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भारत बनेगा विश्व का आकर्षक विनिर्माण केन्द्र

नयी दिल्ली। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने शनिवार को माना कि प्रवासी मजदूरों के देशव्यापी घरवापसी से कोरोना विषाणु के संक्रमण फैलने तथा उद्योगों के पुन: चालू होने की राह में चुनौती आयेगी लेकिन सरकार के उपायों से देश इन चुनौतियों से आगे बढ़ेगा और विश्व में एक आकर्षक विनिर्माण केन्द्र के रूप में उभरेगा।

भाजपा के आर्थिक मामलों के राष्ट्रीय प्रवक्ता गोपाल कृष्ण अग्रवाल ने यहां संवाददाताओं से एक संवाद कार्यक्रम में यह बात कही। श्री अग्रवाल ने कहा कि केन्द्र सरकार ने कोविड-19 वैश्विक महामारी से निपटने के लिए मार्च से ही लगातार अनेक कदम उठाये हैं और तेजी से बदल रही परिस्थितियों की दिन-प्रतिदिन के हिसाब से समीक्षा करके चरणबद्ध ढंग से नये नये फैसले तुरंत कर रही है।

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महाराष्ट्र की सत्ता के लिए गड़करी पर डोरे डाल रही है कांग्रेस, पटेल पहुंचे गडकरी के द्वार

महाराष्ट्र में शिवसेना और भाजपा के बीच जारी रस्साकसी के बीच कांग्रेस ने सत्ता की आस में मोदी सरकार के वरिष्ठ मंत्री नितिन गड़करी पर डोरे डालना शुरू कर दिया है। इसी सिल​सिले में वरिष्ठ कांग्रेस नेता एवं पार्टी अध्यक्ष सोनिया गांधी के भरोसेमंद सहयोगी अहमद पटेल ने बुधवार को यहां केन्द्रीय मंत्री एवं भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के पूर्व अध्यक्ष नितिन गडकरी से मुलाकात की।

कांग्रेस में पर्दे के पीछे के समीकरणों को सेट करने में माहिर पटेल ने हालांकि बाद में कहा कि उन्होंने गडकरी के साथ बातचीत में महाराष्ट्र राजनीति के बारे में कोई चर्चा नहीं की। उन्होंने कहा, “मैंने महाराष्ट्र का ‘म’ तक नहीं कहा।” पटेल ने कहा, “गडकरी से मेरी मुलकात महाराष्ट्र की राजनीति के बारे में नहीं थी। मैं केन्द्रीय मंत्री के पास महाराष्ट्र के किसानों के मुद्दे पर चर्चा करने के लिए गया था।” गडकरी और पटेल की मुलाकात का महत्व इस बात से और बढ़ गया है कि गडकरी को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का करीबी माना जाता है और शिवसेना के नेताओं ने इस गतिरोध के समाधान के लिए संघ के नेतृत्व एवं गडकरी की मध्यस्थता का आग्रह किया है।

महाराष्ट्र में सरकार के गठन को लेकर शिवसेना एवं भाजपा में जारी खींचतान के बीच गडकरी के निवास पर सोमवार को दो महत्वपूर्ण बैठकें हुईं हैं। भाजपा के मौजूदा अध्यक्ष अमित शाह और महाराष्ट्र के निवर्तमान मुख्यमंत्री देवेन्द्र फड़नवीस ने गडकरी के साथ चर्चा की थी। उधर कांग्रेस के खेमे में पार्टी अध्यक्ष सोनिया गांधी एवं राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) के अध्यक्ष शरद पवार के बीच भी महाराष्ट्र की स्थिति पर मंत्रणा हुई थी।

महाराष्ट्र विधानसभा के 21 अक्टूबर काे हुए चुनाव का 24 अक्टूबर को परिणाम आया जिसमें भाजपा-शिवसेना गठबंधन को पूर्ण बहुमत हासिल हुआ है। लेकिन शिवसेना मुख्यमंत्री पद एवं विभागों में 50-50 के फॉर्मूले के आधार पर सरकार बनाने की मांग पर अड़ी हुई है जबकि भाजपा मुख्यमंत्री पद, गृह मंत्रालय एवं विधानसभा अध्यक्ष के पद के लिए किसी भी प्रकार का समझौता करने को तैयार नहीं है। महाराष्ट्र में नौ नवंबर को नयी सरकार के शपथग्रहण की तैयारियां होने की खबर है।

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केबीसी के अगले एपिसोड में पूछा जा सकता है ये सवाल, किस पार्टी को मिला है भारतीय जासूसी पार्टी का खिताब

केबीसी में ​अमिताभ बच्चन आजकल राजनीति से जुड़े सवाल अधिक पूछ हैं और अक्सर ऐसे सवालों का जवाब देने में प्रतिभागी नाकाम रहते हैं। ऐसे ही सवालों की लिस्ट में एक नया सवाल जुड़ने वाला है जिसे केबीसी के अगले एपिसोड में कभी भी पूछा जा सकता है क्योंकि ये सवाल ऐसा ही है जिसका जवाब बहुत कम लोग याद रखेंगे। सवाल ये हो सकता है कि भारत में हाल ही किस पार्टी को भारतीय जासूसी पार्टी का खिताब मिला है।

क्योंकि एक दिन पहले ही कांग्रेस ने केन्द्र में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेतृत्व वाली सरकार पर आरोप लगाया कि उसे इस साल अप्रैल-मई में बीते लाेकसभा चुनावों के समय इजरायली साॅफ्टवेयर पिगैसस के माध्यम से नेताओं, पत्रकारोंं एवं सामाजिक कार्यकर्ताओं की जासूसी कराये जाने की पूरी जानकारी थी और वह इस मामले में रहस्यमयी एवं षड़यंत्रकारी चुप्पी साधे हुए है।
कांग्रेस के संचार विभाग के प्रमुख रणदीप सिंह सुरजेवाला ने संवाददाता सम्मेलन में अपने आरोपों के समर्थन में कुछ दस्तावेज पेश करते हुए कहा, “अबकी बार जासूस सरकार।” उन्होंने कहा कि फेसबुक एवं व्हाट्सएप के मालिक ने 17 मई को अपनी रिपोर्ट में केन्द्र सरकार के सूचना प्रौद्योगिकी विभाग को इस बारे में जानकारी दे दी थी। उन्होंने कहा कि जासूसी के लिए इजरायल निर्मित जिस पिगैसस सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल किया गया, उसे निर्माता कंपनी केवल एवं केवल सरकार एवं उसकी सुरक्षा एजेंसियों को ही बेचती है।

सुरजेवाला ने रिपोर्ट के आधार पर यह दावा भी किया कि पिगैसस की जासूसी निगाह से नेशनल इन्फॉर्मेटिक्स सेंटर (एनआईसी) और विदेश संचार निगम लिमिटेड भी प्रभावित रहे हैं। इसका मतलब यह है कि कोई भी जासूसी के दायरे से अछूता नहीं था। उन्होंने कहा कि सरकार यह सब जानने के बावजूद एक रहस्यमयी एवं षड़यंत्रकारी चुप्पी साधे रही। अमेरिका में मामला 30 अक्टूबर को सामने आने के बाद संचार एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री रविशंकर प्रसाद ने ट्वीटर पर अगले दिन कहा कि उन्होंने कंपनी से जानकारी मांगी है ।

उन्होंने कहा कि आज तक सरकार ने इस बारे में कुछ भी स्पष्ट जवाब नहीं दिया है और पत्रकारों एवं संपादकों पर दबाव डाल कर सूत्रों के हवाले के झूठी बातें छपवा रही है। उन्होंने सरकार से पूछा कि वह बताये कि क्या चुनाव के लिए उसने राजनेताओं एवं पत्रकारों की जासूसी करवायी। क्या यह टेलीग्राफ अधिनियम और सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम का उल्लंघन नहीं है। केन्द्र सरकार ने किसके कहने पर पिगैसस की खरीद एवं उसके गैरकानूनी इस्तेमाल की इजाजत दी। क्या यह काम प्रधानमंत्री, राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार या गृहमंत्री ने किया था। केन्द्र सरकार ने इस पर रहस्यमयी चुप्पी क्यों साधे रखी। क्या सरकार इसके जिम्मेदार मंत्रियों या अधिकारियों पर कोई कार्रवाई करेगी। उन्होंने कहा कि जिस प्रकार से इस मामले में भाजपा की संलिप्तता उजागर हुई है उसके बाद पार्टी के नाम का अर्थ अब भारतीय जासूस पार्टी हो गया है।

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राष्ट्रपति शासन की धमकी से बिफरी शिवसेना, बोली—क्या राष्ट्रपति आपकी जेब में है

भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के इस बयान पर महाराष्ट्र में सात नवंबर तक नयी सरकार का गठन नहीं होता है तो वहां राष्ट्रपति शासन लग सकता है, पर जोरदार प्रतिक्रिया करते हुए शिवसेना ने शनिवार को कहा कि क्या राष्ट्रपति आपकी जेब में है और राष्ट्रपति शासन की धमकी महाराष्ट्र की जनता के जनादेश का अपमान है।

शिवसेना ने अपने मुखपत्र ‘सामना’ में एक संपादकीय में ‘क्या राष्ट्रपति आपकी जेब में है? महाराष्ट्र का अपमान’ में कहा कि भाजपा के मंत्री सुधीर मुनगंतीवार का यह धमकी भरा बयान “असंवैधानिक और लोकतंत्र के खिलाफ है।”
शिवसेना ने कहा ‘‘यह मुगल काल में जारी किए जाने वाले फरमानों जैसा है और कानून तथा संविधान किसी के भी गुलाम नहीं है। महाराष्ट्र की मौजूदा राजनीतिक स्थिति के लिए हम जिम्मेदार नहीं हैं और राज्य की जनता भी यह जानती है। हमें पता है कि कानून और संविधान क्या होता है।”

संपादकीय में कहा ‘‘श्री मुनगंतीवार के इस तरह के बयान इस बात के सबूत है कि भाजपा और उनके मन में कितनी कड़वाहट पनप रही है। क्या राष्ट्रपति भाजपा के नियंत्रण में है अथवा राष्ट्रपति की मुहर भाजपा कार्यालय में है कि उसका इस्तेमाल राज्य में सरकार नहीं बनने की दिशा में किया जाएगा और महाराष्ट्र में राष्ट्रपति शासन लगाया जा सकता है।”

गौरतलब है कि कल पूर्व मंत्री और भाजपा नेता मुनगंतीवार ने एक टेलीविजन चैनल में कहा था कि अगर महाराष्ट्र में सात नवंबर तक सरकार नहीं बनती है तो वहां राष्ट्रपति शासन लगाया जा सकता है और और सरकार नहीं बनने देने की दिशा में शिवसेना की वह मांग है जिसमें वह ढाई वर्षों के लिए अपना मुख्यमंंत्री बनाना चाहती है।
शिवसेना ने संपादकीय में कहा “सवाल यह है कि आखिर महाराष्ट्र में सरकार क्यों नहीं बन रही है और इसका जवाब कौन देगा? भाजपा नेता की इस घोषणा के लिए महाराष्ट्र की जनता को जिम्मेदार ठहराया जाना चाहिए और क्या धमकी मुगल काल के धमकी भरे फरमानों जैसी नहीं है।”

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अगर ये कम्पनी ऐसा नहीं करती तो महाराष्ट्र में तीन चौथाई बहुमत से जीत जाती भाजपा!

दो राज्यों में हुए चुनाव के बाद देश में फिर इस बात की चर्चा जोरों पर है कि अगर पारले कम्पनी ने कर्मचारियों की छंटनी नहीं की होती तो महाराष्ट्र में अकेली भाजपा को बहुमत मिलना ​तय था। हरियाणा में भी नौ​करियां जाने के असर से ही भाजपा 41 सीट पर सिमट गई। हाल ही संपन्न हुए विधानसभा चुनावों में महाराष्ट्र में शरद पवार की राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी और महज 11 महीने पहले बनी दुष्यंत चौटाला की अगुवाई वाली जननायक जनता पार्टी ने उम्दा प्रदर्शन किया। लोकसभा चुनाव में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अगुवाई में बीजेपी को जैसा प्रचंड बहुमत मिला था, उन्हें वैसी ही अपेक्षाएं इन दोनों राज्यों के विधानसभा चुनावों में भी थीं।
लेकिन इन चुनावों में क्षेत्रीय पार्टियों के प्रदर्शन ने भाजपा को सीधी चुनौती पेश की है। हालांकि ऐसा कहना अभी सही नहीं होगा क्योंकि कई राज्यों में अभी क्षेत्रीय पार्टियां नहीं हैं। दिसंबर 2018 में तीन राज्यों में जो चुनाव हुए थे उस समय बीजेपी के ख़िलाफ़ कांग्रेस को समर्थन मिला था। जहां जहां बीजेपी की ज़मीन कमज़ोर है, वहां क्षेत्रीय पार्टियां ही उसका फायदा उठाकर चुनौती पेश करती हैं। ऐसे में यह कह सकते हैं कि जहां कांग्रेस कमज़ोर पड़ गई है या न के बराबर है, वहां बीजेपी को टक्कर देने के लिए क्षेत्रीय पार्टियां ही उभर कर सामने आती हैं क्योंकि राजनीति में बहुत दिनों तक वैक्यूम नहीं रहता है। महाराष्ट्र और हरियाणा के चुनाव परिणाम में क्षेत्रीय दलों के बेहतर प्रदर्शन करने के बाद भी नहीं लगता कि आगामी दिनों में क्षेत्रीय दल मोदी के प्रभुत्व को रोकने में सफल हो सकते हैं।

दरअसल क्षेत्रीय पार्टियों का वर्चस्व राज्यों के चुनाव तक ही सीमित रहा है। मोदी राष्ट्रीय स्तर के नेता हैं। ऐसे में हो सकता है कि राज्यों में क्षेत्रीय पार्टियों से आपको समझौता करना पड़े लेकिन केन्द्र की राजनीति में उनका (क्षेत्रीय पार्टियों का) प्रभाव गौण ही रहेगा।
दिल्ली और झारखंड में विधानसभा चुनाव होने हैं, इसके बाद अगले साल बिहार में चुनाव होंगे। ​नज़रें ​बिहार की ओर लगी है। वहां किस तरह के समीकरण उभर कर सामने आते हैं क्योंकि नीतीश कुमार की जेडीयू भी एक महत्वपूर्ण क्षेत्रीय पार्टी है। बीजेपी को चुनौती देने के लिए क्षेत्रीय पार्टियों को कहीं ना कहीं कांग्रेस के साथ आना होगा और यह संभव नहीं लगता। तीसरे मोर्चे के राह में भी कई रोडे हैंं। समस्या यह है कि जो क्षेत्रीय दल अपने अपने क्षेत्र में महत्व और प्रभाव रखते हैं, जहां उनका जनाधार होता है, उनके पास नेतृत्व भी होता है, ऐसे में जब वह बीजेपी से गठबंधन करती हैं तो फिर तीसरे मोर्चे का वि​कल्प बहुत कम बच जाता हैं फिर कुछ दल साथ में आकर तीसरा मोर्चा बना लेते हैं लेकिन उससे वो बात नहीं बन पाती हैं समस्या यह है कि साथ आने और एक दो चुनाव साथ लड़ने के बाद वो फिर अलग अलग हो जाते हैं और बीजेपी या कांग्रेस के साथ समझौता कर लेते हैंं।

अगर झारखंड में झामुमो या झाविमो जैसी क्षे​त्रीय पार्टियां मिल कर बीजेपी को चुनाव हरा देती हैं तो तीसरे मोर्चा का विकल्प ज़्यादा मजबूत हो जाएगा। लेकिन तीसरे मोर्चे में सपा और बसपा का रहना बहुत ज़रूरी है। लेकिन इस साल लोकसभा चुनाव में इन दोनों दलों ने गठबंधन किया और बाद में तोड़ लिया। ऐसे में अगली बार उनका साथ आना नामुमकिन लगता है। जब बसपा तीसरे मोर्चे से बाहर रहेगी तब सपा की संभावना कमज़ोर हो जाती है और बीजेपी को इसका लाभ मिलता है।
लोकसभा चुनाव में नरेन्द्र मोदी की अगुवाई में बीजेपी को महाराष्ट्र और हरियाणा में अच्छी सफलता हासिल हुई थी। लिहाजा इन विधानसभा चुनावों में ऐसा लगा रहा था कि मोदी का जादू एक बार फिर चलेगा और बीजेपी दोनों राज्यों में प्रचंड जीत हासिल करेगी लेकिन ऐसा नहीं हो सका। हरियाणा और महाराष्ट्र दोनों जगहों पर आर्थिक सुस्ती का असर हुआ है। महाराष्ट्र में पारले कंपनी से हज़ारों लोगों को निकाल दिया गया है। कई छोटे-छोटे उद्योग बंद हुए हैं। सिंगल यूज़ प्लास्टि​क पर प्रतिबंध लगने से असंगठित रिटेलर और इसके उत्पादन में लगे लोगों को लग रहा है कि खाने के लाले पड़ जाएंगे। महाराष्ट्र और गुजरात में इस तरह के काम ज़्यादा होते हैं।
हरियाणा और महाराष्ट्र में जब चुनाव हो रहा था तो ऐसा कहा जा रहा था कि ये दिलचस्प चुनाव नहीं हैं क्योंकि भाजपा एकतरफा जीत जाएगी। हालांकि जब परिणाम सामने आया तब चुनावी जानकार भी चौंक गए।

 

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भोजपुरी सिनेमा के मेगास्टार बने रवि किशन हुए 50 वर्ष के जानिए उनके बारे में रोचक बाते

मुंबई । भोजपुरी सिनेमा के मेगास्टार रवि किशन आज 50 वर्ष के हो गये।उन्होंने फिल्म इंडस्ट्री में मेहनत और संघर्ष से अपनी खास पहचान बनायी है।

उत्तर प्रदेश के जौनपुर जिले के केराकत तहलीस के छोटे से गांव वराई विसुई में पंडित श्याम नारायण शुक्ला और जड़ावती देवी के घर में 17 जुलाई 1969 को जन्में रविन्द्र नाथ शुक्ला उर्फ रवि किशन को बचपन के दिनों से अभिनय का शौक था।उन्हें अभिनय का शौक कब हुआ उन्हें खुद याद नहीं है लेकिन रेडियो में गाने की आवाज इनके पैर को थिरकने पर मजबूर कर देती थी।कहीं भी शादी हो यदि बैंड की आवाज उनके कानों में गई तो वो खुद को कंट्रोल नहीं कर पाते थे।यही वजह है जब नवरात्र की शुरुआत हुई तो उन्होंने पहली बार अभिनय की ओर कदम रखा।

रवि किशन ने रामलीला में माता सीता की भूमिका से अपने अभिनय की शुरुआत की।उनके पिता पंडित श्याम नारायण शुक्ला को यह कतई पसंद नहीं था कि उनके बेटे को लोग नचनिया गवैया कहे, इसीलिए उन्हें मार भी खानी पड़ी लेकिन रविन्द्र के सपनों पर इसका कोई असर नहीं पड़ा।माँ ने रविन्द्र के सपनों को पूरा करने का फैसला किया और कुछ पैसे दिए और इस तरह अपने सपनों को साकार करने के लिए वह सपनों की नगर मुम्बई पहुंच गए।

मुंबई आने के बाद रवि किशन को काफी संघर्ष का सामना करना पड़ा।संघर्ष के लिए पैसों की जरूरत थी इसलिये उन्होंने सुबह-सुबह पेपर बांटना शुरू कर दिया।पेपर बेचने के अलावा उन्होंने वीडियो कैसेट किराया पर देने का काम भी शुरू कर दिया ।इन सबके बीच उन्होंने पढ़ाई भी जारी रखी।
रवि किशन की मेहनत रंग लाई और उन्हें काम मिलना शुरु हो गया।इस दौरान उन्होंने प्रीति किशन से शादी की।जब उनकी बेटी रीवा उनके जीवन में आई तो काम और नाम दोनों में काफी इजाफा होना शुरू हुआ।

कई हिंदी फिल्मों का निर्माण कर चुके निर्देशक मोहनजी प्रसाद ने भोजपुरी फ़िल्म निर्माण करने का फैसला किया और रवि किशन को 2003 में प्रदर्शित अपनी पहली फ़िल्म सैयां हमार में बतौर हीरो लांच किया।फ़िल्म ने न सिर्फ मृतप्राय भोजपुरी सिनेमा को नया जीवन दिया बल्कि रवि किशन को स्टार के रूप में स्थापित कर दिया।इस फ़िल्म के बाद रवि किशन ने पीछे मुड़ कर नहीं देखा।
रवि किशन 200 से भी अधिक भोजपुरी फिल्मो में अभिनय कर चुके है।रवि किशन ने न सिर्फ भोजपुरी बल्कि हिंदी और कई कामयाब दक्षिण भारतीय फिल्मों में भी अपने अभिनय का जौहर दिखाया है।उन्होंने रियलिटी शो बिग बॉस और झलक दिखा जा में भी शिरकत की है।

रवि किशन ने अपने राजनीतिक जीवन की शुरूआत वर्ष 2014 के लोकसभा चुनाव में की थी।
उन्होंने कांग्रेस की टिकट पर जौनपुर संसदीय सीट से चुनाव लड़ा लेकिन उन्हें हार का सामना करना पड़ा था।वर्ष 2017 में रवि किशन ने कांग्रेस का हाथ छोड़ कर भाजपा का कमल थाम लिया।
इस बार के चुनाव में रवि किशन ने भाजपा की टिकट पर गोरखपुर संसदीय सीट से किस्मत आजमायी।उनके सामने चुनौती के लिए कांग्रेस के मधुसूदन त्रिपाठी और समाजवादी पार्टी के राम भुआल निषाद मैदान में उतरे थे।रवि किशन ने अपने प्रतिद्वंदी राम भुआल निषाद को तीन लाख से अधिक मतों से पराजित कर जीत हासिल की और पहली बार सासंद बने।

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भाजपा ने सरकारी खजाना खाली करने के साथ तंत्र का राजनीतिकरण कर उसे कमजोर बनाया : कमलनाथ

भोपाल । मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री कमलनाथ ने विधायकों और मंत्रियों से कहा कि वे विधानसभा में भारतीय जनता पार्टी के हर आरोप दृढ़ता से जवाब दें और सरकार काे बदनाम करने की हर कोशिश काे बेनकाब करें।

आज से मध्यप्रदेश विधानसभा का मानसून सत्र शुरु होने के पहले कल कांग्रेस विधायक दल की बैठक में कमलनाथ ने कहा कि विधायक अपनी सरकार के 120 दिन के काम का हिसाब दें और विपक्ष से 15 साल में किए गए घोटालों और वादाखिलाफी का हिसाब मांगें। उन्होंने कहा कि सरकार को बदनाम करने की हर कोशिश को बेनकाब करें।

कमलनाथ ने आरोप लगाया कि भाजपा ने सरकारी खजाना खाली करने के साथ तंत्र का राजनीतिकरण करके उसे कमजोर बनाया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि सत्ता से हटने का गम भाजपा भुला नहीं पा रही, यही कारण है कि अनर्गल प्रलाप से झूठ और भ्रम के जरिए सरकार को बदनाम करने की कोशिश में लगी हुई है। सबको मिलकर इस कोशिश का जवाब देना है।

इस अवसर पर मौजूद कांग्रेस महासचिव गुलाम नबी आज़ाद ने कहा कि सिद्धांतों की राजनीति करने से सम्मान मिलता है। जिस निष्ठा, संघर्ष और संकल्प के साथ प्रदेश में कांग्रेस की सरकार बनी है उसके लिए सभी लोग बधाई के पात्र हैं। अगले पाँच साल सब जनहित से जुड़े मुद्दों पर काम करने और लोगों की अपेक्षाओं को पूरा करने का संकल्प लें।बैठक में पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह एवं पूर्व केन्द्रीय मंत्री सुरेश पचौरी भी उपस्थित थे।

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लोकसभा चुनावों में बुरी तरह हार गई कांग्रेस अब संसद में गाएगी राग भैरवी, देश को बताएगी सच्चाई

लोकसभा चुनावों में भाजपा के हाथों करारी पराजय झेल चुकी कांग्रेस एक माह बीतने के साथ ही फिर से उठ खड़ी होकर संसद में ताल ठोक रही है कि वह राफेल लड़ाकू विमान सौदे में घोटाले की सच्चाई जनता के सामने लाकर ही दम लेगी। कांग्रेस के ऐलान को राजनीतिक क्षेत्रों में बेहद आश्चर्य के साथ देखा जा रहा है क्योंकि चुनाव अभियान में कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने राफेल विमान सौदे को मुख्य मुद्दा बनाया था और जनता ने उसे नकार दिया था।

चुनावों में बेहद शर्मनाक ढंग से पराजित होने के बाद राजनीतिक जानकार मान रहे थे कि कांग्रेस अब कभी राफेल विमान सौदे का नाम भी नहीं लेगी, लेकिन वह एक माह बाद ही फिर से राफेल राग गाने पर तुल गई है। पार्टी ने राफेल को लेकर अपने रुख पर कायम रहते हुए गुरुवार को कहा कि इस सौदे में घोटाला हुआ है और पार्टी संसद के भीतर तथा बाहर इसकी सच्चाई सामने लाने के लिए संघर्ष करेगी।

राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद के संसद के दोनों सदनों को संयुक्त रूप से संबोधित करने के बाद कांग्रेस नेता गौरव गोगोई ने संसद भवन परिसर में कहा कि राफेल में चोरी हुई है और सरकार इसको छिपा नहीं सकती है। कांग्रेस इसकी सच्चाई जनता के सामने लाएगी। उन्होंने कहा कि कांग्रेस राफेल की वास्तविकता का आइना देश को दिखाएगी। इसमें हुए भ्रष्टाचार की सच्चाई सामने लाने की अपनी लड़ाई पार्टी जारी रखेगी और संसद के भीतर तथा बाहर इसकी असलियत सबके सामने रखने के लिए सरकार पर दबाव बनाएगी।

कांग्रेस नेता ने कहा कि राष्ट्रपति के अभिभाषण में मुजफ्फरपुर में बच्चों की मौत की बात नहीं है। देश का किसान मजदूर और गरीब परेशान है, जिसके बारे में सरकार को चिंता ही नहीं है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति के भाषण के शब्द अच्छे हैं लेकिन उसमें जो बातें कही गई हैं वह सच्चाई के विपरीत है।

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भाजपा को लाखों वोट से हराकर शादी के लिए राजी हुई ये बंगाली सुंदरी, 17 को पिया संग लेगी सात फेरे

तृणमूल कांग्रेस सांसद एवं लोकप्रिय बंगाली अभिनेत्री नुसरत जहां शीघ्र ही बिजनेसमैन निखिल जैन के साथ परिणयसूत्र में आबद्ध होने जा रही हैं। सुश्री नुसरत ने लोकसभा चुनाव में पश्चिम बंगाल की बशीरहाट सीट से भारतीय जनता पार्टी के सयांतन बसु को साढ़े तीन लाख से अधिक वोटों से पराजित किया था।

वर्ष 2010 में ब्यूटी कॉन्टेस्ट जीतने के बाद मॉडलिंग से अपने करियर की शुरुआत करने वाली नुसरत के विवाह की रस्में 17 जून से तुर्की के इस्तांबुल में होंगी। मेहंदी एवं संगीत की रस्म 18 जून तथा 19 से 21 जून के बीच रीति-रिवाज के अनुरूप उनका विवाह होगा। नुसरत और निखिल की मुलाकात पिछले साल दुर्गा पूजा के दौरान हुई थी। इसके बाद मुलाकात का दौर चला और कुछ समय पश्चात दोनों ने शादी का फैसला कर लिया।

शादी में कई सितारों के शामिल होने की संभावना है। नुसरत की दोस्‍त और अभिनेत्री मिमी चक्रवर्ती भी इस शादी में शामिल होंगी। मिमि भी तृणमूल कांग्रेस सांसद हैं और उन्होंने हाल में हुए लोकसभा चुनाव में जादवपुर सीट से भाजपा के अनुपम हाजरा को पराजित किया है। तृणमूल कांग्रेस सांसद एवं लोकप्रिय बंगाली अभिनेत्री नुसरत जहां शीघ्र ही बिजनेसमैन निखिल जैन के साथ परिणयसूत्र में आबद्ध होने जा रही हैं। सुश्री नुसरत ने लोकसभा चुनाव में पश्चिम बंगाल की बशीरहाट सीट से भारतीय जनता पार्टी के सयांतन बसु को साढ़े तीन लाख से अधिक वोटों से पराजित किया था।

वर्ष 2010 में ब्यूटी कॉन्टेस्ट जीतने के बाद मॉडलिंग से अपने करियर की शुरुआत करने वाली नुसरत के विवाह की रस्में 17 जून से तुर्की के इस्तांबुल में होंगी। मेहंदी एवं संगीत की रस्म 18 जून तथा 19 से 21 जून के बीच रीति-रिवाज के अनुरूप उनका विवाह होगा।
नुसरत और निखिल की मुलाकात पिछले साल दुर्गा पूजा के दौरान हुई थी। इसके बाद मुलाकात का दौर चला और कुछ समय पश्चात दोनों ने शादी का फैसला कर लिया। शादी में कई सितारों के शामिल होने की संभावना है। नुसरत की दोस्‍त और अभिनेत्री मिमी चक्रवर्ती भी इस शादी में शामिल होंगी। मिमि भी तृणमूल कांग्रेस सांसद हैं और उन्होंने हाल में हुए लोकसभा चुनाव में जादवपुर सीट से भाजपा के अनुपम हाजरा को पराजित किया है।

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इन प्रमुख मंत्रालयों पर लार टपका रहे हैं ये बड़े नेता, हजारों करोड़ का है बजट

बिहार से लोकसभा चुनाव में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन को मिली अभूतपूर्व सफलता के बाद जनता दल ((यू)) का केंद्रीय मंत्रिमंडल में शामिल होना तय है और उसकी नजर कुछ प्रमुख मंत्रालयों पर है। भाजपा, जद ((यू)) और लोजपा ने मिलकर राज्य की 40 लोकसभा सीटों में से 39 पर कब्जा कर अभूतपूर्व सफलता प्राप्त की है। इस चुनाव में भाजपा को 17, जद (यू) को 16 तथा लोजपा को छह सीटें मिली हैं। पिछली बार जद (यू) मोदी सरकार का हिस्सा नहीं थी।

महागठबंधन बनाकर राज्य में अपना आधार मजबूत करने के राष्ट्रीय जनता दल के प्रयासों को इस चुनाव में गहरा झटका लगा है जिससे उबरने में उसे लम्बा वक्त लगेगा। राजद प्रमुख लालू प्रसाद यादव के चारा घोटाले में जेल में रहने के कारण भी संगठन को वह ताकत नहीं मिल सकी जिसकी उसे तलाश थी। बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार राज्य का तेजी से विकास चाहते हैं और वह राज्य को अधिक केन्द्रीय सहायता देने के लिए विशेष राज्य का दर्जा देने की मांग भी करते रहे हैं। पार्टी के प्रधान महासचिव के. सी. त्यागी समय-समय पर बिहार को विशेष राज्य का दर्ज देने की मांग उठाते रहे हैं। कुमार बिहार से झारखंड के अलग होने से हुए नुकसान की क्षतिपूर्ति के लिए पैकेज तथा नेपाल से आने वाली नदियों से उत्तर बिहार में होने वाली तबाही की भरपायी तथा इस समस्या का स्थायी समाधान भी चाहते हैं।

जद (यू) सूत्रों के अनुसार पार्टी केन्द्र में कुछ प्रमुख मंत्रालय चाहती है। पार्टी की नजर रेलवे, कृषि, ग्रामीण विकास और स्वास्थ्य जैसे बड़े मंत्रालयों पर है। सूत्रों का मानना है कि इन मंत्रालयों में बेहतर कामकाज के जरिये पार्टी को राष्ट्रीय स्तर पर अपनी कार्यक्षमता का प्रदर्शन करने के साथ-साथ जनाधार को बढ़ाने में मदद मिल सकती है। पार्टी नेताओं की नजर दिल्ली पर भी है जहां बड़ी संख्या में बिहार और झारखंड के लोग रहते हैं। उनका मानना है कि इनकी मजबूत उपस्थिति का फायदा पार्टी उठा सकती है।

लोजपा और भाजपा के स्थानीय नेता भी चाहते हैं कि राज्य के विकास में केंद्र की भूमिका और बढ़े। लोजपा प्रमुख राम विलास पासवान भी बिहार के तेजी से विकास के पक्ष में हैं और इसके लिए अधिक केन्द्रीय सहायता देने पर जोर देते रहे है। भाजपा के राज्य स्तरीय नेताओं की राय इन दोनों पार्टियों से मिलती है और स्थानीय स्तर पर वे विकास के मुद्दे पर एकमत हैं लेकिन केन्द्रीय सहायता का निर्णय मोदी सरकार को करना है। लोजपा के के छह सांसद निर्वाचित हुए हैं और पासवान पहले ही कह चुके हैं कि उनके पुत्र चिराग पासवान के मंत्री बनने पर उन्हें खुशी होगी। पासवान मोदी सरकार में खाद्य, आपूर्ति एवं उपभोक्ता मामलों के मंत्री थे लेकिन इस बार उन्होंने चुनाव नहीं लड़ा।

भाजपा की ओर से मोदी सरकार में राधामोहन सिंह कृषि और रविशंकर प्रसाद विधि एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री थे, ये दोनों जीत कर लोकसभा पहुंचे हैं। भाजपा के गिरिराज सिंह, आर. के. सिंह, अश्विनी कुमार चौबे, राम कृपाल यादव भी केंद्र में मंत्री थे। इस चुनाव में ये सभी नेता विजयी हुए हैं। पिछली मोदी सरकार में राष्ट्रीय लोक समता पार्टी के उपेंद्र कुशवाहा भी मंत्री थे लेकिन चुनाव से पहले वह राजग से अलग हो गये थे।