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विवाह के समय घर से भाग कर लिया था गाय से विवाह, अब 60 हजार गायों के पिता

गोसेवा में सराहनीय कार्य करने के लिए पद्मश्री सम्मान से विभूषित ब्रज के संत रमेश बाबा की चाहत है कि उनकी गोशालाओं में गायों की संख्या एक लाख के पार पहुंच जाये।

रमेश बाबा खराब स्वास्थ्य के कारण विगत माह पद्मश्री का सम्मान ग्रहण करने दिल्ली नहीं जा सके थे। उन्हें यह सम्मान उ0प्र0 ब्रज तीर्थ विकास परिषद के उपाध्यक्ष शैलजाकांत मिश्र एवं जिलाधिकारी सर्वज्ञ राम मिश्र द्वारा बरसाना जाकर दिया गया। उन्होने कहा कि वे गोशाला की क्षमता बढ़ाकर एक लाख करना चाहते हैं। 66 वर्ष पूर्व प्रयाग विश्ववि़द्यालय से ग्रेजुएशन करने के बाद उनके अंदर श्रीकृष्ण की भक्ति का ऐसा प्रस्फुटन हुआ कि वे बिना विवाह किये घर को छोड़कर चित्रकूट होते हुए ब्रज में आ गए। इस संत को पूरा भरोसा है कि ठाकुर जी उनकी गोशाला की क्षमता बढ़ाने की इच्छा को भी पूरा कराएंगे।

मान मंदिर सेवा संस्थान के कार्यकारी अध्यक्ष राधाकांत शास्त्री ने बताया कि बरसाना में रमेश बाबा की गोशाला में वर्तमान में 60 हजार गाये हैं। बाबा की इच्छा इनकी संख्या बढ़ाकर एक लाख करने की है। उन्होंने बताया कि वेैसे तो रमेश बाबा को यह सम्मान गोसेवा में सराहनीय कार्य करने के लिए दिया गया है लेकिन रमेश बाबा का जीवन ही समाज सेवा को समर्पित है।
इस संत ने सन 1990 के दशक में माइनिंग रोकने के लिए बरसाना की पहाडी के सुनसान इलाके में लगातार कई दिन तक धरना दिया था। उसके बाद प्रदेश एवं राजस्थान की सरकारों ने अलग अलग तरीके से इस पर कार्रवाई की थी। यमुना प्रद्दूषण को दूर करने के लिए बाबा के नेतृत्व में 2011 एवं 2015 का दिल्ली कूच का आंदोलन अपनी पटकथा पहले ही लिख चुका है।

उन्होने बताया कि बाबा के नेतृत्व में 1988 से शुरू की गई ब्रज चैरासी कोस की यात्रां हर साल बिना किसी व्यवधान के तब से चल रही है। 45 दिवसीय इस यात्रा में हर साल लगभग 15 हजार कृष्ण भक्त भाग लेते हैं। जहां गोस्वामियों तथा अन्य लोगों के नेतृत्व में हर साल चलने वाली ब्रज चैरासी कोस की यात्रा में भाग लेनेवालों से यात्रा में आनेवाला खर्च लिया जाता है वहीं रमेश बाबा की यात्रा का पूरा खर्च बाबा एवं उनके शिष्य स्वयं वहन करते हैं।

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