Deprecated: title is deprecated since version WPSEO 14.0 with no alternative available. in /home/mobilepenews/public_html/wp-includes/functions.php on line 4723

Deprecated: WPSEO_Frontend::get_title is deprecated since version WPSEO 14.0 with no alternative available. in /home/mobilepenews/public_html/wp-includes/functions.php on line 4723

Deprecated: title is deprecated since version WPSEO 14.0 with no alternative available. in /home/mobilepenews/public_html/wp-includes/functions.php on line 4723

Deprecated: WPSEO_Frontend::get_title is deprecated since version WPSEO 14.0 with no alternative available. in /home/mobilepenews/public_html/wp-includes/functions.php on line 4723
अपनों को छोड़ विदेशियों पर मेहरबानी, अंधे के समान रेवड़ी बांट रहा है मोदी सरकार का ये मंत्रालय – Mobile Pe News

अपनों को छोड़ विदेशियों पर मेहरबानी, अंधे के समान रेवड़ी बांट रहा है मोदी सरकार का ये मंत्रालय

केन्द्र सरकार का आयुष मंत्रालय उस अंधे के समान व्यवहार कर रहा है जो सिर्फ घरवालों को ही रेवड़ी देता है। शेष लोगों को उसके हाथ से कभी भी रेवड़ी नहीं मिल पाती। मंत्रालय ने हाल ही अपने अधीन आने वाली भारतीय चिकित्सा पद्धतियों में आयुर्वेद के बाद सर्वाधिक लोकप्रिय यूनानी के साथ भी अंधे के समान व्यवहार किया है।

मंत्रालय ने हाल ही विदेशी दूतावासों में भारतीय चिकित्सा पद्धतियों के चिकित्सकों की तैनाती का काम शुुरू किया है, लेकिन उसने दूतावासों में आयुर्वेद के अलावा सिर्फ होम्योपैथी चिकित्सकों की नियुक्ति की है, जबकि होम्योपैथी भारतीय चिकित्सा पद्धति भी नहीं है। यूनानी पूरी तरह से भारतीय पद्धति है और आयुर्वेद के समान सिर्फ प्रकृति प्रदत्त जड़ी बूटियों से बनने वाली दवाओं से रोग को जड़ से खत्म करती है। हालांकि इसका उदय यूनान से हुआ लेकिन जड़ी—बूटी आधारित होने की वजह से भारतीय आयुर्वेद ने इसे हाथों हाथ अपना लिया और तब से ये भारत में आयुर्वेद के बाद सबसे अधिक लोकप्रिय है।

मजे की बात ये कि मंत्रालय ने जिन दो देशों दुबई और मलेशिया के दूतावासों में आयुर्वेद तथा होम्योपैथी चिकित्सकों की नियुक्ति की है, वहां होम्योपैथी का कतई प्रसार नहीं है और दोनों देश न सिर्फ यूनानी चिकित्सा पद्धति को अपनाए हुए है बल्कि दुबई में तो यूनानी दवाओं को बनाने में काम आने वाली कई जड़ी—बूटी बड़े पैमाने पर उगाई जाती हैं, जहां से भारत उनका आयात कर यूनानी दवाएं बनाता है। बाद में दुबई और मलेशिया में उनका निर्यात होता है। मंत्रालय दोनों देशों के दूतावासों में यूनानी चिकित्सकों की नियुक्ति कर इस पद्धति का प्रसार बढ़ा सकता था, लेकिन मंत्रालय ने संकीर्ण नजरिया अपनाकर इस पद्धति के चिकित्सकों की नियुक्ति को दरकिनार कर होम्योपैथी चिकित्सकों की नियुक्ति कर दी।

यूनानी चिकित्सा पद्धति के प्रसार में बड़ी भूमिका निभाने वाली अखिल भारतीय यूनानी तिब्बी कांग्रेस ने सरकार के सौतेले रवैये पर पत्र लिखकर रोष जताया है। कांग्रेस के मानद महासचिव डा. सैयद अहमद के अनुसार मौजूदा केन्द्र सरकार पिछले पांच साल से यूनानी ​चिकित्सा पद्धति का गला घोंटने में लगी हुई है। विदेशी दूतावासों में यूनानी चिकित्सकों की नियुक्ति नहीं करने के साथ ही देश के मेडिकल कॉलेज अस्पतालों में भी इसकी शाखा खोलने में कंजूसी बरती है। डा. सैयद अहमद खान का आरोप है कि सरकार राजनीतिक संकीर्णता की वजह से विदेशी पद्धति होम्योपैथी को भारतीय पद्धति यूनानी के मुकाबले ज्यादा तरजीह दे रही है जिससे रोग को जड़ से खत्म करने वाली इस पद्धति को बेहद नुकसान हो रहा है।