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जिसे मोदी करते हैं सबसे ज्यादा पसंद, मंत्री कांटे की टक्कर में फंसा वह केन्द्रीय मंत्री

बिहार में सातवें और अंतिम चरण में होने वाले लोकसभा चुनाव में आरा संसदीय सीट पर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के वरिष्ठ नेता और केन्द्रीय मंत्री राजकुमार सिंह तथा भारत की कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी-लेनिनवादी) के राजू यादव के बीच कांटे की टक्कर है।
बिहार में सातवें तथा अंतिम चरण के लिये 19 मई को आरा में मतदान होना है। बाबू वीर कुंवर सिंह की धरती आरा में भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) से सेवानिवृति के बाद राजनीति में आये केंद्रीय ऊर्जा राज्यमंत्री राजकुमार सिंह भाजपा के उम्मीदवार हैं। वहीं महागठबंधन की ओर से भाकपा माले की टिकट पर राजू यादव प्रत्याशी बनाये गये हैं। वर्ष 2014 के चुनाव में भाजपा प्रत्याशी राज कुमार सिंह ने अपने निकटतम प्रतिद्वंद्वी राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के भगवान सिंह कुशवाहा को पराजित किया था। भाकपा माले प्रत्याशी राजू यादव तीसरे नंबर पर थे। इस बार के चुनाव में राजू यादव को राजद के अलावा महागठबंधन के अन्य दलों का भी समर्थन प्राप्त है।

आरा के चुनाव के केन्द्र में दो ही मुद्दे हैं एक विकास और दूसरा मोदी। आरा संसदीय क्षेत्र में चुनाव में जीत-हार का फैसला जिन मुद्दों पर होगा उनमें विकास सबसे ऊपर है। भाजपा प्रत्याशी राजकुमार सिंह को आरा में किए गए विकास कार्यों, अपनी छवि और मोदी लहर पर भरोसा है, वहीं माले उम्मीदवार राजू यादव सामाजिक न्याय की बात कर वोट जुटाने की कोशिश कर रहे हैं। इस मुद्दे पर राजद भी उन्हें समर्थन कर रहा है। जीएसटी, नोटबंदी जैसे मुद्दों को लेकर महागठबंधन मोदी सरकार और भाजपा पर हमला कर रहा है। उसे उम्मीद है कि महागठबंधन के माय(मुस्लिम-यादव) समीकरण के साथ कुशवाहा भी उसके साथ गोलबंद होंगे।
आरा पहले शाहाबाद संसदीय क्षेत्र के नाम से जाना जाता था। वर्ष 1957 के आम चुनाव में शाहाबाद संसदीय सीट से कांग्रेस की टिकट पर बलिराम भगत चुने गये। इसके बाद वर्ष 1962,1967 और वर्ष 1971 में भी कांग्रेस की टिकट पर बलिराम भगत सांसद चुने गये। वर्ष 1977 में आपातकाल के बाद चंद्रदेव प्रसाद वर्मा ने भारतीय लोक दल(बीएलडी) की टिकट पर जीत हासिल की। वर्ष 1980 के चुनाव में भी चंद्रदेव प्रसाद वर्मा ने जनता पार्टी (सेक्यूलर) की टिकट पर सफलता प्राप्त की। 1984 में इंदिरा गांधी की हत्या से उपजी सहानुभूति लहर में कांग्रेस प्रत्याशी बलिराम भगत फिर जीते।

वर्ष 1989 में पहली बार इंडियन पीपुल फ्रंट के नेता रामेश्वर प्रसाद ने यहां जीत दर्ज की। इसके बाद वर्ष 1991 में जनता दल के राम लखन सिंह यादव, वर्ष 1996 में जनता दल प्रत्याशी चंद्रदेव प्रसाद वर्मा, वर्ष 1998 में समता पार्टी के एचपी सिंह और वर्ष 1999 में राजद प्रत्याशी राम प्रसाद सिंह ने जीत हासिल की। वर्ष 2004 में राजद की कांति सिंह और वर्ष 2009 में जनता दल यूनाईटेड (जदयू) की मीना सिंह ने सफलता प्राप्त की।
आजादी के बाद पहली बार आरा संसदीय सीट पर भाजपा का कमल खिला। वर्ष 2014 में भाजपा प्रत्याशी राजकुमार सिंह के लिये चुनाव जीतना आसान नहीं था और राजद के प्रत्याशी और पूर्व ग्रामीण विकास मंत्री श्रीभगवान सिंह कुशवाहा से कड़ी टक्कर थी। तत्कालीन सांसद और जदयू प्रत्याशी मीना सिंह भी मैदान में थीं। इस सब के बावजूद मोदी लहर ने यहां से भाजपा प्रत्याशी राज कुमार सिंह आसानी से जीत दिला दी।
पिछली बार की तुलना में इस बार की सियासी तस्वीर यहां बदली हुई है। 2014 में यहां भाजपा, जदयू, माले और राजद के अलग-अलग लड़ने से वोटों में बिखराव था। इस बार भाजपा और जदयू साथ हैं तो माले और राजद ने गठजोड़ कर रखा है। इस लिहाज से एकतरफा दिखने वाली लड़ाई में जातीय गोलबंदी के पुट के कारण थोड़ा रोमांच जरूर है। आरा के शहरी इलाकों में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) के पक्ष में बढ़त साफ दिखती है तो ग्रामीण इलाकों में भाजपा और माले के बीच लड़ाई है। तरारी और अगिआंव में लोग राजकुमार सिंह और राजू यादव के बीच बराबरी की लड़ाई मानते हैं। ये इलाके नक्सल प्रभावित रहे हैं।

 


आरा संसदीय क्षेत्र में सात विधानसभा क्षेत्र आते हैं। इनमें अगियांव (सु), संदेश, शाहपुर, बड़हरा, तरारी, आरा और जगदीशपुर शामिल है। पिछला विधानसभा चुनाव भाजपा ,जदयू से अलग होकर लड़ी थी और उसे किसी क्षेत्र में सफलता नहीं मिली थी। आरा से मोहम्मद नवाज आलम (राजद), बड़हरा से सरोज यादव (राजद), संदेश से अरूण कुमार (राजद), जगदीशपुर से राम विशुन सिंह (राजद), शाहपुर से राहुल तिवारी (राजद), तरारी से सुदामा प्रसाद (भाकपा माले) और अगियांव (सु) से प्रभुनाथ प्रसाद (जदयू) विधायक हैं।
सतरहवें लोकसभा चुनाव (2019) में आरा संसदीय सीट से कुल 11 उम्मीदवार भाग्य आजमा रहे हैं। इनमें भाजपा, भाकपा माले, बहुजन समाज पार्टी (बसपा) और चार निर्दलीय समेत 11 उम्मीदवार शामिल हैं। इस लोकसभा क्षेत्र में करीब 20 लाख 55 हजार मतदाता हैं। इनमें करीब 11 लाख 25 पुरुष और नौ लाख 30 हजार महिला शामिल हैं जो सातवें और अंतिम चरण में 19 मई को होने वाले मतदान में 11 प्रत्याशियों के भाग्य का फैसला करेंगे।

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