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विश्व में कोरोना संक्रमितों की संख्या 50 लाख के करीब , 3.28 लाख लोगों की मौत

बीजिंग/जिनेवा/नयी दिल्ली। वैश्विक महामारी कोरोना वायरस (कोविड 19) का कहर बढ़ता जा रहा है और विश्व भर में इससे संक्रमितों की संख्या 50 लाख के करीब पहुंच चुकी है और 3.28 लाख से अधिक लोग अब काल के गाल में समा चुके हैं।

अमेरिका की जॉन हॉपकिन्स यूनिवर्सिटी के विज्ञान एवं इंजीनियरिंग केन्द्र (सीएसएसई) की ओर से जारी आंकड़ों के मुताबिक कुल संक्रमितों की संख्या 49,96,472 हो गयी जबकि 3,28,115 लोगों की इस बीमारी से मौत हो चुकी है। दुनिया भर में सर्वाधिक प्रभावित देशों में पहले स्थान पर अमेरिका, दूसरे पर रूस और तीसरे पर ब्राजील है।

भारत में भी कोरोना वायरस ने तेजी से पैर पसारे हैं और अब यह एक लाख से अधिक संक्रमण के मामलों वाले देशों में शामिल हो गया है। केन्द्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय की ओर से गुरुवार को जारी आंकड़ों के मुताबिक देश के 32 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में इसके संक्रमण से अब तक 1,12,359 लोग प्रभावित हुए हैं तथा 3435 लोगों की मौत हुई है जबकि 45,300 लोग इस बीमारी से निजात पा चुके हैं।

अमेरिका में कोरोना वायरस से दुनिया में सर्वाधिक 15 लाख से अधिक लोग संक्रमित हुए हैं और इसके संक्रमण से मरने वालों की संख्या 90 हजार के आंकड़े को पार कर चुकी है। विश्व की महाशक्ति माने जाने वाले अमेरिका में कुल संक्रमितों की संख्या लगातार बढ़ते हुए 15,51,853 हो गयी जबकि 93,439 लोगाें की मौत हो चुकी है।

रूस में भी कोविड-19 का प्रकोप लगातार तेजी से बढ़ रहा है और यह इस संक्रमण से सबसे अधिक प्रभावित होने वाले देशों की सूची में अमेरिका के बाद दूसरे स्थान पर है। यहां अब तक 3,08,705 लोग इसकी चपेट में आ चुके हैं और 2972 लोगों की मृत्यु हो चुकी है।इस बीच ब्राजील में भी कोरोना को संकट गहराता जा रहा है।

यहां 291,579 लोग संक्रमित हुए हैं तथा पिछले 24 घंटों के दौरान ‘कोविड 19’ के प्रकोप से 888 मरीजों की मौत के बाद देश में इस संक्रमण से मरने वालों की संख्या बढ़कर 18,859 हो गयी है। संक्रमण के मामले में ब्राजील का तीसरा स्थान है।इसके अलावा ब्रिटेन में भी हालात लगातार खराब होते जा रहे हैं।

यहां अब तक इस महामारी से 2,49,619 लोग प्रभावित हुए हैं और अब तक 35,786 लोगों की इसके कारण मौत हो चुकी है।यूरोप में गंभीर रूप से प्रभावित देश इटली में इस महामारी के कारण अब तक 32,330 लोगों की मौत हुई है और 2,27,364 लोग इससे संक्रमित हुए हैं। स्पेन में कुल 2,32,555 लोग संक्रमित हुए है जबकि 27,888 लोगों की मौत हो चुकी है।

इस वैश्विक महामारी के केंद्र चीन में पिछले 24 घंटों में संक्रमण अथवा मौत का कोई नया मामला सामने नहीं आया है। यहां अब तक 84,063 लोग संक्रमित हुए हैं और 4638 लोगों की मृत्यु हुई है। इस वायरस को लेकर तैयार की गयी एक रिपोर्ट के मुताबिक चीन में हुई मौत के 80 प्रतिशत मामले 60 वर्ष से अधिक आयु के लोगों के थे।यूरोपीय देश फ्रांस और जर्मनी में भी स्थिति काफी खराब है।

फ्रांस में अब तक 1,81,700 लोग संक्रमित हुए हैं और 28,135 लाेगों की मौत हो चुकी है। जर्मनी में कोरोना वायरस से 1,78,473 लोग संक्रमित हुए हैं और 8,144 लोगों की मौत हुई है।तुर्की में कोरोना से अब तक 1,52,587 लोग संक्रमित हुए हैं तथा इससे 4,222 लोगों की मौत हो चुकी है।कोरोना वायरस से गंभीर रूप से प्रभावित खाड़ी देश ईरान में 1,26,949 लोग संक्रमित हुए हैं जबकि 7183 लोगों की इसके कारण मौत हुई है।

बेल्जियम में 9150, कनाडा में 6150, मेक्सिको में 6090, नीदरलैंड में 5767, स्वीडन में 3831, पेरू में 3024, इक्वाडोर में 2888, स्विट्जरलैंड में 1892, आयरलैंड में 1,571 और पुर्तगाल में 1263 लोगों की मौत हो गयी है।इसके अलावा पड़ोसी देश पाकिस्तान में पिछले 24 घंटे में कोरोना संक्रमण के 1932 नये मामले सामने आये हैं जबकि और 46 लोगों की मौत हो गयी। यहां अब तक कुल संक्रमितों की संख्या 45,898 हो गयी है जबकि 985 लोगाें की मौत हुई है।

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बच्चों में इंफ्लेमेट्री सिंड्रोम हो सकता है कोरोना का लक्षण

एजिनेवा/नयी दिल्ली।विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूचओ) ने बच्चों में इंफ्लेमेट्री सिंड्रोम यानी सूजन के साथ लाल चकत्ते निकलने के प्रति डॉक्टरों को सावधान रहने की सलाह देते हुये कहा है कि ये कोरोना के लक्षण हो सकते हैं।

डब्ल्यूएचओ की शुक्रवार को जारी एक वैज्ञानिक टिप्पणी में डॉक्टरों और अस्पतालों को सलाह दी गयी है कि यदि बच्चों की जीभ, हाथों या पैरों पर चकत्ते निकलते हैं या सूजन आता है अथवा शॉक के लक्षण दिखते हैं और इसका कोई जीवाणु से जुड़ा कारण नहीं पाया जाता तो यह कोरोना के लक्षण हो सकते हैं।

यदि बच्चे की कोरोना जाँच में संक्रमण की पुष्टि होती है या उसके संपर्क में आया कोई व्यक्ति कोविड-19 से संक्रमित है तो इसकी रिपोर्ट डब्ल्यूएचओ को भेजी जाये।कोविड-19 पर डब्ल्यूएचओ की मुख्य तकनीकी विशेषज्ञ डॉ मरिया वैन कोरखोव ने बताया कि अमेरिका और इटली से कुछ ऐसी रिपोर्टें मिली हैं कि कुछ बच्चों को इंफ्लेमेट्री सिन्ड्रोम के साथ आईसीयू में भर्ती कराना पड़ा है। इनमें से कई बच्चों की जाँच में कोविड-19 के संक्रमण की भी पुष्टि हुई है।

अभी यह तय नहीं है कि इंफ्लेमेट्री सिंड्रोम कोरोना से सीधे जुड़ा हुआ है या नहीं। इसलिए हम और डाटा एकत्र कर रहे हैं।डब्ल्यूएचओ के स्वास्थ्य आपदा कार्यक्रम के कार्यकारी निदेशक डॉ. माइकल जे. रेयान ने कहा कि हो सकता है कि यह बच्चों में दिखने वाला मल्टीसिस्टम इंफ्लेमेट्री सिंड्रोम सीधे वायरस के कारण न होकर वायरस के खिलाफ शरीर के रोग प्रतिरोधक तंत्र की अत्यधिक सक्रियता का परिणाम हो।

वैज्ञानिक टिप्पणी में कहा गया है कि इस सिंड्रोम के लक्षणों और इससे होने वाले जोखिम तथा जनहानि को समझना जरूरी है। साथ ही ऐसी परिस्थितियों में उपचार भी विकसित करने की आवश्यकता है। अभी यह भी स्प्ष्ट नहीं है कि यूरोप और अमेरिका के अलावा दूसरे महादेशों में यह सिंड्रोम नहीं है या यह मौजूद है लेकिन इस पर किसी का ध्यान नहीं गया है।

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विश्व में कोराना संक्रमितों की संख्या 45.42 लाख, तीन लाख से अधिक मौत

बीजिंग/जिनेवा/नयी दिल्ली। वैश्विक महामारी कोरोना वायरस (कोविड-19) का प्रकोप दिनों-दिन बढ़ता जा रहा है और विश्व भर में इसके संक्रमितों की संख्या 45.43 लाख से अधिक हो गयी है जबकि 3.07 लाख से ज्यादा लोग काल का ग्रास बन चुके हैं।

अमेरिका की जॉन हॉपकिन्स यूनिवर्सिटी के विज्ञान एवं इंजीनियरिंग केन्द्र (सीएसएसई) की ओर से जारी आंकड़ों के मुताबिक कुल संक्रमितों की संख्या 45,42,752 हो गयी जबकि कुल 3,07,696 लोगों की इस बीमारी से मौत हो चुकी है।

भारत में भी कोरोना वायरस का संक्रमण बहुत तेजी से फैल रहा है और यह संक्रमण से सर्वाधिक प्रभावित देशों की सूची में 11वें स्थान के साथ ही वैश्विक महामारी के केंद्र चीन से आगे हो गया है।

केन्द्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय की ओर से शनिवार सुबह जारी आंकड़ों के मुताबिक देश के 32 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में कोरोना से संक्रमितों और मृतकों की संख्या में क्रमश: 3970 और 103 की बढ़ोतरी हुई है।देश में इसके संक्रमण से अब तक 85,940 लोग प्रभावित हुए हैं तथा 2752 लोगों की मौत हुई है जबकि 30,153 लोग पूरी तरह ठीक भी हो चुके हैं।

सीएसएसई के आंकड़ों के मुताबिक अमेरिका में कोरोना वायरस से दुनिया में सर्वाधिक लोग संक्रमित हुए हैं तथा यहां संक्रमण के मामलों की संख्या 14 लाख से अधिक हो चुकी है।

विश्व की महाशक्ति माने जाने वाले अमेरिका में 14,42,924 संक्रमित है और 87,493 की मौत हो चुकी है।रूस में भी कोविड-19 का प्रकोप लगातार तेजी से बढ़ रहा है और यह कोविड-19 के संक्रमण से सबसे अधिक प्रभावित होने वाले देशों की सूची में अमेरिका के बाद दूसरे स्थान पर है।

देश में संक्रमितों की संख्या ढाई लाख के आंकड़े को पार कर चुकी है। यहां अब तक 2,62,843 लोग इसकी चपेट में आ चुके हैं और 2418 लोगों की मृत्यु हो चुकी है।यूरोप में गंभीर रूप से प्रभावित देश इटली में इस महामारी के कारण अब तक 31610 लोगों की मौत हुई है और 2,23,885 लोग इससे संक्रमित हुए हैं।

स्पेन में काेरोना से 230183 लोग संक्रमित है जबकि 27459 लोगों की मौत हो चुकी है।इस वैश्विक महामारी के केंद्र चीन में अब तक 82,941 लोग संक्रमित हुए हैं और 4633 लोगों की मृत्यु हुई है।

इस वायरस को लेकर तैयार की गयी एक रिपोर्ट के मुताबिक चीन में हुई मौत के 80 प्रतिशत मामले 60 वर्ष से अधिक आयु के लोगों के थे।रोपीय देश फ्रांस और जर्मनी में भी स्थिति काफी खराब है।

फ्रांस में अब तक 1,78,994 लोग संक्रमित हुए हैं और 27529 लाेगों की मौत हो चुकी है। जर्मनी में कोरोना वायरस से 173722 लोग संक्रमित हुए हैं और 7881 लोगों की मौत हुई है।इसके अलावा ब्रिटेन में भी हालात लगातार खराब होते जा रहे हैं।

यहां अब तक इस महामारी से 236711 लोग प्रभावित हुए हैं और अब तक 33998 लोगों की इसके कारण मौत हो चुकी है। तुर्की में कोरोना से अब तक 146457 लोग संक्रमित हुए हैं तथा इससे 4055 लोगों की मौत हो चुकी है।

कोरोना वायरस से गंभीर रूप से प्रभावित खाड़ी देश ईरान में 116635 लोग संक्रमित हुए हैं जबकि 6902 लोगों की इसके कारण मौत हुई है।ब्राजील में 14817, बेल्जियम में 8959, नीदरलैंड में 5643, कनाडा में 5562, मेक्सिको में 4767, स्वीडन में 3646, स्विट्जरलैंड में 1874, आयरलैंड में 1518 और पुर्तगाल में 1190 लोगों की मौत हो गयी है।

इसके अलावा पड़ोसी देश पाकिस्तान में पिछले 24 घंटों में कोरोना संक्रमण के तीन हजार से अधिक तथा 64 लोगों की मौत का नया मामला सामने आया हैं। यहां कुल संक्रमितों की संख्या 38799 हो गयी है जबकि 834 लोगाें की मौत हो चुकी है।

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इजरायल और इटली का दावा, हमारे वैज्ञानिकों ने बना लिया है कोरोना वैक्सीन

विश्‍वव्‍यापी कोरोना महामारी के बीच इजरायल के रक्षा मंत्री नफ्ताली बेनेट ने दावा किया है कि उनके देश के मुख्य जैविक अनुसंधान संस्थान के वैज्ञानिकों ने कोरोना वायरस के लिए एक एंटीबॉडी विकसित करने में महत्वपूर्ण सफलता हासिल की है। उन्‍होंने कहा कि अब इसके पेटेंट और बड़े पैमाने पर संभावित उत्‍पादन के बारे में काम चल रहा है। इधर इटली ने भी दावा किया है कि उसने दुनिया का पहला कोरोना वायरस वैक्सीन विकसित कर लिया है जो मनुष्यों पर काम करता है। रोम के एक अस्पताल में किए गए परीक्षणों के अनुसार, कोरोना वायरस वैक्सीन में चूहों में उत्पन्न एंटीबॉडी होते हैं जो मानव कोशिकाओं पर काम करते हैं।

चूहों के शरीर में विकसित हुआ एंटीबॉडी

एक रिपोर्ट के मुताबिक, इटली कोविड-19 की वैक्सीन बनाने वाला दुनिया का पहला देश बन गया है जो इंसानों पर भी असरदार है। यह रिपोर्ट रोम के ‘इंफेक्शियस डिसीज स्पैलनज़ानी हॉस्पिटल’ में हुए एक परीक्षण पर आधारित है। इस रिपोर्ट में दावा किया गया है कि कोरोना वायरस वैक्सीन ने चूहों के शरीर में एंटीबॉडीज जेनरेट की है जिसका असर इंसान की कोशिकाओं पर भी होता है।

इटली में वैक्सीन का परीक्षण

दवा बनाने वाली एक फर्म ‘ताकीज़’ के सीईओ लिगी ऑरिसिशियो ने इटली की एक न्यूज एजेंसी के हवाले से कहा, यह इटली में वैक्सीन का परीक्षण करने वाले उम्मीदवारों का सबसे एडवांस स्टेज है। वैक्सीन का परीक्षण करने के लिए वैज्ञानिकों ने चूहों का इस्तेमाल किया था। सिंगल वैक्सीनेशन के बाद उन्होंने चूहों के शरीर में एंटीबॉडीज़ को विकसित होते देखा जो मानव कोशिकाओं को प्रभावित करने वाले कोरोनो वायरस को ब्लॉक कर सकता है।
दुनियाभर में 100 से ज्यादा वैक्सीन का ट्रायल प्री-क्लीनिकल ट्रायल पर हैं और उनमें से कुछ का इंसानों पर प्रयोग शुरू किया गया है। इस महामारी के फैलने का सबसे बड़ा कारण यह है कि अब तक इसकी दवा ईजाद नहीं हो सकी है।

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कागज की इस स्ट्रिप से एक घंटे में होगी कोरोना की जांच

सीएसआईआर ने कागज की ऐसी स्ट्रिप बनाई है जिससे मात्र एक घंटे में कोरोना की जांच की जा सकेगी। वैज्ञानिक एवं औद्योगिक अनुसंधान परिषद (सीएसआईआर) ने कागज की स्ट्रिप के जरिए कोरोना वायरस का टेस्‍ट करने की तकनीक को ‘फेलुदा’ नाम दिया है। बड़े पैमाने पर फटाफट टेस्टिंग (रैपिड मास टेस्टिंग) के लिए इसका इस्‍तेमाल होगा। इसके लिए सीएसआईआर और टाटा संस ने हाथ मिलाया है। उम्‍मीद है कि मई के अंत तक इस तकनीक के जरिये टेस्टिंग का काम शुरू हो जाएगा। यह तकनीक पूरी तरह भारत में बनी है। ‘फेलुदा’ को कोरोना महामारी को काबू में करने के लिए बनाया गया है। इसके जरिये बड़े पैमाने पर टेस्टिंग की जा सकती है। इसका सबसे बड़ा फायदा है कि यह किफायती है। इसे इस्‍तेमाल करना आसान है और इसके लिए महंगी क्‍यू-पीसीआर मशीनों की जरूरत नहीं पड़ती है।

बताया जाता है कि इस तकनीक के जरिये डेढ़ से दो घंटे में कोविड टेस्ट मुमकिन है और कीमत भी 500 रुपये के आसपास आएगी। ‘फेलुदा’ को सीएसआईआर की इंस्‍टीट्यूट ऑफ जेनोमिक्‍स एंड इंटीग्रेटिव बायोलॉजी (आईजीआईबी) ने विकसित किया है। सीएसआईआर के महानिदेशक डॉ शेखर सी मांडे के मुताबिक आईजीआईबी जैसी सीएसआईआर की प्रयोगशालाएं ‘डीप साइंस’ पर काम कर रही हैं। वे उन्‍नत तकनीकों को विकसित कर रही हैं। उन्‍होंने टाटा ग्रुप जैसे प्रमुख उद्योग घराने के इस मुहिम में शामिल होने पर खुशी जताई। सीएसआईआर-आईजीआईबी और टाटा संस ने इसे लेकर एक एमओयू पर हस्‍ताक्षर किए हैं। यह कोविड-19 की सटीक और बड़े पैमाने पर टेस्टिंग के लिए किट के विकास की लाइंसिंस से जुड़ा है।

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कड़ी धूप में जाते ही दम तोड़ देता है यमराज बना कोरोना वायरस, अमेरिका ने किया दावा

कोरोना वायरस के डर से घरों में छुपी हुई दुनिया के लिए राहत की खबर, यमराज की शक्ल में आया ये वायरस सूरज की धूप नहीं सह पाता और कड़ी धूप में जाते ही दम तोड़ देता है। ये दावा अमेरिका के घरेलू सुरक्षा विभाग अति उन्नत बायो कन्टेनमेंट लैब ने किया है। लैब के अनुसार सूरज की रोशनी कोरोना को खत्म कर सकती है, जबकि गर्म तापमान और चिपचिपा मौसम वायरस को काफी नुकसान पहुंचाता है।

कोविड-19 को मार देती हैं सूरज की किरणें

व्हाइट हाउस ने लैब के शोध के हवाले से कहा है कि सूरज की किरणें कोविड-19 को मार देती हैं। जबकि गर्म तापमान और ह्यूमिडिटी वायरस को नुकसान पहुंचाते हैं, और इससे वायरस का जीवन और इसकी शक्ति आधी हो जाती है।
कोरोनावायरस महामारी के चलते अमेरिका सबसे अधिक प्रभावित हुआ है। वर्तमान में यहां कोविड-19 संक्रमण के कुल आठ लाख 60 हजार से अधिक मामलों की पुष्टि हुई है, जिनमें से 50 हजार से अधिक अमेरिकी नागरिकों की जान चली गई है। तापमान और ह्यूमिडिटी के प्रभाव को लेकर किए गए इस शोध को हफ्तों से ट्रैक्शन मिल रहा है। अमेरिकी सरकार ने कोविड-19 पर तापमान के परीक्षण के प्रारंभिक परिणामों पर पहली बार आधिकारिक मुहर लगाई है।
अमेरिकी घरेलू सुरक्षा विभाग में विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी निदेशालय के प्रमुख बिल ब्रायन ने कहा, यह आज तक का हमारा सबसे महत्वपूर्ण ऑब्जर्वेशन है। सूर्य की रोशनी के शक्तिशाली प्रभाव से वायरस सतह और हवा दोनों जगह मरता हुआ पाया गया है। हमने तापमान और ह्यूमिडिटी दोनों के साथ इसी तरह के परिणाम देखे हैं। ब्रायन के अनुसार, एक कमरे में 70-75 एफ तापमान पर 20 प्रतिशत ह्यूमिडिटी के साथ वायरस का जीवन लगभग आधा यानी एक घंटे है।
बिल ने कहा कि इसे लेकर बाहर निकलने पर जब यह यूवी किरणों से टकराता है तो इसका जीवन एक मिनट और डेढ़ मिनट में ही आधा रह जाता है।

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कोरोना संकट में उलझे अमेरिका को हिंद प्रशांत क्षेत्र में चीनी नौसेना की सीधी चुनौती, वियतनाम और मलेशिया को भी धमकाया

समूचे विश्व को कोरोना वायरस में उलझाकर चीन ने हिंद प्रशांत क्षेत्र में अमेरिकी प्रभुत्व को सीधी चुनौती पेश कर दी है। उसने दक्षिण चीन सागर में अपनी नौसेना की आक्रामक तैनाती बढ़ाकर वियतनाम तथा मलेशिया को धमकाने के साथ ही इस इलाके से होकर गुजरने वाले समुद्री मार्ग पर अपनी नजरें गड़ा दी हैं।

 

बढ़ गई है चीनी आक्रामकता

दक्षिण चीन सागर के इसी मार्ग से विश्व के एक तिहाई मालवाही पोत गुजरते हैं।
दक्षिण चीन सागर के विवादित क्षेत्र में चीनी आक्रामकता बढऩे के साथ ही अमेरिकी नौसैनिक पोतों के साथ एक ऑस्ट्रेलियाई युद्धपोत के भी आ जाने से मलेशिया, विएतनाम और चीन के बीच तनाव बढ़ गया है। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार ऑस्ट्रेलियाई नौसेना की फ्रिगेट एचएमएएस पर्रामट्टा और तीन अमेरिकी युद्ध पोत इस सप्ताह चीनी सरकार के सर्वेक्षण पोत हाइयांग डिझी 8 के करीब आ गये थे जिस पर विवादित क्षेत्र में तेल के उत्खनन करने का संदेह है।

पर्रामट्टा की तैनाती का फैसला

ऑस्ट्रेलियाई रक्षा अधिकारी पीटर ने कहा कि पर्रामट्टा की तैनाती का फैसला तो एक साल पहले ही ले लिया गया था। उस समय यह पता नहीं था कि यह पोत एक ऐसे नाजुक सैन्य वातावरण में आ जाएगा। उन्होंने कहा कि मार्च के बाद इस क्षेत्र में ऐसा वातावरण बनाया गया कि जापान से लेकर दक्षिण चीन सागर तक चीन आक्रामक मुद्रा में नजर आ रहा है। मलेशिया की सरकारी तेल कंपनी पेट्रोनास के एक पोत भी इस इलाके में मौजूद है। एक उभयचर युद्धपोत ‘दि अमेरिका और एक निर्देशत मिसाइल क्रूज ‘दि बंकर हिल उस इलाके में प्रवेश कर गये हैं जिस पर मलेशिया अपना दावा करता है।

यहां से होता है विश्व का एक तिहाई समुद्री मालवहन 

इसी समय इसी क्षेत्र में चीन सरकार का एक पोत पेट्रोनास के पोत का पीछा कर रहा था जिस पर तेल उत्खनन के उपकरण लदे हुए थे। चीनी और ऑस्ट्रेलियाई युद्धपोत भी आस पास ही पूरी तरह से चौकन्ने हैं। कोविड 19 की वैश्विक महामारी को नियंत्रित करने के चीन के प्रयासों के बावजूद चीनी सेना ने दक्षिण चीन सागर में अपनी सक्रियता को कम नहीं किया है जो सामरिक दृष्टि से बहुत महत्वपूर्ण है और जहां से विश्व का एक तिहाई समुद्री मालवहन होता है। सैन्य विशेषज्ञों के अनुसार चीन सेना की अरसे से चली आ रही है आक्रामकता और बढ़ गयी है। ऑस्ट्रेलियाई स्ट्रेटिजिक पॉलिसी इंस्टीट्यूट के कार्यकारी निदेशक का कहना है कि यह चीन की सोची-समझी रणनीति है जिसके तहत वे प्रयास कर रहे हैं कि दुनिया का ध्यान भंग करके और अमेरिका की क्षमता को कम करके पड़ोसी देशों पर दबाव बढ़ाया जाये।

मछुआरों को कर रहे हैं तंग 

जनवरी के बाद से कोरोना विषाणु की महामारी तेजी से बढ़ी और चीन सरकार और उसके तटरक्षक पोत एवं नौसैना दक्षिण चीन सागर के विवादित क्षेत्र में सक्रिय हैं और क्षेत्रीय समुद्री सुरक्षा बलों से भिड़ रहे हैं एवं मछुआरों को तंग कर रहे हैं। इसी माह विएतनाम के सुरक्षा बलों ने आरोप लगाया था कि एक चीनी गश्ती पोत ने एक विएतनामी मछुआरे की नौका को टक्कर मार कर डुबा दिया था। मार्च में चीन ने समुद्री कृत्रिम दीप पर दो नये अनुसंधान स्टेशनों को खोला है। इस क्षेत्र पर फिलीपीन्स एवं अन्य देशों का दावा है। इन अनुसंधान केन्द्रों पर सैन्य बंकर और सैन्य इस्तेमाल वाले रन वे भी बनाये गये हैं। गत सप्ताहांत चीन सरकार ने घोषणा की थी कि उसने दक्षिण चीन सागर में दो नये जिले स्थापित किये हैं जिनमें दर्जनों छोटे छोटे टापू और चट्टानें हैं। उनमें से कई तो पानी में डूबे हुए थे जिन पर अंतरराष्ट्रीय कानून के अनुसार किसी का प्रादेशिक दावा भी नहीं बनता है।
अमेरिका के होनोलुलु स्थिति डैनियल के इनोउये एशिया पैसिफिक सेंटर फॉर सिक्योरिटी स्टडीज में प्रो. अलेक्जेंडर ने कहा कि ऐसा प्रतीत होता है कि जबकि चीन कोविड 19 की महामारी से मुकाबला कर रहा है, वह दीर्घकालिक सामरिक लक्ष्यों को भी दिमाग में रखे हुए है। चीनी पक्ष दक्षिण चीन सागर में एक नये वातावरण को जन्म देना चाहते हैं जिसमें हर बात में उनका वर्चस्व दिखे। इसके लिए वे अधिक से अधिक आक्रामक हो रहे हैं।

कुछ नहीं होगा दि अमेरिका और ‘बंकर हिल की मौजूदगी से 

वैसे अमेरिका का दक्षिण चीन सागर में कोई प्रादेशिक दावा नहीं है लेकिन अमेरिकी नौसेना का कहना है कि वह इस जलक्षेत्र में दशकों से शांति बनाये रखती आयी है। अमेरिकी सैन्य अधिकारियों ने चीन को इस क्षेत्र में बढ़ते सैन्यीकरण के खिलाफ कई बार चेताया है। अमेरिका की हिन्द प्रशांत कमान की प्रवक्ता लेफ्टिनेंट कमांडर निकोल शेवेग्मैन ने कहा कि दक्षिण चीन सागर में अमेरिकी नौसेना की ऑपरेशनल उपस्थिति के माध्यम से हम अपने सहयोगी देशों एवं साझीदारों की नौवहन एवं हवाई परिवहन की स्वतंत्रता तथा उन अंतरराष्ट्रीय सिद्धांतों की रक्षा कर रहे हैं जो हिन्द प्रशांत क्षेत्र में सुरक्षा एवं समृद्धि के लिए आवश्यक है। अमेरिका अपने सहयोगियों एवं साझीदारों की उनके आर्थिक हितों के निर्धारण के प्रयासों की मदद कर रहा है। चीन सरकार ने अमेरिका के पक्ष का विरोध करते हुए कहा है कि अमेरिका इस क्षेत्र को अस्थिर कर रहा है। ‘दि अमेरिका और ‘बंकर हिल की मौजूदगी से कुछ नहीं होगा।

मंगलवार को अमेरिकी नौसेना को अपने युद्धपोतों की तस्वीरों को टवीटर पर पोस्ट किया। इनमें एक तीसरा पोत ‘दि बैरी भी था जो एक डिस्ट्रॉयर है। अमेरिकी नौसेना ने कहा कि ये पोत हिन्द प्रशांत क्षेत्र में सुरक्षा एवं स्थिरता के समर्थन में तैनात हैं। जिस क्षेत्र में अमेरिकी पोत मौजूद हैं, वह मलेशिया से दो सौ नाविक मील दूर है। मलेशिया, चीन और विएतनाम तीनों देशों का विवादित जलक्षेत्र में मौजूद प्राकृतिक संसाधनों पर अधिकार का दावा है।

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शोध से सामने आई असलियत, कोरोना मरीजों को हाइड्रॉक्सीक्लोरोक्वीन देने से बढ़ जाता है मौत का खतरा!

अपने अडियल रुख के लिए प्रसिद्ध अमेरिकी राष्ट्रपति को तब शर्मिंदगी का सामना करना पड़ा जब उनके देश के ही एक हैल्थ इंस्टीट्यूट में भर्ती मरीजों पर किए गए अध्ययन में साफ हो गया कि जिस हाइड्रॉक्सीक्लोरोक्वीन को वे रामबाण दवा बता रहे थे, उससे उल्टे मरीजों की मौत होने का जोखिम ज्यादा हो गया। शोध में पता चला है कि कोरोनावायरस के मरीजों के इलाज में यह दवा फायदेमंद साबित नहीं हुआ है। मेडआर्काइव के प्रीप्रिंट रिपोजिटरी में प्रकाशित निष्कर्षों के अनुसार, उन लोगों की मौत होने का जोखिम ज्यादा बढ़ गया,जिनका इलाज हाइड्रॉक्सीक्लोरोक्वीन से किया गया था। अध्ययन के लिए, शोधकर्ताओं ने 11 अप्रैल तक अमेरिका के ‘वेटरन्स हेल्थ एडमिनिस्ट्रेशन मेडिकल सेंटर कन्फर्म सार्स कोविड-2 संक्रमण के साथ अस्पताल में भर्ती रोगियों के डेटा का विश्लेषण किया।

मरीजों को सिर्फ हाइड्रॉक्सीक्लोरोक्वीन (एचसी) या एंटीबायोटिक एजिथ्रोमाइसिन (एचसी प्लस एजी) के साथ देने के आधार पर कोविड-19 के लिए मानक सहायक प्रबंधन के अलावा उपचार के रूप में वर्गीकृत किया गया था। कुल 368 मरीजों का मूल्यांकन किया गया। जिन्हें सिर्फ हाइड्रॉक्सीक्लोरोक्वीन दिया गया था उस समूह में मृत्यु की दर 27.8 प्रतिशत थी।

हाइड्रॉक्सीक्लोरोक्वीन और एजिथ्रोमाइसिन समूह में मृत्यु की दर 22.1 प्रतिशत थी और हाइड्रॉक्सीक्लोरोक्वीन नहीं देने पर यह 11.4 प्रतिशत से भी कम था। शोधकर्ताओं ने पाया कि नो एचसी ग्रुप की तुलना में एचसी ग्रुप में और एचसी प्लस एजी समूह में वेंटिलेशन का जोखिम समान था। अध्ययन में कोई सबूत नहीं मिला कि हाइड्रॉक्सीक्लोरोक्वीन का इस्तेमाल अकेले या तो एजिथ्रोमाइसिन के साथ करने पर अस्पताल में भर्ती कोविड-19 रोगियों में मैकेनिकल वेंटिलेशन का जोखिम कम रहता है।

कोविड-19 के रोगियों के इलाज में हाइड्रॉक्सीक्लोरोक्वीन के इस्तेमाल को लेकर सीमित और परस्पर विरोधी आंकड़ों के बावजूद, अमेरिका के फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन ने इस दवा के आपातकालीन उपयोग को ऐसी स्थिति के लिए अधिकृत कर दिया है, जब नैदानिक परीक्षण अनुपलब्ध या अव्यवहार्य हो।

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India will become super power: ये हथियार मिलते ही एशिया में खत्म हो जाएगी चीन की दादागिरी, भारत बनेगा सुपर पॉवर

India will become super power: हिंद महासागर में चीन के बढ़ते दखल से निजात पाने के लिए भारत को जल्द ही वे हेलीकॉप्टर मिलने वाले हैं जो जमीन के साथ ही समुद्र में छोटी सी नाव से भी उड़ान भर सकते हैं। ये हेलीकॉप्टर पानी के नीचे छुपी पनडुब्बियों के लिए यमराज माने जाते हैं। इनके मिलते ही हिंद महासागर में घूम रही चीनी पनडुब्बियां दुम दबाकर भाग निकलेंगी। इन हेलीकॉप्टरों को प्राप्त करने के लिए भारत और अमेरिका के बीच तीन अरब डॉलर का रक्षा समझौता हुआ है। द्विपक्षीय बैठक में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस समझौते पर हस्ताक्षर किए।

 

रोमियो और अपाचे हेलीकॉप्टर खरीदेगा भारत

India will become super power:  जिस रक्षा समझौते पर हस्ताक्षर हुए हैं, उसके तहत भारत 2.6 अरब डॉलर में 24 MH60 रोमियो हेलीकॉप्टर खरीदेगा। इसके अलावा 80 करोड़ डॉलर में छह AH 64E अपाचे हेलिकॉप्टर भी खरीदे जाएंगे। भारत आए ट्रंप ने कहा कि तीन अरब डॉलर से ज्यादा के इस रक्षा समझौते से दोनों देशों के रक्षा संबंध और मजबूत होंगे।

आतंकवाद के खिलाफ कदम उठाए पाकिस्तान

India will become super power: बैठक में आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में साझेदारी को लेकर दोनों देशों में सहमति बनी। ट्रंप ने कहा कि पाकिस्तान अपनी धरती पर पनप रहे आतंकवाद को खत्म करने के लिए उपाय करे। प्रधानमंत्री मोदी और मैं अपने नागरिकों को कट्टर इस्लामी आतंकवाद से बचाने के लिए प्रतिबद्ध हैं। अमेरिका पाकिस्तान की धरती से चल रहे आतंकवाद को रोकने के लिए कदम उठा रहा है।

India will become super power: ट्रंप ने अपने शानदार स्वागत के लिए भारत का शुक्रिया अदा किया। मेलानिया और मैं भारत की महिमा और भारतीय लोगों की असाधारण उदारता और आदर से विस्मित हैं। हम आपके (मोदी) गृह राज्य के नागरिकों द्वारा किए गए शानदार स्वागत को हमेशा याद रखेंगे। हम यहां से सुखद अनुभव साथ लेकर जाएंगे। अहमदाबाद के मोटेरा स्टेडियम में ट्रंप का स्वागत करने के लिए एक लाख से अधिक लोग आए थे।

India will become super power: इधर प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत और अमेरिका के संबंध 21वीं सदी की सबसे महत्वपूर्ण साझेदारियों में से एक है। भारत और अमेरिका के बीच बीच ड्रग तस्करी, आतंकवाद और संगठित अपराध जैसे गंभीर अपराधों के बारे में एक नया तंत्र बनाने पर सहमति बनी है।

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इन मुस्लिम सुंदरियों ने कहा, जो उखाड़ना है, उखाड़ ले अमेरिका, हम तो खरीदेंगी ये वस्तु

तुर्की ने रूस की हवाई सुरक्षा प्रणाली एस 400 को सक्रिय करने के संकेत देने के बाद कहा है कि यदि अमेरिका एफ 35 लड़ाकू विमान को सौपने के अपने रुख के बारे में जल्द बदलाव नहीं करेगा तो वह एस 400 प्रणाली को सक्रिय करने से पीछे नहीं हटेगा।

तुर्की के राष्ट्रपति रेसेप तैय्यप एर्दाेगन ने हालांकि इस मामले पर उम्मीद जताई है कि अमेरिका के साथ यह मसला बातचीत के जरिए हल कर लिया जाएगा। एर्दाेगन ने जस्टिस और डेवलपमेंट पार्टी के संसदीय समूह से कहा, “ द्विपक्षीय बातचीत में एस 400 को लेकर जारी विवाद को खत्म करने का प्रयास किया जायेगा। हम अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से एस 400 सुरक्षा प्रणाली को लेकर जारी विवाद को अधिकारीयों के जरिये खत्म करने की पूरी कोशिश करेंगे। उन्होंने कहा,“ एस 400 सुरक्षा प्रणाली को छोड़ देना या सक्रिय नहीं करने का कोई सवाल ही नहीं है और इस मामले का निवारण सच्चाई के माध्यम से किया जाना चाहिए।

गौरतलब है कि तुर्की रुसी निर्मित एस 400 सुरक्षा प्रणाली को सक्रिय करने पर विचार कर रहा है। सैन्य-तकनीकी सहयोग के लिए रूस की संघीय सेवा के प्रमुख दिमित्री शुगाव ने इसे लेकर कहा है कि एस-400 सुरक्षा के प्रणाली के संचालन प्रकिया को लेकर हम वर्ष के अंत तक तुर्की विशेषज्ञों को पूरी तरह से प्रशिक्षित कर दिया जाएगा। यह प्रणाली अगले वर्ष वसंत ऋतु से पहले युद्ध के लिए पूरी तरह तैयार हो जाएगी।
अमेरिका तुर्की की एस-400 सुरक्षा प्रणाली खरीदने के खिलाफ था। अमेरिका का कहना था कि नाटो सुरक्षा मापदंडो के आधार पर यह हथियार प्रणाली ‘अयोग्य’ है और इससे पांच जनेरेशन वाले एफ-35 लड़ाकू विमान के संचालन पर भी असर पड़ सकता है।

तुर्की द्वारा रुसी एस-400 सुरक्षा प्रणाली खरीदने पर अमेरिका खासा नाराज़ हो गया था जिसके बाद उसने इस वर्ष जुलाई में एफ-35 कार्यक्रम में तुर्की की सहभागिता को स्थगित करते हुए कहा था कि वह मार्च 2020 तक इस परियोजना से तुर्की को पूरी तरह बाहर कर देगा। वहीं रूस ने तुर्की को अपने लड़ाकू विमान एसयू35 और एसयू 37 बेचने की इच्छा जताई है।