यों के साथ छेड़छाड़ नहीं करने की शर्त पर अग्रिम जमानत दी थी। दोनों ने अग्रिम जमानत के लिए पांच लाख रुपये का बांड और इतनी की राशि का मुचलका भरा था।

ईडी का आरोप है कि वाड्रा के लिए लंदन में 19 लाख पाउंड की संपत्ति खरीदी गई थी, लेकिन उन्होंने अपने आयकर रिटर्न में इसका खुलासा नहीं किया। इस मामले में ईडी 58 घंटे से ज्यादा वाड्रा से पूछताछ कर चुकी है। वाड्रा के अलावा इस मामले में ईडी ने कई और लोगों से पूछताछ की थी। फिलहाल दोनों आरोपी जमानत पर हैं।

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ये तो ऐसे ही चलेगी फिर इस्तीफा क्यों किया जाए स्वीकार?

कांग्रेस की सर्वोच्च नीति निर्धारक इकाई कांग्रेस कार्य समिति ने पार्टी अध्यक्ष राहुल गांधी को संगठन में आमूलचूल परिवर्तन करने के लिए अधिकृत किया है और उनके नेतृत्व पर विश्वास जताते हुए उनकी इस्तीफे की पेशकश को खारिज कर दिया।

लोकसभा चुनाव में कांग्रेस के प्रदर्शन की समीक्षा को लेकर कार्य समिति की बैठक के बाद आयोजित एक संवाददाता सम्मेलन में कांग्रेस के वरिष्ठ नेता एके एंटनी, गुलाम नबी आजाद, केसी वेणुगोपाल तथा रणदीपसिंह सुरजेवाला ने यह जानकारी दी।
उन्होंने कहा कि बैठक में लोकसभा चुनाव में पार्टी के प्रदर्शन पर गहन विचार विमर्श किया गया जिसमें कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी, ज्योतिरादित्य सिंधिया सहित लगभग सभी प्रदेशों के प्रभारी महासचिवों ने अपने विचार व्यक्त किए। बैठक में 30 से ज्यादा नेताओं ने अपने विचार रखे और संगठन को मजबूत करने के लिए गांधी के नेतृत्व में नए सिरे से काम करने का सुझाव दिया गया।

कांग्रेस नेताओं ने कहा कि बैठक में लोकसभा चुनाव में पार्टी के प्रदर्शन पर चर्चा के बीच श्री गांधी ने अपने विचार रखने शुरू कर दिए। उन्होंने चुनाव में पार्टी के लिए काम करने वाले कार्यकर्ताओं तथा उम्मीदवारों और कांग्रेस को समर्थन देने वाले देशवासियों का धन्यवाद किया और कहा कि इस चुनाव में कांग्रेस के प्रदर्शन के लिए वह नैतिक रूप से जिम्मेदार हैं इसलिए पद से इस्तीफा दे रहे हैं।

कांग्रेस नेताओं ने कहा कि जैसे ही गांधी ने इस्तीफा देने की पेशकश की, कार्यसमिति के सभी सदस्यों ने एक स्वर में इस पर अपनी असहमति व्यक्त की और कहा कि गांधी ने पांच साल तक लगातार पार्टी को मजबूत बनाने के लिए काम किया है इसलिए पार्टी को उनकी जरूरत है और उन्हें पद से इस्तीफा नहीं देना चाहिए। कार्यसमिति के सभी सदस्यों ने एकजुट होकर गांधी की पेशकश को अस्वीकार कर दिया।

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कहां से आएगा 72000 वाली ‘न्याय’ स्कीम के लिए इतना पैसा, राहुल गांधी ने कहा- इनसे वसूलेंगे और जनता में बांट देंगे

नई दिल्ली। कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने अपने चुनाव घोषणा—पत्र में ‘न्याय’ स्कीम का वादा किया है। इसके तहत 72000 हजार रुपए सालाना दिए जाएंगे। यानी कि एक महीने के कम से कम 6000 रुपए। इस लोकलुभावन योजना से पूरा देश चौंक गया। हर कोई ये ही बात करने लगा कि ये कैसे होगा।

 

एजेंसी के हवाले से वायरल हुई एक खबर के मुताबिक राहुल गांधी ने असम के बोखाखाट इलाके में एक रैली को संबोधित करते हुए कहा कि जो पैसा अनिल अंबानी, नीरव मोदी, विजय माल्या, मेहुल चौकसी ने उड़ाया है, उनसे वसूली की जाएगी और वो पैसा जनता को ‘न्याय’ के तहत बांट दिया जाएगा। भले ही यह बात राहुल ने मजाक में कही हो, लेकिन लगता है ये ही सच है। इसके बाद सैम पित्रोदा ने संकेत दिया कि न्याय के लिए पैसे का जुगाड़ करने के लिए आम आदमी को थोड़ा कष्ट सहना होगा। मतलब आम आदमी पर और टैक्स लगाकर पैसा जुटाया जाएगा। बाद में राहुल गांधी ने कहा, नहीं आम आदमी पर टैक्स नहीं लगाएंगे।

ठीक ऐसा ही वादा नरेन्द्र मोदी सरकार ने भी किया था। हालांकि उनका कहने का तरीका अलग था। मोदी ने एक रैली में कहा था कि अगर देश का सारा कालाधन वापस लौट आए तो हर भारतीय के खाते में 15 लाख रुपए आ सकते हैं। और वहां मौजूद जनता से सवाल भी पूछा,’ आने चाहिए कि नहीं’। बस यहीं से इस बात का जिक्र होना शुरू हो गया कि सबके खाते में 15 लाख रुपए आएंगे। बीजेपी ने वादा किया है।

हालांकि खुद बीजेपी ने भी लंबे समय तक यह साफ नहीं किया कि ये वादा था या कोई जुमला। अमित शाह ने जरूर एक टीवी चैनल के इंटरव्यू में कहा था कि 15 लाख देने की बात कहना तो ‘जुमला’ था। इसके बाद तो कांग्रेस ने मोदी के कार्यकाल में हजारों बार जुमला के नाम पर बीजेपी की टांग खींची।

कुल मिलाकर यही निष्कर्ष निकाला जा सकता है कि पहले बीजेपी ने 15 लाख और अब कांग्रेस के 72000, चुनावी वादे ही लगते हैं।