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ऐसा करते ही दिल 80 साल तक गाता है ईलू—ईलू, युवाओं के समान रहती है फुर्ती

अगर आप रिफाइंड तेलों की अपेक्षा सरसों तेल से बनी खाद्य सामग्री से बना भोजन खाते हैं तो आपका दिल 80 साल की उम्र में भी 25 साल के युवा के समान ईलू—ईलू गाता है। असल में सरसों तेल में प्रकृति ने ऐसे गुण ठूंस ठूंसकर भरे हुए हैं कि उसको नुकसान तो दूर जरा सी खरोंच भी नहीं आती।

ये हम नहीं कह रहे बल्कि कार्डियोलॉजिकल सोसाइटी ऑफ इंडिया (सीएसआई) के अध्यक्ष डॉ. मृणाल कांति दास ने ये दावा किया है। डा. दास का दावा है कि सरसों तेल ही दिल को प्रति मिनट 72 की रफ्तार से धड़कने मौका देता है, जबकि अन्य तेल दिल के धड़कने की रफ्तार को प्रति मिनट 50 तक ले आते हैं जिससे हृदय बीमार हो जाता है।
डॉ. दास के अनुसार देश में हृदय रोगियों की बढ़ती हुई संख्या को देखते हुए चार राज्यों बिहार, बंगाल, उड़ीसा एवं झारखंड में तेल की सर्वाधिक खपत होती है और विज्ञापनों का मायाजाल फैला कर बहुराष्ट्रीय कम्पनियों ने इन राज्यों से सरसों तेल को दर—बदर कर दिया है। जबकि सरसों तेल ही एकमात्र ऐसा तेल है जो हृदय का सच्चा दोस्त है। शेष तेल दिल के लिए दुश्मन के समान है और इस वजह से हृदय रोगियों की संख्या में भारी इजाफा हो रहा है।

डॉ. दास ने कहा कि भौगोलिक, आर्थिक एवं सामाजिक संरचना भी हृदय रोग से जनित रोगों को प्रभावित करते हैं। उन्होंने हृदय रोग से संबंधित बीमारियों से बचाव के लिए समुचित खानपान एवं रहन-सहन की सलाह देते हुए कहा कि ज्यादातर मामलों में रहन-सहन में अनुशासनहीनता की कमी के कारण हृदय रोग बढ़ रहा है।
सीएसआई अध्यक्ष ने लोगों को जंक फूड और तले हुए पदार्थों के सेवन से दूर रहने की अपील करते हुए कहा कि शाकाहारी भोजन लाभदायक है। खाने में डिब्बाबंद पदार्थ और अधिक नमक युक्त खाद्य नहीं खाना चाहिए। मांसाहारी भोजन, धूम्रपान और शराब के सेवन से भी परहेज करना चाहिए। डॉ. दास ने कहा कि शुरुआती दिनों में हृदय रोग से संबंधित जटिलताओं को किसी अन्य बीमारी से जोड़ना भ्रांति की स्थिति को पैदा करता है जिसके कारण मरीज जब तक चिकित्सक के पास पहुंचते हैं तब तक उनकी बीमारी काफी बढ़ चुकी होती है।

जाने माने हृदय रोग चिकित्सक का कहना है कि हृदय रोग अचानक नहीं होता। लाइफ़स्टाइल में बदलाव, अनुशासित दिनचर्या और अनुशासित खानपान का समुचित ध्यान रखकर इससे बचा जा सकता है। स्वस्थ रहने के लिए समय पर सोना और जागना जरूरी है। डॉ दास ने कहा कि अक्सर जिसे लोग गैस की समस्या समझते हैं वह हृदय रोग का भी लक्षण हो सकता है। कभी-कभी जबड़े में और बांह में दर्द होना भी हृदय रोग के लक्षण हो सकते हैं। डॉ. दास ने कहा कि दिल को स्वस्थ रखने के लिए रिफाइंड तेल से परहेज की जरूरत है।

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